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केदारनाथ में पांच महीने के भीतर 50 मीट्रिक टन से अधिक कचरा जमा, आरटीआई में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़ेउत्तराखंड
25 सित॰ 2026, 6:12 am (43 दिन पहले)· 0

केदारनाथ में पांच महीने के भीतर 50 मीट्रिक टन से अधिक कचरा जमा, आरटीआई में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

केदारनाथ धाम में अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच 50.30 मीट्रिक टन कचरा एकत्र हुआ, जो पिछले पूरे साल के मुकाबले ढाई गुना से भी ज्यादा है।

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर बसे पवित्र केदारनाथ धाम में इस साल पहुंचे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के साथ कचरे का अंबार भी तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2026 में यात्रा सत्र के शुरुआती पांच महीनों यानी अप्रैल से लेकर अगस्त के बीच धाम परिसर और आसपास के क्षेत्र में 50.30 मीट्रिक टन कचरा दर्ज किया गया। यह मात्रा पिछले साल के पूरे यात्रा सत्र के दौरान निकले कुल कचरे की तुलना में लगभग ढाई गुना से भी अधिक है। हिमालय के इस बेहद संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र में इतनी बड़ी तादाद में अपशिष्ट का जमा होना पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से गहरी चिंता का विषय बन गया है।

सूचना के अधिकार से हुआ आधिकारिक खुलासा

केदारनाथ धाम में स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े ये चौंकाने वाले तथ्य केदारनाथ नगर पंचायत द्वारा सूचना के अधिकार यानी आरटीआई के तहत दिए गए औपचारिक जवाब से सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश के नोएडा के निवासी आरटीआई कार्यकर्ता अमित गुप्ता ने इस संबंध में नगर पंचायत से ब्योरा मांगा था। नगर पंचायत के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2026 के इन पांच महीनों में उत्पन्न कचरे की मात्रा पिछले तीन वर्षों में से किसी भी एक पूरे वर्ष के कुल कचरे से कहीं अधिक दर्ज की गई है। इस आंकड़े ने उच्च हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते मानवीय दबाव और अपशिष्ट निस्तारण की वास्तविक स्थिति को उजागर किया है।

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विगत तीन वर्षों के मुकाबले भारी उछाल

नगर पंचायत द्वारा साझा किए गए तुलनात्मक आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2023 के पूरे साल में केदारनाथ में 32.58 मीट्रिक टन कचरा पैदा हुआ था। इसके बाद वर्ष 2024 के दौरान यह आंकड़ा घटकर 26.10 मीट्रिक टन रहा, जबकि वर्ष 2025 में पूरे साल के दौरान 21.40 मीट्रिक टन कचरा एकत्र हुआ था। इसके विपरीत, वर्ष 2026 में केवल अप्रैल से अगस्त तक की अवधि में ही 50.30 मीट्रिक टन कचरा पहुंच चुका है। प्रतिशत के आधार पर देखें तो वर्ष 2026 के महज पांच महीनों का यह कचरा पूरे 2023 की तुलना में करीब 54 प्रतिशत अधिक है, पूरे 2024 के मुकाबले लगभग 93 प्रतिशत ज्यादा है और वर्ष 2025 के पूरे वर्ष की तुलना में करीब 135 प्रतिशत अधिक बैठता है।

महीने दर महीने कचरे का उतार-चढ़ाव

आरटीआई दस्तावेज में यात्रा सत्र के दौरान महीने के हिसाब से भी आंकड़े दर्ज किए गए हैं। वर्ष 2026 में अप्रैल के महीने में धाम क्षेत्र से 1.7 मीट्रिक टन कचरा निकला था। इसके बाद मई के महीने में जब यात्रा चरम पर पहुंची, तो कचरे की मात्रा उछलकर 16.3 मीट्रिक टन दर्ज की गई। इसके बाद जून के महीने में 11.5 मीट्रिक टन कचरा पैदा हुआ। जुलाई के महीने में 10.5 मीट्रिक टन और अगस्त के महीने में 10.3 मीट्रिक टन कचरा रिकॉर्ड किया गया। इस तरह मई से लेकर अगस्त तक हर महीने औसतन दस मीट्रिक टन से अधिक कचरा केदारनाथ धाम में जमा होता रहा।

प्लास्टिक कचरे का प्रसंस्करण और लैंडफिल की क्षमता

नगर पंचायत ने आरटीआई जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि 2026 में अब तक उत्पन्न कुल कचरे में से करीब 20 मीट्रिक टन केवल प्लास्टिक अपशिष्ट था। इस प्लास्टिक कचरे में से 18.5 मीट्रिक टन यानी लगभग 92.5 प्रतिशत हिस्से का प्रसंस्करण किया जा चुका है, जबकि 1.5 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरे का निस्तारण होना अभी बाकी है। नगर पंचायत ने बताया कि केदारनाथ में कुल लैंडफिल की क्षमता 30,000 वर्ग फुट है, जिसमें से वर्तमान में 28,000 वर्ग फुट क्षमता अभी शेष बची हुई है। इसके साथ ही यह भी जानकारी दी गई कि पिछले पांच वर्षों के दौरान केदारनाथ क्षेत्र में कुल चार लैंडफिल बनाए गए हैं।

15 लाख श्रद्धालुओं के आगमन से बुनियादी ढांचे पर असर

आंकड़ों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आरटीआई कार्यकर्ता अमित गुप्ता ने कहा कि केदारनाथ धाम जैसे नाजुक हिमालयी क्षेत्र में लगातार बढ़ते कचरे के लिए लैंडफिल पर निर्भर रहना पर्यावरण की दृष्टि से गंभीर प्रश्न खड़े करता है। इस साल अब तक लगभग 15 लाख श्रद्धालु बाबा केदारनाथ के दर्शन कर चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से स्थानीय अपशिष्ट प्रबंधन तंत्र पर भारी दबाव बना है। गुप्ता ने कहा कि केवल पांच महीनों में पिछले वर्षों के पूरे सत्र से कई गुना अधिक कचरा पैदा होना हमारे पर्यावरण के लिए अत्यंत खतरनाक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस पवित्र और संवेदनशील स्थल को कचरा घर बनने से रोकने की प्राथमिक जिम्मेदारी खुद श्रद्धालुओं और वहां जाने वाले प्रत्येक नागरिक की है।

सवाल-जवाब

अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच केदारनाथ में कितना कचरा उत्पन्न हुआ?
इस पांच महीने की अवधि में केदारनाथ में कुल 50.30 मीट्रिक टन कचरा पैदा हुआ, जो पिछले पूरे साल के मुकाबले ढाई गुना से अधिक है।
केदारनाथ में कचरे के आंकड़ों की जानकारी किसके माध्यम से सामने आई?
यह जानकारी नोएडा निवासी आरटीआई कार्यकर्ता अमित गुप्ता द्वारा पूछे गए सवाल पर केदारनाथ नगर पंचायत द्वारा दी गई।
वर्ष 2026 में अब तक कितना प्लास्टिक कचरा निकला और कितना प्रसंस्कृत हुआ?
कुल 20 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा पैदा हुआ, जिसमें से 18.5 मीट्रिक टन यानी 92.5 प्रतिशत का प्रसंस्करण किया जा चुका है और 1.5 मीट्रिक टन शेष है।
केदारनाथ में लैंडफिल की कुल क्षमता कितनी है और कितनी जगह बची है?
नगर पंचायत के अनुसार केदारनाथ में लैंडफिल की कुल क्षमता 30,000 वर्ग फुट है, जिसमें से 28,000 वर्ग फुट क्षमता अभी शेष है।
इस साल अब तक कितने श्रद्धालुओं ने केदारनाथ के दर्शन किए हैं?
वर्ष 2026 में अब तक लगभग 15 लाख श्रद्धालु बाबा केदारनाथ के दर्शन कर चुके हैं।
वर्ष 2023, 2024 और 2025 में केदारनाथ में कितना कचरा एकत्र हुआ था?
केदारनाथ में 2023 में 32.58 मीट्रिक टन, 2024 में 26.10 मीट्रिक टन और 2025 में 21.40 मीट्रिक टन कचरा पैदा हुआ था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·42 दिन पहले

केदारनाथ में तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ना अच्छी बात है, लेकिन वहां इस तरह कचरा पहाड़ की पवित्रता और प्रकृति दोनों को तबाह कर देगा। क्या प्रशासन ने इस बार इतनी भारी भीड़ को संभालने के लिए कोई पुख्ता तैयारी नहीं की थी?

Ravikash Gupta@ravikash·42 दिन पहले

केदारनाथ में पांच महीने में 50 टन कचरा निकलना डराने वाला है। अगर इको-टूरिज्म और यात्रियों की संख्या को नियंत्रित नहीं किया गया, तो हिमालयी पर्यावरण को बचाना नामुमकिन हो जाएगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·42 दिन पहले

रविकेश, आपकी बात बिल्कुल सही है। पर क्या नगर पंचायत के पास इस कचरे को हटाने का कोई ठोस प्लान भी है?

Rohan Verma@rohan-verma·42 दिन पहले

केदारनाथ में जिस तरह से कचरा बढ़ रहा है, वो सच में डराने वाला है। अगर समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो पहाड़ों की प्राकृतिक खूबसूरती हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·42 दिन पहले

रोहन भाई, बात बिल्कुल सही है। जिस तेजी से कचरा बढ़ रहा है, पुलिस और प्रशासन को वहां कूड़ा फेंकने वालों पर भारी जुर्माना और सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।

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