अक्टूबर महीने में जंतर-मंतर पर आयोजित छात्र विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस बर्बरता के मामले में कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई के आरोपों की जांच कर रही उच्च-स्तरीय समिति को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह एक महीने के भीतर अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट सौंपे। अदालत ने साफ किया है कि इस गंभीर विषय के नतीजों के लिए अनिश्चित काल तक प्रतीक्षा नहीं की जा सकती। इसी बीच, प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख पदाधिकारियों से दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गहन पूछताछ की है।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख और एक महीने की समयसीमा
शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति की पीठ ने जांच समिति की कार्यप्रणाली पर विचार किया। सुप्रीम कोर्ट ने रेखांकित किया कि 31 अक्टूबर को समिति द्वारा जमा की गई रिपोर्ट सिर्फ एक स्थिति रिपोर्ट थी। इस रिपोर्ट में अब तक की गतिविधियों और की गई प्रगति का विवरण तो दिया गया था, लेकिन पुलिस की कथित बर्बरता और आरोपों के संबंध में कोई ठोस निष्कर्ष प्रस्तुत नहीं किया गया था। इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि समिति अब बिना किसी विलंब के जांच को अंतिम रूप दे और एक माह में निष्कर्ष अदालत के सामने रखे।
जांच का दायरा बढ़ाने और सबूतों की समीक्षा के आदेश
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उच्च-स्तरीय पैनल को अपनी जांच प्रक्रिया का दायरा व्यापक रखने के निर्देश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि समिति को अपनी छानबीन केवल सीधे पीड़ितों द्वारा दी गई शिकायतों तक ही सीमित नहीं रखनी चाहिए। पैनल को उन सभी शिकायतों, वीडियो फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल या भौतिक साक्ष्यों की जांच करनी चाहिए जो वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं या अन्य लोगों द्वारा पीड़ितों की ओर से प्रस्तुत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, प्राप्त सभी दस्तावेजों का अध्ययन कर संबंधित पुलिस अधिकारियों से आधिकारिक जवाब मांगने का आदेश भी दिया गया है।
क्राइम ब्रांच के समक्ष पेश हुए सीजेपी के सह-संयोजक
दूसरी तरफ, इस प्रदर्शन से जुड़ी पुलिस जांच के सिलसिले में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका गुरुवार को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के समक्ष उपस्थित हुए। दोनों नेताओं को राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। अधिकारियों के अनुसार, यह पूछताछ अक्टूबर में जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन और वहां कथित रूप से बिना अनुमति प्रवेश (ट्रैस्पॉसिंग) करने के आरोपों के संबंध में की गई थी। उल्लेखनीय है कि वर्तमान नियमों के तहत जंतर-मंतर को अब अधिसूचित प्रदर्शन स्थल की सूची से बाहर रखा गया है।
सीलबंद रिपोर्ट और अगली अदालती कार्रवाई
मामले में पैरवी कर रहे सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने अदालती कार्यवाही की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उच्च-स्तरीय समिति ने कुछ ही दिन पहले एक सीलबंद लिफाफे में अपनी अंतरिम रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी थी। चूंकि यह रिपोर्ट सीधे अदालत में जमा की गई थी, इसलिए इसकी प्रतियां पक्षों के साथ साझा नहीं की गई थीं। सुनवाई के दौरान पीठ ने रिपोर्ट की कुछ महत्वपूर्ण पंक्तियां पढ़कर सुनाईं और टिप्पणी की कि सार्वजनिक डोमेन में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि नियुक्त एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) और नोडल अधिकारियों को सभी शिकायतें व सबूत सौंपे जाएंगे, ताकि समिति अपनी अंतिम सिफारिश तैयार कर सके। इस मामले की अगली सुनवाई 2 तारीख को निर्धारित की गई है।



















