अलवर में कब्रिस्तान की जमीन पर अतिक्रमण का विरोध करने पर खूनी संघर्ष, तलवारों के हमले में चार लोग घायलनिशांत कुमार को लेकर जनता बना चुकी है मन, जेडीयू विधायक विनय कुमार चौधरी का बड़ा दावाबेंगलुरु में दामाद ने सिलबट्टे से की सात लोगों की हत्या, नंदी हिल्स से चिकबल्लापुर तक फेंके गए शवदिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का वांटेड सदस्य गिरफ्तारप्रयागराज के लिए रवाना हुए अनंत सिंह, बोले- बेटी की शादी का न्योता देने लालू प्रसाद यादव के पास भी जाऊंगाअसम के डिब्रूगढ़ में ऑयल इंडिया के टैंक फार्म में लगी भीषण आग, एक की मौत और छह घायलनैनीताल की माल रोड बचाने के लिए क्या है माइक्रो पाइल तकनीक, जिससे मजबूत होगी ऐतिहासिक सड़कजमशेदपुर के जलेबी लाइन बाजार में सजी मिठाइयों की महफिल, दिवाली पर बारह तरह के लड्डू और नमकीन की भारी मांगझारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, JSSC CGL के दो हजार सफल अभ्यर्थियों को राहत और परीक्षा रद्द करने का आदेश खारिजयूपी में आलू किसानों को निजी कोल्ड स्टोरेज के इस्तेमाल पर मिलेगी 25 प्रतिशत सहायता, जानिए भामाशाह योजना के नियम
जंगल की पगडंडी से हलचल भरे बाजार तक, जानिए कैसे बदला हरिद्वार का ऐतिहासिक तीर्थ मार्गउत्तराखंड
3 अक्तू॰ 2026, 6:03 pm (34 दिन पहले)· 1

जंगल की पगडंडी से हलचल भरे बाजार तक, जानिए कैसे बदला हरिद्वार का ऐतिहासिक तीर्थ मार्ग

हाईवे बनने से पहले चारधाम और ऋषिकेश जाने का एकमात्र जरिया रहा यह प्राचीन पथ आज दुकानों से भरे अपर रोड बाजार में तब्दील हो चुका है।

तीर्थनगरी हरिद्वार का केंद्र माना जाने वाला अपर रोड आज स्थानीय खरीदारों और दूर-दराज से आने वाले सैलानियों की भारी भीड़ से सराबोर रहता है। दुकानों की लंबी कतारों और चहल-पहल से भरा यह इलाका केवल व्यावसायिक गतिविधियों का केंद्र भर नहीं है, बल्कि इसका अपना एक समृद्ध और गहरा ऐतिहासिक महत्व रहा है। यह वही ऐतिहासिक रास्ता है जो मैदानों को सीधे पहाड़ी क्षेत्रों से जोड़ता था और हरिद्वार से ऋषिकेश जाने का प्राथमिक संपर्क सूत्र हुआ करता था। मौजूदा दौर में अपर रोड से आगे बढ़ते हुए भीमगोड़ा, खड़खड़ी और दूधाधारी चौक तक फैला यह पूरा क्षेत्र बेहद व्यस्त और सघन बाजार की शक्ल ले चुका है।

बीहड़ जंगलों के बीच चारधाम की यात्रा का इकलौता जरिया

जिस इलाके में आज चमचमाते आधुनिक सिक्स लेन हाईवे और सुगम बाईपास दिखाई देते हैं, वहां दशकों पहले बेहद घना और दुर्गम जंगल हुआ करता था। उस दौर में हरिद्वार-ऋषिकेश मार्ग के रूप में पहचानी जाने वाली यह सड़क ही बीहड़ वनों के बीच से गुजरने वाला अकेला रास्ता थी। देश के विभिन्न कोनों से आने वाले तीर्थयात्री चारधाम की अपनी कठिन यात्रा पूरी करने और पहाड़ों की ओर कूच करने के लिए पूरी तरह इसी डगर पर निर्भर थे। खड़खड़ी क्षेत्र के स्थानीय व्यापारी राजीव भट्ट के अनुसार, पुराने समय में यहां केवल एक ही संकरी सड़क हुआ करती थी, जिसे हरिद्वार-रुड़की रोड के नाम से भी पुकारा जाता था। पहाड़ों की ओर जाने के लिए किसी वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था उस समय मौजूद नहीं थी।

ये भी पढ़ें

लाल सिटी बसें, तांगों की खटपट और पुरानी स्मृतियां

उस गुजरे दौर में आस्था का प्रवाह बेहद अनुशासित और धीमा हुआ करता था। श्रद्धालु पहले हर की पौड़ी के पवित्र घाटों पर गंगा स्नान संपन्न करते थे और फिर इसी मार्ग से होते हुए दूधाधारी चौक पार कर ऋषिकेश और अन्य पावन धामों के दर्शन को निकलते थे। व्यापारी राजीव भट्ट बताते हैं कि इस ऐतिहासिक सड़क पर पहले लाल रंग की सिटी बसें और पारंपरिक घोड़े-तांगे दौड़ा करते थे। जैसे-जैसे वक्त बदला, वैसे-वैसे नई तकनीकों के साथ आधुनिक चौड़े राजमार्ग और बाईपास अस्तित्व में आते गए। नतीजतन, मुख्य यात्रा यातायात नए मार्गों पर स्थानांतरित हो गया और यह पारंपरिक मार्ग धीरे-धीरे एक विशाल बाजार के रूप में ढलता चला गया।

जीरो जोन में तब्दील हुआ पुराना रास्ता

भीमगोड़ा प्रदेश व्यापार मंडल के कोषाध्यक्ष और स्थानीय व्यापारी अजय अरोड़ा बताते हैं कि हर की पौड़ी से आगे निकलने वाले इसी रास्ते को असल हरिद्वार-ऋषिकेश रोड के तौर पर जाना जाता था। उस कालखंड में लाल रंग की सरकारी बसों से लेकर हर तरह का आवागमन इसी एकल मार्ग से होकर गुजरता था, क्योंकि बाहर की ओर जाने या पहाड़ों का रुख करने के लिए कोई दूसरा रास्ता था ही नहीं। वर्तमान परिस्थितियों में आधुनिक हाईवे काफी बाद में तैयार हुए, जिसके बाद इस पूरे पुराने मार्ग को जीरो जोन घोषित कर दिया गया। अब यहां वाहनों की पार्किंग की कोई व्यवस्था उपलब्ध नहीं है और यह पूरा इलाका घने बाजार में बदल चुका है। आधुनिकता के इस दौर में भी बुजुर्गों की स्मृतियों में यह पथ वही पावन डगर है, जो श्रद्धालुओं को उनकी आध्यात्मिक यात्रा पर आगे बढ़ाता था।

सवाल-जवाब

अपर रोड बाजार का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
यह इलाका पुराने समय में हरिद्वार को ऋषिकेश और पहाड़ी क्षेत्रों से जोड़ने वाला एकमात्र मुख्य मार्ग था।
हाईवे बनने से पहले चारधाम यात्रा किस रास्ते से होती थी?
तीर्थयात्री घने जंगलों के बीच से गुजरने वाले इसी पुराने रास्ते से दूधाधारी चौक होते हुए ऋषिकेश जाते थे।
पुराने समय में इस मार्ग पर किस प्रकार के वाहन चलते थे?
इस सड़क पर लाल रंग की सिटी बसें और पारंपरिक घोड़े-तांगे मुख्य यातायात के रूप में चला करते थे।
वर्तमान में इस मार्ग की यातायात स्थिति क्या है?
अब यह पूरा इलाका बाजार बन चुका है और इसे बिना पार्किंग की सुविधा वाला जीरो जोन घोषित किया गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Neha Verma@neha-verma·33 दिन पहले

अपर रोड पर अब तो बस सामान और भीड़ दिखती है। याद है जब यहाँ तांगे चलते थे और शांति से दर्शन होते थे?

Ravikash Gupta@ravikash·33 दिन पहले

हरिद्वार के इस पुराने रास्ते को जंगल से बाजार बनते देखना अजीब है। बचपन की यादें अब सिर्फ दुकानों और भीड़ के पीछे छिप गई हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·33 दिन पहले

रवि जी, सच कहा आपने। पर क्या अब वहां पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है?

Karan Malhotra@karan-malhotra·33 दिन पहले

हरिद्वार के इस पुराने रास्ते को जब बाजार बनते देखता हूँ, तो शहर की रफ्तार और अतिक्रमण के कई पुराने मामलों की याद आ जाती है। कभी जो रास्ता सिर्फ तीर्थयात्रियों का था, अब दुकानों में बदल गया है।

Rohan Verma@rohan-verma·33 दिन पहले

करण भाई, तांगे और लाल बसों वाले उस दौर की याद दिला दी आपने। आज का बाज़ार देखकर यकीन ही नहीं होता कि कभी यहाँ घना जंगल हुआ करता था।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp