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जोधपुर की सांसी कॉलोनी में जगी उम्मीद: कचरा बीनने वाली महिलाएं अब सिलाई और हुनर से गढ़ रहीं अपनी पहचानराजस्थान
13 जून 2026, 11:11 am (137 दिन पहले)· 0

जोधपुर की सांसी कॉलोनी में जगी उम्मीद: कचरा बीनने वाली महिलाएं अब सिलाई और हुनर से गढ़ रहीं अपनी पहचान

जोधपुर की सांसी कॉलोनी में नीतू सिंह सांसी वंचित और घुमंतू समुदायों की महिलाओं को सिलाई, हस्तकला और पढ़ाई-लिखाई सिखाकर आत्मनिर्भर बना रही हैं।

शिक्षा और हुनर किसी एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार का कल बदल देते हैं — यह बात जोधपुर की सांसी कॉलोनी में आज जमीनी हकीकत बनती दिख रही है। यहां नीतू सिंह सांसी ने उन महिलाओं की उंगली थामी है, जिन्हें अब तक समाज ने मुख्यधारा से दूर ही रखा था। कभी कचरा बीनने और दूसरों के घरों में सफाई करने वाली ये माताएं और बहनें अब सुई-धागे और अक्षरों के सहारे अपने जीवन की नई इबारत लिख रही हैं।

सिलाई केंद्र, जहां से शुरू हुआ बदलाव

इस पूरे प्रयास की धुरी एक सिलाई केंद्र है, जो युगवारवर्तक नंदकिशोर शारदा ज्ञान गंगा मिशन के सहयोग से चलाया जा रहा है। केंद्र पर महिलाओं को सिर्फ कपड़े सिलना ही नहीं सिखाया जाता — यहां हस्तकला, हस्ताक्षर करना, पढ़ना-लिखना और रोजमर्रा के काम आने वाले तमाम जीवनोपयोगी कौशल भी सिखाए जा रहे हैं। मकसद साफ है: महिला के हाथ में ऐसा हुनर देना, जो उसे किसी पर निर्भर न रहने दे।

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प्रशिक्षण के साथ-साथ इन महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जा रहा है, ताकि वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें, अपना स्वरोजगार खड़ा कर सकें और आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। नीतू सिंह सांसी का काम यहीं नहीं रुकता — शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, संस्कार और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर भी वे लगातार महिलाओं के बीच काम कर रही हैं।

किनके बीच हो रहा है यह काम

सांसी कॉलोनी मुख्य रूप से विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों का इलाका है — वे समुदाय, जो आज भी विकास की दौड़ से काफी पीछे छूटे हुए हैं। नीतू सिंह सांसी खास तौर पर उन्हीं महिलाओं के बीच पहुंची हैं, जो असंगठित कामों जैसे कचरा संग्रहण और घरेलू सफाई से जुड़ी हैं या जिन्हें किसी कारण से पढ़ने का मौका ही नहीं मिल पाया। सीमित संसाधनों के बावजूद वे इन महिलाओं को आत्मविश्वास, शिक्षा और कौशल से जोड़ने में जुटी हैं।

इसका असर अब दिखने लगा है। कई महिलाएं पहली बार पढ़ना-लिखना सीख रही हैं, नए-नए हुनर अपना रही हैं और आत्मनिर्भरता की ओर एक-एक कदम बढ़ा रही हैं। जो तस्वीर कभी मजबूरी और हाशिये की थी, वह अब उम्मीद और हौसले की तस्वीर में बदल रही है।

‘एक वक्त का खाना नहीं, जीवनभर की ताकत’

क्षेत्र के समाजसेवी और जनप्रतिनिधि अजय सिंह सांसी इस पहल को समाज निर्माण की दिशा में एक अहम कदम मानते हैं। उनका कहना है कि समाज को बदलने की प्रक्रिया भले ही लंबी हो, लेकिन अगर समर्पण और निरंतरता के साथ काम किया जाए तो उसके नतीजे बेहद असरदार होते हैं। उन्होंने कहा, “किसी व्यक्ति को एक समय का भोजन देना महत्वपूर्ण है, लेकिन उसे जीवनभर के लिए सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना उससे भी बड़ा कार्य है।”

नीतू सिंह सांसी का अपना उद्देश्य भी यही है — महिलाओं को शिक्षित, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाकर इस लायक बनाना कि वे खुद अपने जीवन की कमान संभाल सकें। अजय सिंह सांसी का भरोसा है कि यह सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, बल्कि समाज गढ़ने का काम है, और इस अभियान से जुड़ी महिलाएं आने वाले समय में अपने परिवार और पूरे समाज के लिए प्रेरणा बनेंगी। वंचित तबकों में जो आत्मविश्वास, सम्मान और स्वावलंबन की नई अलख जग रही है, उसकी झलक आज सांसी कॉलोनी की इन्हीं महिलाओं में देखी जा सकती है।

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