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जोधपुर के अनोखे उच्छिष्ट गणपति मंदिर के कपाट खुलते ही उमड़े 40 हजार श्रद्धालु, साल में सिर्फ 12 घंटे मिलते हैं दर्शनराजस्थान
15 सित॰ 2026, 3:00 pm (10 दिन पहले)· 0

जोधपुर के अनोखे उच्छिष्ट गणपति मंदिर के कपाट खुलते ही उमड़े 40 हजार श्रद्धालु, साल में सिर्फ 12 घंटे मिलते हैं दर्शन

राजस्थान के जोधपुर में गणेश चतुर्थी पर उच्छिष्ट गणपति मंदिर के कपाट महज 12 घंटे के लिए खोले गए, जहां दर्शन के लिए 30 से 40 हजार श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

जोधपुर में गणेश चतुर्थी का त्योहार इस बार भी एक अद्भुत और दुर्लभ धार्मिक परंपरा का साक्षी बना। शहर के प्रसिद्ध उच्छिष्ट गणपति मंदिर के कपाट वर्ष में केवल एक बार और मात्र 12 घंटों की अवधि के लिए खोले गए। गणेश चतुर्थी की शाम विशेष विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद जैसे ही द्वार खोले गए, पूरा परिसर गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से गूंज उठा। रातभर से लेकर अलसुबह मंदिर बंद होने तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इस संक्षिप्त समयावधि के दौरान जोधपुर के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 30 से 40 हजार श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश के दुर्लभ दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

तंत्र विधि और लोक कल्याण का विशेष महत्व

मंदिर के व्यवस्थापक और पुजारी पंडित कमलेश दवे तथा पंडित अजय दवे ने बताया कि नव गणपति परंपरा में उच्छिष्ट गणपति का स्थान अत्यंत विशिष्ट माना गया है। यहां स्थापित प्रतिमा में भगवान गणेश अपनी शक्ति रिद्धि के साथ विराजमान हैं। धार्मिक शास्त्रों में वर्णित नियमों के अनुसार इस विशेष प्रतिमा का सामान्य रूप से नियमित दर्शन कराना वर्जित माना गया है। यही कारण है कि प्राचीन परंपरा का पालन करते हुए वर्ष में केवल गणेश चतुर्थी के दिन ही 12 घंटे के लिए मंदिर के पट खोले जाते हैं। इस दौरान तंत्र विधि, विशेष कवच, यंत्र और मंत्रों के माध्यम से पूजा की जाती है, जिसका मुख्य ध्येय जन-सामान्य का कल्याण और लोक समृद्धि है।

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35 वर्ष पुराना मंदिर और सात दशक प्राचीन प्रतिमा

धार्मिक इतिहास की जानकारी देते हुए पंडित कमलेश दवे ने स्पष्ट किया कि मंदिर का निर्माण करीब 35 वर्ष पूर्व हुआ था, जबकि भगवान उच्छिष्ट गणपति की यह दिव्य प्रतिमा लगभग 60 से 70 वर्ष पुरानी है। इस पवित्र प्रतिमा की स्थापना उनके गुरु शिवनारायण जी द्वारा की गई थी। इस परंपरा की गूढ़ जानकारियों को संकलित कर 'उच्छिष्ट गणपति' नाम से एक पुस्तक भी प्रकाशित की जा चुकी है। श्रद्धालुओं में यह अटूट विश्वास है कि उच्छिष्ट गणपति के दर्शन और पूजन से संतान सुख, धन-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

देशभर से पहुंचे श्रद्धालु और भक्तों का अनुभव

इस दुर्लभ अवसर का लाभ उठाने के लिए केवल जोधपुर ही नहीं, बल्कि दिल्ली जैसे दूर-दराज के शहरों से भी श्रद्धालु पहुंचे। दिल्ली से आई श्रद्धालु मेघा ने बताया कि वे इस मंदिर के बारे में लंबे समय से सुनती आ रही थीं और तस्वीरें भी देखी थीं, लेकिन साल में केवल एक बार मंदिर खुलने के कारण दर्शन नहीं कर पाई थीं। इस बार वे विशेष रूप से गणेश चतुर्थी पर जोधपुर आईं और उच्छिष्ट गणपति के दर्शन किए। उन्होंने मंदिर के भक्तिमय वातावरण और लोगों की अगाध श्रद्धा की प्रशंसा करते हुए इसे अत्यंत सुखद अनुभव बताया।

12 घंटे बाद पुनः बंद हुए कपाट

स्थानीय निवासी हेमंत ने परिवार संग दर्शन के बाद कहा कि वर्ष में केवल एक बार मंदिर खुलने की वजह से लोगों के मन में दर्शन करने की उत्सुकता पूरे साल बनी रहती है। इतने कम समय में हजारों की संख्या में लोगों का पहुंचना भगवान के प्रति अटूट आस्था को दर्शाता है। 12 घंटे की निर्धारित समयावधि पूरी होने के बाद अलसुबह मंदिर के कपाट वैदिक विधान से पुनः बंद कर दिए गए। अब श्रद्धालुओं को भगवान उच्छिष्ट गणपति के दर्शन के लिए अगले वर्ष की गणेश चतुर्थी का इंतजार करना होगा।

सवाल-जवाब

उच्छिष्ट गणपति मंदिर जोधपुर में साल में कितने घंटे के लिए खुलता है?
यह मंदिर साल में सिर्फ एक दिन गणेश चतुर्थी के अवसर पर महज 12 घंटे के लिए खुलता है।
इस वर्ष मंदिर में कितने श्रद्धालुओं ने दर्शन किए?
गणेश चतुर्थी पर लगभग 30 से 40 हजार श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर भगवान के दर्शन किए।
मंदिर और मूर्ति का इतिहास कितना पुराना है?
मंदिर लगभग 35 वर्ष पुराना है, जबकि भगवान उच्छिष्ट गणपति की प्रतिमा करीब 60 से 70 वर्ष पुरानी है।
उच्छिष्ट गणपति प्रतिमा की क्या विशेषता है?
यह प्रतिमा भगवान गणेश की रिद्धि के साथ विराजमान है और यहां लोक कल्याण के लिए तांत्रिक विधि, कवच और यंत्रों से पूजा की जाती है।
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