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जोधपुर के मसूरिया मंदिर में भादवा मेले से पहले उमड़े श्रद्धालु, सुरक्षा के चलते बड़े झंडों और घोड़ों पर लगी रोकराजस्थान
6 सित॰ 2026, 1:15 pm (19 दिन पहले)· 3

जोधपुर के मसूरिया मंदिर में भादवा मेले से पहले उमड़े श्रद्धालु, सुरक्षा के चलते बड़े झंडों और घोड़ों पर लगी रोक

जोधपुर के मसूरिया बाबा मंदिर में भादवा मेले से पहले श्रद्धालुओं का तांता लग गया है। विद्युत तारों की सुरक्षा को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट ने परिसर में बड़े ध्वज और कपड़े के घोड़े ले जाने पर पाबंदी लगा दी है।

राजस्थान के जोधपुर शहर में स्थित प्रसिद्ध मसूरिया बाबा मंदिर में वार्षिक भादवा मेले के औपचारिक उद्घाटन से पहले ही भक्तों का जनसैलाब उमड़ना शुरू हो गया है। हालांकि मेला आधिकारिक रूप से 13 सितंबर को बाबा की बीज के पावन अवसर पर शुरू हो रहा है, लेकिन देश के अनेक राज्यों से श्रद्धालुओं की आवाजाही कई दिन पहले ही तेज हो गई है। श्रद्धालु लोक देवता बाबा रामदेवजी के गुरु बालीनाथ जी की पावन समाधि स्थल के दर्शन करने बड़ी संख्या में पहुँच रहे हैं। मंदिर प्रशासन का अनुमान है कि इस पूरे आयोजन के समापन तक यहाँ दर्शन करने वालों का आंकड़ा 25 लाख से 30 लाख के पार जा सकता है।

सुरक्षा कारणों से मंदिर परिसर में कुछ वस्तुओं के प्रवेश पर पाबंदी

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रबंधन समिति ने इस बार कुछ महत्वपूर्ण कड़े नियम लागू किए हैं। मंदिर के मुख्य प्रांगण में बड़े आकार के कपड़े से बने घोड़े और अत्यधिक ऊँचे ध्वज या झंडे ले जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। जो जातरू या श्रद्धालुओं के संघ अपने साथ विशालकाय ध्वज या लोहे व बाँस के लंबे डंडों पर लगे झंडे ला रहे हैं, उन्हें मंदिर के मुख्य द्वार पर ही रोक दिया जा रहा है।

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ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र राखेचा ने बताया कि मंदिर परिसर के भीतर विद्युत व्यवस्था के लिए कई तरह की रंग-बिरंगी लाइटिंग और बिजली की खुली वायर बिछाई गई हैं। ऐसे में ऊँचे झंडों या लंबे डंडों के इन तारों के संपर्क में आने से दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। इसी संभावित खतरे को टालने और दर्शनार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। ट्रस्ट ने सभी पदयात्रियों से अपील की है कि वे इन नियमों का पालन करें और व्यवस्था बनाए रखने में अपना योगदान दें।

ट्रस्ट पदाधिकारियों का सहयोग का संदेश

मंदिर व्यवस्था से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने आने वाले सभी भक्तों से नियमों में पूर्ण सहयोग देने की गुजारिश की है। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष शिवजी दैया तथा कोषाध्यक्ष पुरुषोत्तम राखेचा ने संयुक्त रूप से कहा कि श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए सुरक्षित और सुगम दर्शन कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने भक्तों से अनुरोध किया है कि वे विशाल ध्वज या बड़े घोड़े परिसर में न लाएँ ताकि कतारों में किसी प्रकार की बाधा पैदा न हो और हर व्यक्ति बिना किसी परेशानी के दर्शन कर सके।

सुबह चार बजे से देर रात तक लग रही लंबी कतारें

मसूरिया क्षेत्र में बाबा की बीज से लगभग एक सप्ताह पूर्व ही मेले जैसा जीवंत वातावरण निर्मित हो चुका है। मुख्य मार्गों पर पदयात्रियों के जत्थे बाबा के जयकारे लगाते हुए लगातार आगे बढ़ रहे हैं। मंदिर के कपाट प्रतिदिन तड़के 4 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाते हैं, जिसके बाद मध्यरात्रि 12 बजे तक अनवरत दर्शन का दौर चलता रहता है। विशेष रूप से सुबह और शाम के समय श्रद्धालुओं का दबाव बहुत अधिक रहता है। यहाँ गुरु बालीनाथ की समाधि पर ढोक लगाने के पश्चात् अधिकांश भक्त मुख्य तीर्थ स्थल रामदेवरा के लिए प्रस्थान कर देते हैं।

पदयात्रियों के लिए मार्ग में विभिन्न सेवा स्थलों का संचालन

जोधपुर से रामदेवरा जाने वाले समस्त पैदल मार्ग पर जातरुओं की सुविधा के लिए विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं। लंबी यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं के आराम, भोजन और प्राथमिक चिकित्सा के लिए जगह-जगह भंडारे और विश्राम स्थल बनाए गए हैं।

इन सेवा शिविरों में पदयात्रियों के लिए ठंडा पीने का पानी, कूलर और भरपेट भोजन की व्यवस्था उपलब्ध है। लगातार पैदल चलने के कारण कई यात्रियों के पैरों में छाले और अत्यधिक थकान हो जाती है। इसके समाधान के लिए चिकित्सा शिविरों में पैरामेडिकल स्टाफ दवाइयां, मरहम और अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है। इसके साथ ही, रात्रि विश्राम के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं की तरफ से ठहरने के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि जातरू अपनी यात्रा बिना किसी कठिनाई के पूरी कर सकें।

सवाल-जवाब

मसूरिया बाबा मंदिर में भादवा मेला कब से शुरू हो रहा है?
भादवा मेले का विधिवत शुभारंभ 13 सितंबर को बाबा की बीज के अवसर पर होगा।
मेले के दौरान मसूरिया मंदिर में कितने श्रद्धालुओं के आने की संभावना है?
ट्रस्ट के अनुसार मेले की समाप्ति तक लगभग 25 लाख से 30 लाख श्रद्धालुओं के दर्शन करने का अनुमान है।
मंदिर परिसर में बड़े झंडों और घोड़ों पर पाबंदी क्यों लगाई गई है?
परिसर में बिछी बिजली की लाइटिंग और तारों से होने वाले संभावित हादसों से सुरक्षा के लिए इन पर रोक लगाई गई है।
मसूरिया मंदिर के कपाट दर्शन के लिए कितने बजे खुलते हैं?
मंदिर में प्रतिदिन सुबह 4 बजे से रात 12 बजे तक दर्शन की व्यवस्था रहती है।
पैदल यात्रा कर रहे जातरुओं के लिए मार्ग में क्या सुविधाएं हैं?
जोधपुर से रामदेवरा मार्ग पर जगह-जगह भंडारे, प्राथमिक चिकित्सा शिविर, ठंडा पानी और रात्रि विश्राम के इंतजाम किए गए हैं।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·18 दिन पहले

राजस्थान के जोधपुर स्थित मसूरिया मंदिर में 25 से 30 लाख श्रद्धालुओं के जुटने का अनुमान स्पष्ट करता है कि मेलों और बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और विद्युत सुरक्षा कितनी संवेदनशील हो जाती है। मंदिर ट्रस्ट द्वारा बड़े झंडों और कपड़ों के घोड़ों पर प्रतिबंध लगाना एक व्यावहारिक कदम है, क्योंकि खुले तारों और लंबी छड़ों के बीच भगदड़ या दुर्घटना का जोखिम हमेशा बना रहता है। आने वाले दिनों में जब बाबा की बीज पर भीड़ चरम पर होगी, तब स्थानीय प्रशासन और पुलिस के लिए यातायात नियंत्रण, बैरिकेडिंग और निरंतर निगरानी सबसे बड़ी चुनौती होगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·18 दिन पहले

भीड़ प्रबंधन के इस मसले पर कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह ध्यान रखना आवश्यक है कि जब 30 लाख तक लोग जुटेंगे, तो केवल मंदिर ट्रस्ट के नियमकाफी नहीं होंगे। जिला प्रशासन और पुलिस बल को अभी से संकीर्ण मार्गों पर प्रभावी बैरिकेडिंग, आपातकालीन निकास मार्गों की पहचान और निरंतर खुफिया निगरानी तंत्र को सक्रिय करना होगा, ताकि चरम दिनों में भगदड़ जैसी किसी भी संभावित अनहोनी को पूरी तरह टाला जा सके।

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