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कांगड़ा के बड़ा भंगाल में लापता बताए गए राजस्थान के पांचों ट्रेकर सुरक्षित मिले, प्रशासन ने बताया पैनिक कॉलहिमाचल प्रदेश
9 अक्तू॰ 2026, 8:46 am (29 दिन पहले)· 0

कांगड़ा के बड़ा भंगाल में लापता बताए गए राजस्थान के पांचों ट्रेकर सुरक्षित मिले, प्रशासन ने बताया पैनिक कॉल

हिमाचल प्रदेश के बड़ा भंगाल घाटी क्षेत्र में ट्रेकिंग पर निकले राजस्थान के पांचों युवा सुरक्षित हैं और अपने गंतव्य पर पहुंच चुके हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि खराब मौसम और तय कार्यक्रम में देरी के कारण परिजनों में घबराहट फैल गई थी।

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की बेहद दुर्गम मानी जाने वाली बड़ा भंगाल घाटी में ट्रेकिंग के दौरान लापता बताए जा रहे राजस्थान के पांचों ट्रेकर्स पूरी तरह सुरक्षित मिल गए हैं। प्रशासन ने उनके सकुशल होने की पुष्टि करते हुए बताया है कि सभी सदस्य अपने गंतव्य तक पहुंच चुके हैं और उनका अपने परिजनों से भी संपर्क स्थापित हो चुका है। इससे पहले उनके फंसे होने की आशंका जताई जा रही थी, जिसे अधिकारियों ने केवल घबराहट में किया गया पैनिक कॉल करार दिया है।

चंबा के भरमौर और धार्दी क्षेत्र में पहुंचे ट्रेकर्स

बैजनाथ के उपमंडलीय दंडाधिकारी संकल्प गौतम के अनुसार पांचों ट्रेकर्स से सीधा संपर्क साध लिया गया है। उन्होंने दो दिन का समय बड़ा भंगाल में बिताया और इसके बाद वे चंबा जिले के भरमौर क्षेत्र में स्थित अपने तय गंतव्य तक पहुंच गए। डीसी कांगड़ा हेमराज बैरवा ने जानकारी दी कि सभी पांचों सदस्य सुरक्षित हैं और धार्दी पहुंच चुके हैं। उनके परिजनों को इस बात की सूचना दे दी गई है और अब किसी भी प्रकार की चिंता की बात नहीं है।

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खराब मौसम और भारी बर्फबारी से थमी थी रफ्तार

प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इन ट्रेकर्स के दल में अंकुर मलानी, सत्यम साबू, पवन, श्याम आर और तरुण राठी शामिल हैं, जिनकी उम्र 28 से 35 वर्ष के बीच है। यह समूह पांच अक्टूबर को बीड़ से राजगुंधा के लिए रवाना हुआ था। तय योजना के तहत उन्हें छह अक्टूबर को राजगुंधा से आगे बढ़ते हुए बड़ा भंगाल के रास्ते थमसर दर्रा पार करना था। हालांकि छह और सात अक्टूबर को ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में अचानक भारी बर्फबारी शुरू हो गई, जिससे उनकी आवाजाही पर गंभीर असर पड़ा और मौसम खराब होने के चलते संपर्क कट गया था।

देरी से परिजनों में उपजी चिंता और सर्च ऑपरेशन

बुधवार की देर रात जिला आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ को यह सूचना मिली थी कि करीब 12 घंटे से ट्रेकर्स से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। इस खबर के आते ही बीड़-बिलिंग इलाके में सक्रिय बचाव दलों को तुरंत सतर्क कर दिया गया और तलाश के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया। डीसी कांगड़ा हेमराज बैरवा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि पर्यटकों के लापता होने या संकट में घिरने जैसी कोई गंभीर नौबत नहीं थी। तय कार्यक्रम की तुलना में उनकी वापसी में महज एक दिन की देरी हुई थी। नेटवर्क न होने के कारण जब परिवार वालों का संपर्क नहीं हो सका, तो उन्होंने घबराकर प्रशासन को कॉल किया था। अब सभी ट्रेकर्स पूरी तरह ठीक हैं और अपने परिवारों से बातचीत कर चुके हैं।

सवाल-जवाब

बड़ा भंगाल ट्रेक पर गए पांचों ट्रेकर्स कहां के रहने वाले हैं?
बड़ा भंगाल ट्रेक पर गए पांचों ट्रेकर्स राजस्थान के रहने वाले हैं।
ट्रेकर्स के समूह में कौन-कौन शामिल हैं और उनकी उम्र क्या है?
इस दल में अंकुर मलानी, सत्यम साबू, पवन, श्याम आर और तरुण राठी शामिल हैं, जिनकी उम्र 28 से 35 वर्ष के बीच है।
ट्रेकर्स किस रास्ते से कहां जा रहे थे?
वे पांच अक्टूबर को बीड़ से राजगुंधा निकले थे और छह अक्टूबर को बड़ा भंगाल होते हुए थमसर दर्रा पार कर चंबा के भरमौर की ओर जा रहे थे।
प्रशासन ने उनके लापता होने की खबर पर क्या स्पष्टीकरण दिया?
डीसी कांगड़ा हेमराज बैरवा ने स्पष्ट किया कि कोई भी ट्रेकर लापता या फंसा नहीं था, बल्कि वापसी में एक दिन की देरी होने के कारण परिवार ने घबराहट में पैनिक कॉल किया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·28 दिन पहले

पहाड़ों में नेटवर्क न होना और जरा सी देरी से घरवाले कितना घबरा जाते हैं, यह उसका ताजा उदाहरण है। गनीमत है सब सुरक्षित मिल गए।

Ravikash Gupta@ravikash·28 दिन पहले

अ Arjun Mehta भाई, बिल्कुल सही कहा आपने! पिछले साल जब मैं खुद मनाली गया था, तो एक दिन नेटवर्क न होने पर घर पर फोन नहीं मिला था, माँ का रो-रोकर बुरा हाल हो गया था। शुक्र है सब ठीक है।

Rohan Verma@rohan-verma·28 दिन पहले

अंकुर और उनके साथियों का बिना नेटवर्क के यूँ एक दिन लेट होना, घर वालों की जान सुखाने के लिए काफ़ी था।

Karan Malhotra@karan-malhotra·28 दिन पहले

रोहन भाई, सही कहा आपने। पिछली बार जब मैं खुद कुल्लू के पहाड़ों में था, नेटवर्क जाते ही घर पर फोन घनघोड़ चिंता में आ गए थे।

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