राजस्थान के पाली में सजता है बिना किराए वाला अनोखा बाजार, मात्र 5 रुपये से शुरू होती है कपड़ों की कीमतअश्लेशा नक्षत्र में गुरु का प्रवेश: अगले 49 दिनों तक मेष, मिथुन समेत इन 7 राशियों की चमकेगी किस्मतबीकानेर में करीब 1 करोड़ रुपये की व्हेल की उल्टी जब्त, महाराष्ट्र से आए तीन तस्करों पर कसा शिकंजाफरीदाबाद में मिट्टी की गणेश मूर्तियां पानी में मिनटों में घुलती हैं और 70 प्रतिशत तक सस्ती मिल रही हैंटाटा संस की अर्जी रिजर्व बैंक ने की खारिज, अब शेयर बाजार में दस्तक देने के अलावा नहीं बचा कोई रास्ताराजस्थान में डिजिटल स्क्रीन और उम्मीदों के भारी दबाव से घट रही बच्चों की एकाग्रता, मानसिक तनाव पर विशेषज्ञों की रायदेवघर में धान की बंपर पैदावार के लिए रोपाई के 20 से 25 दिनों बाद क्यों जरूरी है सही खाद का इस्तेमालदेहरादून में बैंक कर्मचारी पर 5 लाख की सुपारी देकर गोली चलवाने वाली पूर्व प्रेमिका और शूटर गिरफ्तारकिचन के चिपचिपे पंखे को नए जैसा चमकाने के लिए अपनाएं ये तीन बेहद आसान घरेलू नुस्खेगणेशोत्सव पर पाना है पारंपरिक और शाही लुक, तो आजमाएं पैठणी साड़ी के ये 5 बेहद खूबसूरत डिजाइन
करौली का सनेट गांव: जहां सड़क पर गिरा कागज भी सेकंडों में डस्टबिन में, शहरों को पीछे छोड़ रही ग्रामीणों की सफाईराजस्थान
14 जून 2026, 5:48 am (91 दिन पहले)· 1

करौली का सनेट गांव: जहां सड़क पर गिरा कागज भी सेकंडों में डस्टबिन में, शहरों को पीछे छोड़ रही ग्रामीणों की सफाई

करौली जिले का सनेट गांव कभी कचरे के ढेरों के लिए जाना जाता था, लेकिन आज हर घर और दुकान के बाहर डस्टबिन, गीले-सूखे कचरे का अलग प्रबंधन और जनभागीदारी ने इसे पूरे जिले का रोल मॉडल बना दिया है।

राजस्थान के करौली जिले में एक छोटा सा गांव इन दिनों इस वजह से चर्चा में है कि वहां गंदगी ढूंढने पर भी नहीं मिलती। जिला मुख्यालय से करीब 28 किलोमीटर दूर बसे सनेट गांव की कहानी किसी आम गांव जैसी नहीं है — कुछ साल पहले तक यहां जगह-जगह कचरे के ढेर लगे रहते थे, और आज यही गांव साफ-सफाई के मामले में बड़े-बड़े शहरों को मात देता दिखाई देता है।

पहली नजर में किसी आधुनिक कॉलोनी सा नजारा

करीब 5 हजार की आबादी वाले इस गांव में कदम रखते ही माहौल बदल जाता है। यहां की गलियां और मुख्य सड़कें इतनी साफ-सुथरी हैं कि पहली नजर में यह किसी पिछड़े गांव का नहीं, बल्कि किसी हाईटेक और आधुनिक शहरी कॉलोनी का इलाका लगता है। यही वजह है कि आज सनेट गांव जिले की बाकी ग्राम पंचायतों के सामने एक रोल मॉडल बनकर खड़ा है।

ये भी पढ़ें

इस सफाई के पीछे सबसे बड़ी बात यह है कि गांव के हर घर और बाजार की एक-एक दुकान के बाहर बाकायदा डस्टबिन यानी कचरा पात्र रखे गए हैं। कचरा सड़क पर फेंकने का रिवाज यहां खत्म हो चुका है।

सफाई को लेकर जुनून बन गई है आदत

सनेट के लोगों में स्वच्छता को लेकर जिम्मेदारी का अहसास इस हद तक है कि अगर रास्ते में कहीं कागज का एक छोटा टुकड़ा या रैपर भी गिरा दिख जाए, तो वहां से गुजरता कोई भी ग्रामीण उसे तुरंत उठाकर डस्टबिन में डाल देता है। ग्रामीणों की यही सजगता गांव को हर दिन चमकता-दमकता बनाए रखती है — सफाई यहां किसी एक अभियान या दिखावे तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है।

गौरव पथ और हरियाली बनी पहचान

ग्राम पंचायत के ठीक बीच से गुजरने वाला गौरव पथ आज गांव की सबसे खूबसूरत पहचान है। साफ-सुथरी सड़क, व्यवस्थित माहौल और चारों ओर फैली हरियाली इस रास्ते की सुंदरता को कई गुना बढ़ा देती है। ग्रामीणों ने एक समझदारी भरा कदम और उठाया — घरों से निकलने वाले गंदे पानी के निपटारे के लिए बनाए गए सोख्ता गड्ढों (सोक पिट्स) के आसपास सुंदर पौधे लगा दिए, जिससे वह जगह भी आकर्षक और हरी-भरी दिखने लगी है।

वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रबंधन

यहां सफाई सिर्फ ऊपरी चमक नहीं है, बल्कि इसके पीछे जमीन पर एक व्यवस्थित और वैज्ञानिक प्रबंधन काम करता है। ग्रामीण घरों से निकलने वाले गीले कचरे, जैसे सब्जी के छिलके और बचा हुआ खाना, से बेहतरीन जैविक खाद तैयार करते हैं और उसका इस्तेमाल खेती तथा पेड़-पौधों में होता है। वहीं प्लास्टिक और दूसरे सूखे कचरे को इधर-उधर फेंकने के बजाय सीधे घर के बाहर रखे कचरा पात्र में डाला जाता है।

इतना ही नहीं, किसी आधुनिक शहर की तरह यहां हर दिन नियमित रूप से कचरा संग्रहण वाहन आता है, जो म्यूजिक बजाते हुए घर-घर से कचरा इकट्ठा करता है।

2020 से पहले बिल्कुल अलग थी तस्वीर

गांव के सरपंच अनिल चौधरी इस बदलाव के सफर को याद करते हुए बताते हैं कि साल 2020 से पहले तक हालात बिल्कुल उलट थे। नियमित सफाई न होने के कारण गांव के कोने-कोने में गंदगी और कचरे के ढेर लगे रहते थे। लेकिन सरपंच की जिम्मेदारी संभालते ही उन्होंने स्वच्छता को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बना लिया, और उसका नतीजा आज सबके सामने है।

शुरुआत आसान नहीं थी। सालों पुरानी आदतों को बदलना और लोगों को सफाई के लिए तैयार करना एक कड़ी चुनौती थी। लेकिन लगातार किए गए व्यक्तिगत प्रयासों और गांव में चलाए गए अनूठे जागरूकता अभियानों ने धीरे-धीरे रंग दिखाना शुरू किया। ग्रामीणों को बात समझ आने लगी और देखते ही देखते पूरा गांव खुद इस मुहिम से जुड़ता चला गया। लोगों के इसी सामूहिक जुड़ाव ने नामुमकिन लगने वाले काम को मुमकिन बना दिया।

संस्थाओं के सहयोग ने दी मजबूत दिशा

गांव के उपसरपंच जीतेंद्र सिंह जादौन के अनुसार, NSE फाउंडेशन के सहयोग से फिनिश सोसाइटी ने गांव के स्वच्छता अभियान को एक नई और मजबूत दिशा दी। बदलाव को जमीन पर उतारने के लिए लगातार जागरूकता रैलियां, तरह-तरह की प्रतियोगिताएं और कई जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन्हीं सामूहिक प्रयासों का नतीजा है कि लोगों की सोच बदली और साफ-सफाई सनेट गांव की संस्कृति का अटूट हिस्सा बन गई।

संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR