बराबरी और साझेदारी का नया दौर, करवा चौथ पर पतियों के उपवास रखने की अनूठी परंपराडिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बैंक की लापरवाही पर पीड़ितों को मुआवजा दिलाने की तैयारीपहाड़ी धाम की थाली का गौरव: बिना प्याज़-टमाटर ऐसे तैयार करें क्रीमी और सुगंधित हिमाचली चना मदराबिहार के ऐतिहासिक प्रतीकों को कबाड़ से जीवंत बना रहे भोजपुर के इंजीनियर प्रशांतअमेरिकी चुनाव 2028: चुनावी नतीजों को नकारने वाले कई रिपब्लिकन नेता अटॉर्नी जनरल की दौड़ में शामिलचांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट, छह दिनों में 40,000 रुपये तक लुढ़के दामआईआईटी मद्रास ने जारी किया गेट 2027 का पूरा शेड्यूल, रोबोटिक्स समेत नए बदलावों के साथ इस दिन से शुरू होंगे आवेदनफीफा अंडर-15 विश्व कप में अफगानिस्तान से हारा भारत, अब कजाकिस्तान से टक्करआर्मेनिया की संसद में चुनावी वादे पर भिड़े नेता, लाइव प्रसारण के दौरान चले लात-घूंसे और फटे कपड़ेऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी में बैंक की चूक पर ग्राहकों को पूरा हर्जाना मिले: शीर्ष अदालत
जंतर-मंतर पर सुरक्षा कड़ी करने के पीछे दिल्ली पुलिस ने दी पुरानी हिंसा की दलीलदिल्ली
9 अक्तू॰ 2026, 10:26 pm (20 दिन पहले)· 3

जंतर-मंतर पर सुरक्षा कड़ी करने के पीछे दिल्ली पुलिस ने दी पुरानी हिंसा की दलील

दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली और जंतर-मंतर इलाके में लागू पाबंदियों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि जुलाई के प्रदर्शन में 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे और बिना अनुमति विरोध प्रदर्शन से कानून-व्यवस्था पर असर पड़ता है।

नई दिल्ली के जंतर-मंतर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बंदोबस्त कड़े किए जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने इन प्रतिबंधों की वजहें साझा की हैं। प्रशासन के मुताबिक, राजधानी में कानून और व्यवस्था की स्थिति सामान्य बनाए रखने, सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा अनियंत्रित भीड़ को रोकने के उद्देश्य से यह अस्थायी कदम उठाया गया है। दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त और जनसंपर्क अधिकारी राजीव रंजन का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठाने का पूरा अधिकार है, लेकिन नई दिल्ली क्षेत्र में कई प्रमुख सरकारी संस्थान और संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के कार्यालय मौजूद हैं। ऐसे में किसी भी जमावड़े के दौरान वहां काम करने वाले कर्मचारियों, स्थानीय दुकानदारों, राहगीरों और आम जनता की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

जुलाई के लंबे आंदोलन और हिंसा का दिया हवाला

सुरक्षा कदमों को उचित ठहराते हुए पुलिस प्रशासन ने जंतर-मंतर पर जुलाई माह में हुए पिछले प्रदर्शन की घटनाओं का विस्तार से उल्लेख किया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उस समय केवल एक दिन के सांकेतिक धरने की प्रशासनिक मंजूरी दी गई थी, लेकिन आयोजकों ने इसे लगभग एक महीने तक लगातार जारी रखा। इस लंबी अवधि के दौरान कानून-व्यवस्था की गंभीर चुनौतियां सामने आईं और हिंसक झड़पों के बीच 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इसके साथ ही पुलिस के आधिकारिक बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि उस आंदोलन में आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,000 से अधिक लोग शामिल हो गए थे, जिसके चलते माहौल बिगड़ा और हुई झड़पों में छात्रों को भी चोटें आईं। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि वैसी खतरनाक स्थितियों की पुनरावृत्ति राजधानी की सड़कों पर दोबारा बिल्कुल नहीं होनी चाहिए।

ये भी पढ़ें

सीमित क्षमता और महिला पुलिसकर्मियों की सुरक्षा पर चिंता

जंतर-मंतर के भौगोलिक दायरे की सीमाओं को रेखांकित करते हुए पुलिस ने बताया कि इस स्थान पर एक समय में लगभग 1,000 लोगों के ही सुरक्षित रूप से जुटने की गुंजाइश है। यदि आंदोलनकारियों की संख्या इस सीमा से अधिक हो जाती है, तो किसी भी आकस्मिक चिकित्सा या आपात स्थिति में राहत पहुंचाना और अत्यधिक भीड़ का प्रबंधन करना बेहद जोखिम भरा साबित हो सकता है। इसके अलावा, प्रशासन ने हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिसकर्मियों के साथ हुई बदसलूकी, छेड़छाड़ और मारपीट की शिकायतों पर भी गहरी चिंता जताई है। पुलिस नेतृत्व का कहना है कि महिला सुरक्षाकर्मियों के साथ हुए इस प्रकार के दुर्व्यवहार को कड़े कानूनी दृष्टिकोण से देखा जा रहा है और ऐसे मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बिना पूर्व अनुमति प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट के नियम

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) उसी स्थल पर पुनः बड़ा धरना आयोजित करने की तैयारी कर रही है, परंतु इस कार्यक्रम के लिए अनिवार्य औपचारिक मंजूरी हासिल नहीं की गई है। पुलिस ने स्मरण कराया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी सार्वजनिक स्थानों पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए हैं और कानूनी नियमों के अनुपालन को अनिवार्य बताया है। इसी परिप्रेक्ष्य में आयोजकों को सख्त ताकीद की गई है कि वे अपने समर्थकों को कानूनी प्रावधानों की जानकारी दें और यह साफ करें कि बिना वैध अनुमति गैरकानूनी तरीके से एकत्र होने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

राजधानी के आर्थिक कामकाज और जनजीवन को बचाना जरूरी

दिल्ली पुलिस का मानना है कि राजधानी देश की एक प्रमुख आर्थिक धड़कन भी है, लिहाजा किसी भी राजनीतिक या सामाजिक आंदोलन से आम नागरिकों के आवागमन, बाजारों के व्यापार और दैनिक दफ्तरों के संचालन पर अनुचित प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। नियमानुसार पहले से अनुमति लेने पर प्रशासनिक तंत्र को प्रदर्शनकारियों की संभावित संख्या, समय और स्थान का स्पष्ट ब्योरा मिल जाता है, जिससे यातायात नियंत्रण, सुरक्षा घेराबंदी और एम्बुलेंस जैसी आपात सेवाओं का उचित प्रबंध समय रहते किया जा सकता है। पुलिस ने दोहराया है कि मौजूदा बंदिशें पूरी तरह अस्थायी हैं और इनका ध्येय टकराव को टालना, शहर की गतिशीलता बनाए रखना और आंदोलनकारियों सहित हर नागरिक को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है।

सवाल-जवाब

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर पाबंदियां क्यों लगाई हैं?
पुलिस ने बताया कि शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अनियंत्रित भीड़ को रोकने और आम नागरिकों व पुलिसकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ये अस्थायी पाबंदियां लगाई गई हैं।
जुलाई के प्रदर्शन में कितने पुलिसकर्मी घायल हुए थे?
दिल्ली पुलिस के अनुसार जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन और झड़पों के दौरान 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
जंतर-मंतर पर एक समय में कितने लोग सुरक्षित रह सकते हैं?
प्रशासन के मुताबिक जंतर-मंतर का इलाका सीमित है और वहां एक समय में लगभग 1,000 लोगों को ही सुरक्षित तरीके से रखा जा सकता है।
क्या आगामी प्रदर्शन के लिए पुलिस से अनुमति ली गई है?
नहीं, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इस नए प्रदर्शन के लिए जरूरी प्रशासनिक अनुमति नहीं ली है।
प्रदर्शनों के दौरान महिला पुलिसकर्मियों को लेकर क्या चिंता जताई गई?
पुलिस ने हाल के प्रदर्शनों के दौरान ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिसकर्मियों के साथ छेड़छाड़ और मारपीट की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Nyra Kaif@nyra-kaif·20 दिन पहले

भीड़ और सुरक्षा की बात ठीक है, पर हर बार पाबंदियों का डर दिखाकर आवाज़ दबाना भी तो सही नहीं है। थोड़ी गुंजाइश तो रखनी चाहिए।

Arjun Mehta@arjun-mehta·20 दिन पहले

जुलाई की हिंसा और महिला पुलिसकर्मियों से बदसलूकी की बातें गंभीर हैं, लेकिन पुलिस का यह रुख देखकर एक सवाल दिमाग में आता है कि अगर हर बार पिछले हंगामे का हवाला देकर जंतर-मंतर पर रोक लगती रही, तो फिर आम नागरिक अपनी नाराजगी जताने आखिर कहाँ जाएँगे?

Rohan Gupta@rohan-gupta·20 दिन पहले

अर्जुन भाई, बात तो सही है आपकी, लेकिन पिछले बार 200 पुलिसवाले घायल हुए थे और महिला सुरक्षाकर्मियों के साथ जो हुआ, उसे भी तो नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

Karan Malhotra@karan-malhotra·20 दिन पहले

पिछली बार जंतर-मंतर पर जो हुआ था, उसके बाद पुलिस का यह रुख चौंकान्ने वाला नहीं है। जब धरने में अपराधी घुस जाएं और इतने सारे पुलिसवाले घायल हो जाएं, तो सख्ती तो बरती ही जाएगी। पर बिना अनुमति के प्रदर्शन और सुरक्षा के बीच का यह संतुलन बनाना आसान नहीं है।

Rohan Verma@rohan-verma·20 दिन पहले

करण भाई, बात तो सही है आपकी। पिछली बार जैसी हिंसा के बाद पुलिस रिस्क नहीं ले सकती, लेकिन हर बार सख्ती से लोकतांत्रिक हक भी तो दब जाते हैं।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp