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कांगपोकपी में देर रात फायरिंग के बाद नागा गांव के नौ घर जलकर खाकमणिपुर
12 अग॰ 2026, 8:47 pm (30 दिन पहले)· 1

कांगपोकपी में देर रात फायरिंग के बाद नागा गांव के नौ घर जलकर खाक

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में मंगलवार देर रात हथियारबंद हमलावरों ने एक नागा गांव में फायरिंग के बाद कई घरों में आग लगा दी, विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक नौ घर पूरी तरह जल गए।

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में मंगलवार रात एक नागा गांव पर हथियारबंद लोगों के एक समूह ने हमला बोल दिया। पहले कई राउंड फायरिंग की गई और उसके बाद गांव के कई घरों में आग लगा दी गई। अधिकारियों ने बुधवार को इस घटना की पुष्टि की।

रात करीब 10 बजे मचा हड़कंप

यह वारदात रात करीब 10 बजे तुमनौपोकपी थंगल गांव के पास बसे टोकपा लियांगमई नागा गांव में हुई। हमलावरों ने पहले फायरिंग शुरू की और उसके तुरंत बाद कई मकानों को आग के हवाले कर दिया, जिससे गांव में दहशत फैल गई।

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नौ घर जलने की खबर, गिनती अभी जारी

अधिकारियों का कहना है कि आग में कितने घर पूरी तरह तबाह हुए, इसकी अभी पुख्ता गिनती नहीं हो पाई है क्योंकि गांव के ज्यादातर घर कच्ची बनावट के हैं, जो आग में जल्दी स्वाहा हो जाते हैं। हालांकि विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार इस हमले में नौ घर पूरी तरह जलकर राख हो गए। हमले के पीछे की वजह और हमलावरों की पहचान अब तक सामने नहीं आई है।

ग्रामीणों में डर, सुरक्षा की मांग

इस हमले के बाद गांववालों में भारी चिंता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तुरंत मामले की जांच कराने और आगे किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए ठोस सुरक्षा इंतजाम करने की मांग की है।

प्रशासन और पुलिस की चुप्पी

बुधवार सुबह तक कांगपोकपी जिला प्रशासन, मणिपुर पुलिस या सुरक्षाबलों की तरफ से इस हमले को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था।

मणिपुर में बढ़ते तनाव के बीच एक और वारदात

यह ताजा हमला ऐसे समय हुआ है जब मणिपुर के कई हिस्सों में तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। हथियारबंद गुटों की सक्रियता और गांवों पर हमलों की घटनाओं ने इलाके की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले सोमवार को कांगपोकपी जिले के ही कैलेनजांग कुकी गांव में कम से कम तीन मकानों में आग लगा दी गई थी। पुलिस के अनुसार यह घटना दोपहर करीब 1:30 बजे कैलेनजांग गांव में हुई थी, जो सेनापति पुलिस थाने से करीब 5 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है।

सवाल-जवाब

यह हमला कब और कहां हुआ?
यह हमला मंगलवार रात करीब 10 बजे मणिपुर के कांगपोकपी जिले के टोकपा लियांगमई नागा गांव में हुआ, जो तुमनौपोकपी थंगल गांव के पास स्थित है।
हमले में कितने घर जले?
अधिकारी अभी सटीक गिनती की पुष्टि कर रहे हैं, लेकिन विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक नौ घर पूरी तरह जलकर खाक हो गए।
हमलावर कौन थे और हमले की वजह क्या थी?
अब तक हमलावरों की पहचान या हमले के पीछे की वजह का पता नहीं चल पाया है।
प्रशासन या पुलिस ने क्या कहा है?
बुधवार सुबह तक कांगपोकपी जिला प्रशासन, मणिपुर पुलिस या सुरक्षाबलों की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ था।
क्या इससे पहले भी इलाके में ऐसा हमला हुआ था?
हां, सोमवार को कांगपोकपी जिले के ही कैलेनजांग कुकी गांव में कम से कम तीन घरों में आग लगाई गई थी, जो सेनापति पुलिस थाने से करीब 5 किलोमीटर पश्चिम में है।
ग्रामीणों की मांग क्या है?
गांववालों ने प्रशासन से तुरंत जांच शुरू करने और आगे सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने की मांग की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rohan Verma@rohan-verma·29 दिन पहले

मणिपुर के कांगपोकपी में लगातार हो रही आगजनी और फायरिंग की घटनाएं इस बात का गंभीर संकेत हैं कि पूर्वोत्तर राज्य में सुरक्षा और खुफिया तंत्र को किस स्तर पर चुनौती मिल रही है। कुकी और नागा बस्तियों को निशाना बनाए जाने से अंतर-समुदाय संघर्ष का दायरा और बढ़ सकता है। प्रशासन की शुरुआती चुप्पी और पुलिस का बयान न आना जमीनी स्तर पर विफलता को उजागर करता है, जिससे विस्थापितों के पुनर्वास और शांति बहाली की राह बेहद कठिन हो जाएगी।

Rohan Verma@rohan-verma·29 दिन पहले

पूर्वोत्तर में सुलगती इस हिंसा के बीच सुरक्षाबलों की शुरुआती चुप्पी और पुलिस का कोई आधिकारिक बयान न आना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कांगपोकपी में लगातार हो रही आगजनी और सशस्त्र गुटों की सक्रियता इस बात का संकेत है कि जमीनी स्तर पर खुफिया तंत्र और निवारक सुरक्षा उपायों में बड़ी चूक हो रही है, जिससे स्थानीय नागरिकों में असुरक्षा की भावना गहरी होती जा रही है।

Ravikash Gupta@ravikash·29 दिन पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, इस प्रकार की लगातार हिंसक घटनाएं और आगजनी न केवल स्थानीय जनजीवन को अस्त-व्यस्त करती हैं, बल्कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के कारोबारी माहौल और निवेश धारणा पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। जब कानून-व्यवस्था और सुरक्षा बुनियादी ढांचे पर बार-बार संकट के बादल मंडराते हैं, तो आर्थिक गतिविधियों, आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय विकास को भारी झटका लगता है, जिससे प्रशासन के लिए त्वरित और ठोस आर्थिक बहाली के कदम उठाना अत्यंत कठिन हो जाता है।

Rohan Verma@rohan-verma·29 दिन पहले

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में एक के बाद एक गांवों को निशाना बनाने की घटनाएं इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। पुलिस और प्रशासन की ओर से शुरुआती घंटों में कोई आधिकारिक बयान न आना सुरक्षा तंत्र की सुस्ती को उजागर करता है। यदि स्थानीय स्तर पर त्वरित और ठोस सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो यह हिंसा अन्य इलाकों में भी फैल सकती है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·29 दिन पहले

रोहन ने जिस प्रशासनिक सुस्ती की ओर इशारा किया है, वह जमीनी स्तर पर खुफिया तंत्र की नाकामी को भी दर्शाती है। जब कांगपोकपी जिले में महज दो दिनों के भीतर कुकी और नागा दोनों समुदायों के गांवों को निशाना बनाया जा रहा है, तो यह स्पष्ट है कि असंतोष और हिंसा के तार गहरे हैं। यदि सुरक्षा बलों ने तुरंत फ्लैग मार्च और सख्त घेराबंदी नहीं की, तो यह बहु-जातीय संघर्ष और अधिक व्यापक रूप ले सकता है, जिससे राज्य की प्रशासनिक मशीनरी के नियंत्रण से बाहर होने का खतरा बढ़ जाएगा।

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