राजस्थान में सरकारी छात्रवृत्ति के इंतजार में बैठे हजारों स्टूडेंट्स के लिए एक तय तारीख से पहले एक जरूरी काम निपटाना अनिवार्य कर दिया गया है, वरना उनका पैसा अटक सकता है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने साफ किया है कि अब स्कॉलरशिप की रकम खाते में तभी आएगी जब स्टूडेंट पोर्टल पर अपनी बायोमेट्रिक हाजिरी दर्ज करा चुका होगा। यानी सिर्फ आवेदन जमा कर देना अब काफी नहीं है, बायोमेट्रिक के बिना फाइल आगे बढ़ेगी ही नहीं और रकम खाते में पहुंचने का रास्ता वहीं रुक जाएगा।
दो सत्र, दो अलग डेडलाइन
विभाग ने दो अलग-अलग शैक्षणिक सत्रों के लंबित आवेदनों के लिए दो अलग अंतिम तारीखें तय की हैं। सत्र 2024-25 में जिन आवेदनों में बायोमेट्रिक की वजह से अड़चन है, उन्हें 15 सितंबर 2026 तक निपटाना होगा। वहीं सत्र 2025-26 के स्टूडेंट्स के पास यह काम पूरा करने के लिए 15 अक्टूबर 2026 तक का समय है। विभाग ने यह भी दोहराया है कि इन दोनों तारीखों के गुजरते ही जो आवेदन बायोमेट्रिक अधूरी होने के कारण लटके रह जाएंगे, उन पर आगे कोई विचार नहीं होगा और स्टूडेंट को स्कॉलरशिप से हाथ धोना पड़ सकता है। यानी डेडलाइन चूकने का मतलब सीधे तौर पर पूरे साल की स्कॉलरशिप गंवाना हो सकता है।
बायोमेट्रिक क्यों जरूरी, स्टूडेंट को कहां जाना होगा
जयपुर ग्रामीण में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक गौरव शर्मा के मुताबिक, जिन स्टूडेंट्स के छात्रवृत्ति आवेदन उनके शिक्षण संस्थान के स्तर पर बायोमेट्रिक अधूरी रहने की वजह से रुके हुए हैं, उन्हें डेडलाइन खत्म होने से पहले अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। इसके लिए स्टूडेंट को खुद अपने कॉलेज या स्कूल प्रशासन से संपर्क करना होगा, क्योंकि यह प्रक्रिया विभाग के दफ्तर से नहीं बल्कि सीधे संस्थान स्तर पर ही पूरी होती है। यानी सिर्फ इंतजार करने से काम नहीं बनेगा, पहल खुद स्टूडेंट को करनी होगी।
जयपुर ग्रामीण में अकेले 13,500 से ज्यादा आवेदन अटके
अकेले जयपुर ग्रामीण क्षेत्र में सत्र 2025-26 के 13,500 से अधिक स्कॉलरशिप आवेदन इस समय संस्थानों के स्तर पर अटके बताए जा रहे हैं। इनमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग, यानी लगभग हर आरक्षित श्रेणी के विद्यार्थी शामिल हैं। बायोमेट्रिक समेत बाकी औपचारिकताएं समय पर पूरी न होने के चलते बड़ी तादाद में पात्र स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप की रकम मिलने में देरी हो रही है, जबकि इनमें से ज्यादातर स्टूडेंट्स को इस पैसे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
डेडलाइन के बाद क्या, जिम्मेदारी किसकी
विभाग ने सभी संबंधित शिक्षण संस्थानों से कहा है कि सत्र 2024-25 और 2025-26 के जितने भी आवेदन अभी अटके हैं, उनकी प्रक्रिया तय समय के भीतर निपटाई जाए। बायोमेट्रिक पूरी होने के बाद ही ये आवेदन जिला कार्यालय स्तर पर आगे बढ़ेंगे, जहां से उपलब्ध बजट के हिसाब से पात्र स्टूडेंट्स के खाते में रकम भेजी जाएगी। विभाग का मकसद यही है कि पात्र स्टूडेंट्स के आवेदन समय पर निपटा दिए जाएं ताकि उपलब्ध बजट में से उन्हें छात्रवृत्ति का फायदा मिल सके। साथ ही विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर तय तारीख तक यह काम पूरा नहीं हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित स्टूडेंट और शिक्षण संस्थान, दोनों की मानी जाएगी। इसलिए विद्यार्थियों को अपने संस्थान पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय खुद भी अपने आवेदन की स्थिति समय-समय पर जांचते रहना बेहतर रहेगा।





















