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कर्नाटक में जनसेवा शिविर में भड़की मुस्लिम महिला, मंत्री के सामने फाड़ा आवेदन, वोट न देने की दी चेतावनीभारत
6 सित॰ 2026, 10:12 am (25 मिनट पहले)· 2

कर्नाटक में जनसेवा शिविर में भड़की मुस्लिम महिला, मंत्री के सामने फाड़ा आवेदन, वोट न देने की दी चेतावनी

बेंगलुरु ग्रामीण जिले के विजयपुरा में सामाजिक कल्याण विभाग के जनसेवा कार्यक्रम में एक महिला ने मंत्री केएच मुनियप्पा के सामने ही आवेदन फाड़कर नाराजगी जताई और कांग्रेस को वोट न देने की चेतावनी दी.

कर्नाटक के बेंगलुरु ग्रामीण जिले में सामाजिक कल्याण विभाग के जनसेवा कार्यक्रम में उस वक्त हंगामा मच गया जब मंच के ठीक सामने बैठी एक महिला ने अपनी शिकायतों को लेकर तीखा विरोध जताया. देवनहल्ली तालुक के विजयपुरा कस्बे में आयोजित इस कार्यक्रम में सामाजिक कल्याण मंत्री केएच मुनियप्पा मौजूद थे, तभी तस्लीमा नाम की महिला ने खुलकर नाराजगी जाहिर करते हुए कह दिया कि अगर अधिकारियों का यही रवैया रहा तो वह आने वाले चुनाव में कांग्रेस पार्टी को अपना वोट नहीं देगी. कार्यक्रम का मकसद लोगों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान करना था, लेकिन महिला के इस विरोध ने पूरे आयोजन की पोल खोल दी.

सुबह से इंतजार, फिर फूटा गुस्सा

तस्लीमा का कहना था कि वह सुबह से ही अपनी समस्या लेकर कार्यक्रम स्थल पर मौजूद थी, लेकिन घंटों बीत जाने के बाद भी किसी अधिकारी ने उसकी बात सुनने की जहमत नहीं उठाई. जब उसका नंबर नहीं आया और सामने सिर्फ चुनिंदा लोगों को ही मंच पर बुलाया जाने लगा, तो उसका सब्र जवाब दे गया. गुस्से में उसने अपना भरा हुआ आवेदन फॉर्म वहीं फाड़ डाला और अधिकारियों के साथ ही सरकार के खिलाफ भी खुलकर नाराजगी जताई. तस्लीमा ने साफ शब्दों में कहा, "अगर अधिकारी इसी तरह परेशान करते रहे तो मैं अगली बार कांग्रेस को वोट नहीं दूंगी."

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जाति प्रमाण पत्र और राशन कार्ड को लेकर शिकायत

तस्लीमा के मुताबिक उसे जाति प्रमाण पत्र और राशन कार्ड बनवाने के लिए आवेदन करना था, लेकिन अधिकारी बार-बार उसका आवेदन लौटा रहे थे. उसका कहना था कि उसके पास आधार कार्ड और वोटर आईडी के अलावा कोई और दस्तावेज मौजूद नहीं है, फिर भी अधिकारी उसका आवेदन स्वीकार करने से इनकार कर रहे थे. महिला का आरोप था कि सुनवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही थी और आम लोगों की परेशानी की किसी को परवाह नहीं थी.

कार्यक्रम का मकसद ही रह गया अधूरा

सामाजिक कल्याण विभाग ने यह जनसेवा कार्यक्रम इसलिए आयोजित किया था ताकि लोगों की शिकायतों का मौके पर ही निपटारा हो सके और उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें. लेकिन तस्लीमा की नाराजगी ने पूरी व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए. उसका कहना था कि जब कार्यक्रम जनता की समस्याएं सुनने के लिए रखा गया है तो अधिकारियों को हर व्यक्ति की बात सुननी चाहिए थी, न कि सिर्फ कुछ चुनिंदा लोगों को मंच पर बुलाकर औपचारिकता निभानी चाहिए थी.

विधायक धीरज मुनिराज ने भी जताई नाराजगी

डोड्डाबल्लापुर के विधायक धीरज मुनिराज ने भी इस मामले में अधिकारियों को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की जानकारी जनता को पर्याप्त रूप से नहीं दी गई, जिसकी वजह से लोगों को असुविधा हुई. उन्होंने तालुक प्रशासन के कामकाज पर सवाल उठाते हुए मंच से ही तालुक मजिस्ट्रेट की आलोचना कर दी. विधायक ने कहा कि जब तक जनता की राय और भागीदारी शामिल नहीं होगी, तब तक ऐसे कार्यक्रमों का असली मकसद पूरा नहीं हो सकता. उन्होंने यह भी जोड़ा कि जनसेवा कार्यक्रम में जनता की मौजूदगी और उनकी समस्याएं ही सबसे ज्यादा अहमियत रखनी चाहिए, न कि सिर्फ कागजी खानापूर्ति. विधायक ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को ऐसी पहल शुरू करने के लिए बधाई भी दी और कहा कि इस तरह के आयोजन सरकारी योजनाओं को सीधे जनता तक पहुंचाने में मददगार साबित हो सकते हैं.

हाईवे पर बाइक में लगी आग, कुछ देर रहा हड़कंप

इस घटना से अलग, होसकोटे तालुक के चिक्कनहल्ली गेट के पास एनएच-75 पर एक और वाकया सामने आया जब चलती मोटरसाइकिल में अचानक आग लग गई. यह बाइक बेंगलुरु से विशाखापत्तनम की तरफ जा रही थी. जानकारी के मुताबिक तकनीकी खराबी के चलते आग लगी और देखते ही देखते बाइक पूरी तरह लपटों की चपेट में आ गई. इस घटना के बाद हाईवे पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और वाहन चालकों को सतर्क होकर गुजरना पड़ा.

सवाल-जवाब

यह घटना कहां हुई?
यह घटना कर्नाटक के बेंगलुरु ग्रामीण जिले के देवनहल्ली तालुक स्थित विजयपुरा कस्बे में हुई.
किस कार्यक्रम के दौरान यह विवाद हुआ?
सामाजिक कल्याण विभाग के जनसेवा कार्यक्रम के दौरान यह विवाद हुआ.
नाराज महिला का नाम क्या है?
नाराज महिला का नाम तस्लीमा बताया गया है.
तस्लीमा ने क्या आरोप लगाए?
उसने जाति प्रमाण पत्र और राशन कार्ड के आवेदनों में लापरवाही और सिर्फ चुनिंदा लोगों को मंच पर बुलाए जाने का आरोप लगाया.
महिला ने क्या चेतावनी दी?
उसने कहा कि अगर अधिकारी इसी तरह परेशान करते रहे तो वह अगले चुनाव में कांग्रेस को वोट नहीं देगी.
कार्यक्रम में कौन मंत्री मौजूद थे?
सामाजिक कल्याण मंत्री केएच मुनियप्पा कार्यक्रम में मौजूद थे.
विधायक धीरज मुनिराज ने क्या कहा?
उन्होंने तालुक प्रशासन और तालुक मजिस्ट्रेट की आलोचना की और कहा कि कार्यक्रम की जानकारी जनता तक ठीक से नहीं पहुंचाई गई.
एनएच-75 पर क्या घटना हुई?
होसकोटे तालुक के चिक्कनहल्ली गेट के पास चलती मोटरसाइकिल में तकनीकी खराबी के चलते आग लग गई, यह बाइक बेंगलुरु से विशाखापत्तनम जा रही थी.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 मिनट पहले

यह घटना प्रशासनिक और राजनीतिक मोर्चे पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जब जनसेवा शिविरों में बुनियादी दस्तावेज बनवाने के लिए आम नागरिकों को घंटों इंतजार करना पड़े और मंच पर चुनिंदा लोगों को ही तरजीह दी जाए, तो सुशासन के दावे खोखले साबित होते हैं। इस तरह की अव्यवस्था से न केवल प्रशासनिक मशीनरी पर जनता का भरोसा कम होता है, बल्कि यह जमीनी स्तर पर सत्ता विरोधी आक्रोश को भी जन्म देती है। आने वाले समय में यदि जिला प्रशासन ने प्रक्रियाओं को पारदर्शी और सुलभ नहीं बनाया, तो ऐसे कार्यक्रम जनहित के बजाय राजनीतिक विरोध का अखाड़ा बन सकते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·अभी

यह घटना सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि टियर-2 और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल और दस्तावेजी प्रक्रिया के बीच की गहरी खाई को दर्शाती है। जब आधार और वोटर आईडी के बावजूद नागरिकों को जाति प्रमाण पत्र या राशन कार्ड जैसे बुनियादी दस्तावेजों के लिए लालफीताशाही का सामना करना पड़ता है, तो यह अंतिम छोर तक सरकारी योजनाओं के लाभ पहुंचाने के दावों पर सीधा प्रश्नचिह्न लगाता है। इस तरह की प्रशासनिक सुस्ती और वीवीआईपी संस्कृति से उपजा जमीनी असंतोष न केवल नीतिगत क्रियान्वयन को बाधित करता है, बल्कि चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने की क्षमता भी रखता है, जिससे सुधार की तत्काल आवश्यकता है।

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