मूलांक 9 राशिफल 6 सितंबर 2026: फैसलों में जल्दबाजी टालें, संबंधों में रखें नरमीभावनगरी मिर्चों को भूनकर बनी यह आलू सब्जी सिर्फ 20 मिनट में देगी गजब का स्वादटाटा मोटर्स की जगुआर लैंड रोवर में छंटनी की तैयारी, दो साल में जाएंगी 4,000 नौकरियांमंगल-गुरु की जुगलबंदी से बदलेगी 6 राशियों की किस्मत, महीने की 18 तारीख से दिखने लगेगा असरमूलांक 8 राशिफल 6 सितंबर 2026: परिवार में सुनी किसी की राय बदल सकती है नजरिया, जल्दबाजी में फैसला ना लेंबढ़ते स्क्रीन टाइम से कमजोर हो रही बच्चों की नजर, अंबाला में डॉक्टरों ने दी बड़ी चेतावनीमानसून में जानवरों की सेहत बिगाड़ सकती हैं ये 7 आम चूक, पशुपालकों के लिए जरूरी सलाह55 रन पर सिमटने के बावजूद वहाब रियाज को अब भी एशिया कप ट्रॉफी का पूरा भरोसाअजनार नदी के स्वच्छतादूत बिट्टू तबाही ने ध्रुव राठी को दिया कड़ा जवाब, बोले- क्रेडिट की नहीं है बातग्लूटेन को लेकर फैली है ये बड़ी गलतफहमी, डाइट से हटाने से पहले डॉक्टर की ये बात जान लें
राजस्थान के स्कॉलरशिप स्टूडेंट्स के लिए बड़ी खबर, बायोमेट्रिक नहीं कराया तो नहीं मिलेगी छात्रवृत्ति की रकमराजस्थान
6 सित॰ 2026, 10:05 am (33 मिनट पहले)· 2

राजस्थान के स्कॉलरशिप स्टूडेंट्स के लिए बड़ी खबर, बायोमेट्रिक नहीं कराया तो नहीं मिलेगी छात्रवृत्ति की रकम

राजस्थान में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने सत्र 2024-25 और 2025-26 के छात्रवृत्ति आवेदनों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य कर दी है, तय तारीख तक यह प्रक्रिया पूरी न होने पर आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।

राजस्थान में सरकारी छात्रवृत्ति के इंतजार में बैठे हजारों स्टूडेंट्स के लिए एक तय तारीख से पहले एक जरूरी काम निपटाना अनिवार्य कर दिया गया है, वरना उनका पैसा अटक सकता है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने साफ किया है कि अब स्कॉलरशिप की रकम खाते में तभी आएगी जब स्टूडेंट पोर्टल पर अपनी बायोमेट्रिक हाजिरी दर्ज करा चुका होगा। यानी सिर्फ आवेदन जमा कर देना अब काफी नहीं है, बायोमेट्रिक के बिना फाइल आगे बढ़ेगी ही नहीं और रकम खाते में पहुंचने का रास्ता वहीं रुक जाएगा।

ये भी पढ़ें

दो सत्र, दो अलग डेडलाइन

विभाग ने दो अलग-अलग शैक्षणिक सत्रों के लंबित आवेदनों के लिए दो अलग अंतिम तारीखें तय की हैं। सत्र 2024-25 में जिन आवेदनों में बायोमेट्रिक की वजह से अड़चन है, उन्हें 15 सितंबर 2026 तक निपटाना होगा। वहीं सत्र 2025-26 के स्टूडेंट्स के पास यह काम पूरा करने के लिए 15 अक्टूबर 2026 तक का समय है। विभाग ने यह भी दोहराया है कि इन दोनों तारीखों के गुजरते ही जो आवेदन बायोमेट्रिक अधूरी होने के कारण लटके रह जाएंगे, उन पर आगे कोई विचार नहीं होगा और स्टूडेंट को स्कॉलरशिप से हाथ धोना पड़ सकता है। यानी डेडलाइन चूकने का मतलब सीधे तौर पर पूरे साल की स्कॉलरशिप गंवाना हो सकता है।

बायोमेट्रिक क्यों जरूरी, स्टूडेंट को कहां जाना होगा

जयपुर ग्रामीण में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक गौरव शर्मा के मुताबिक, जिन स्टूडेंट्स के छात्रवृत्ति आवेदन उनके शिक्षण संस्थान के स्तर पर बायोमेट्रिक अधूरी रहने की वजह से रुके हुए हैं, उन्हें डेडलाइन खत्म होने से पहले अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। इसके लिए स्टूडेंट को खुद अपने कॉलेज या स्कूल प्रशासन से संपर्क करना होगा, क्योंकि यह प्रक्रिया विभाग के दफ्तर से नहीं बल्कि सीधे संस्थान स्तर पर ही पूरी होती है। यानी सिर्फ इंतजार करने से काम नहीं बनेगा, पहल खुद स्टूडेंट को करनी होगी।

जयपुर ग्रामीण में अकेले 13,500 से ज्यादा आवेदन अटके

अकेले जयपुर ग्रामीण क्षेत्र में सत्र 2025-26 के 13,500 से अधिक स्कॉलरशिप आवेदन इस समय संस्थानों के स्तर पर अटके बताए जा रहे हैं। इनमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग, यानी लगभग हर आरक्षित श्रेणी के विद्यार्थी शामिल हैं। बायोमेट्रिक समेत बाकी औपचारिकताएं समय पर पूरी न होने के चलते बड़ी तादाद में पात्र स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप की रकम मिलने में देरी हो रही है, जबकि इनमें से ज्यादातर स्टूडेंट्स को इस पैसे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

डेडलाइन के बाद क्या, जिम्मेदारी किसकी

विभाग ने सभी संबंधित शिक्षण संस्थानों से कहा है कि सत्र 2024-25 और 2025-26 के जितने भी आवेदन अभी अटके हैं, उनकी प्रक्रिया तय समय के भीतर निपटाई जाए। बायोमेट्रिक पूरी होने के बाद ही ये आवेदन जिला कार्यालय स्तर पर आगे बढ़ेंगे, जहां से उपलब्ध बजट के हिसाब से पात्र स्टूडेंट्स के खाते में रकम भेजी जाएगी। विभाग का मकसद यही है कि पात्र स्टूडेंट्स के आवेदन समय पर निपटा दिए जाएं ताकि उपलब्ध बजट में से उन्हें छात्रवृत्ति का फायदा मिल सके। साथ ही विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर तय तारीख तक यह काम पूरा नहीं हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित स्टूडेंट और शिक्षण संस्थान, दोनों की मानी जाएगी। इसलिए विद्यार्थियों को अपने संस्थान पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय खुद भी अपने आवेदन की स्थिति समय-समय पर जांचते रहना बेहतर रहेगा।

सवाल-जवाब

राजस्थान में स्कॉलरशिप के लिए बायोमेट्रिक क्यों जरूरी कर दिया गया है?
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने साफ किया है कि अब बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज होने के बाद ही स्टूडेंट के खाते में स्कॉलरशिप की रकम भेजी जाएगी।
सत्र 2024-25 के स्टूडेंट्स के लिए आखिरी तारीख क्या है?
सत्र 2024-25 के लंबित आवेदनों के लिए बायोमेट्रिक दर्ज कराने की अंतिम तारीख 15 सितंबर 2026 रखी गई है।
सत्र 2025-26 के स्टूडेंट्स को कब तक का समय मिला है?
सत्र 2025-26 के स्टूडेंट्स को यह प्रक्रिया 15 अक्टूबर 2026 तक पूरी करनी होगी।
डेडलाइन के बाद भी बायोमेट्रिक पूरा हुआ तो क्या स्कॉलरशिप मिलेगी?
नहीं, विभाग के मुताबिक तय तारीख के बाद बायोमेट्रिक की वजह से लंबित रहने वाले आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।
जयपुर ग्रामीण में कितने आवेदन अभी अटके हैं?
जयपुर ग्रामीण में सत्र 2025-26 के 13,500 से अधिक छात्रवृत्ति आवेदन शिक्षण संस्थानों के स्तर पर लंबित बताए गए हैं।
बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी करने के लिए स्टूडेंट को क्या करना होगा?
स्टूडेंट को अपने संबंधित शिक्षण संस्थान से संपर्क कर वहां बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
डेडलाइन तक काम पूरा न होने पर जिम्मेदारी किसकी होगी?
विभाग ने कहा है कि ऐसी स्थिति में संबंधित स्टूडेंट और शिक्षण संस्थान, दोनों की जिम्मेदारी मानी जाएगी।
बायोमेट्रिक पूरी होने के बाद आवेदन का क्या होगा?
बायोमेट्रिक पूरी होने के बाद आवेदन को जिला कार्यालय स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा, जहां से उपलब्ध बजट के अनुसार रकम जारी होगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·अभी

छात्रवृत्ति जैसी कल्याणकारी योजनाओं में बायोमेट्रिक अनिवार्य करना पारदर्शिता के लिए ठीक है, लेकिन जयपुर ग्रामीण जैसे जिलों में हजारों आवेदन अटकना जमीनी प्रशासनिक और तकनीकी समन्वय की कमी को उजागर करता है। यदि शिक्षण संस्थान तय समय में प्रक्रिया पूरी नहीं करते हैं, तो गरीब और आरक्षित वर्गों के विद्यार्थियों का आर्थिक नुकसान तय है, जिससे शासन की मंशा पर सवाल उठ सकते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·अभी

रोहन ने जो प्रशासनिक और तकनीकी समन्वय की कमी की ओर इशारा किया है, वह सीधे तौर पर जवाबदेही तय करने का मुद्दा है। जब अकेले जयपुर ग्रामीण क्षेत्र में 13,500 से अधिक आवेदन संस्थानों के स्तर पर अटके हुए हैं, तो यह सिर्फ विद्यार्थियों की लापरवाही नहीं, बल्कि संस्थागत स्तर पर पारदर्शिता और निगरानी के अभाव को भी दर्शाता है। यदि तय डेडलाइन तक इन मामलों का निस्तारण नहीं हुआ, तो यह प्रशासनिक विफलता कहलाएगी, जिससे पात्र छात्रों का हक छिनने का गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR