EPFO पेंशनधारकों की 7,500 रुपये मासिक पेंशन की मांग पर संसद में क्या बोलीं श्रम राज्यमंत्री शोभा करंदलाजेमेरठ में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 1196 बेटियों की शादी का खर्च उठाएगी सरकार, खाते में आएंगे 64000 रुपएलाखों छात्रों के UGC NET पास करने पर भी फेलोशिप सीटों में इजाफे से सरकार का इनकार, संसद में शशि थरूर ने उठाए सवालजंतर-मंतर पर उतरीं समाजवादी पार्टी की तीन महिला नेता, 2027 के चुनाव में बीजेपी के लिए खड़ी करेंगी बड़ी चुनौतीवोट बंटवारे की सियासी चाल में फंसे प्रशांत किशोर, बांकीपुर उपचुनाव बना बीजेपी के लिए बड़ा प्रयोग?मुजफ्फरपुर में ग्राहकों को लेकर खूनी संघर्ष: बुजुर्ग कर्मचारी को लाठियों से पीटा, सरेआम थूक चाटने पर किया मजबूरबिहार में कोचिंग संचालक फैजल खान के खिलाफ भाजपा नेता नीरज बबलू का मोर्चा, शिक्षा जिहाद का गंभीर आरोपबालाघाट में झूठे तंत्र-मंत्र के दम पर 5 लाख की चोरी करने वाला 11 सदस्यीय गिरोह पुलिस के हत्थे चढ़ा2026 के सावन में सूर्य और चंद्र ग्रहण का साया: सूतक काल और सोमवार व्रत को लेकर क्या कहते हैं नियमसेहत का हवाला देकर जमानत मांग रहे आसाराम, सुप्रीम कोर्ट ने एम्स से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
केरल वक्फ बोर्ड को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी निगरानी वाला आदेश पलटाभारत
4 घंटे पहले· 0

केरल वक्फ बोर्ड को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी निगरानी वाला आदेश पलटा

सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें वक्फ बोर्ड को सरकारी निगरानी में काम करने को कहा गया था, और हाईकोर्ट से मामले की जल्द सुनवाई करने को कहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें केरल वक्फ बोर्ड को राज्य सरकार के संयुक्त सचिव या अतिरिक्त सचिव की निगरानी में काम करने को कहा गया था. इस फैसले से बोर्ड को बड़ी राहत मिली है.

हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया था

यह पूरा विवाद केरल हाईकोर्ट के उस आदेश से शुरू हुआ, जिसमें कहा गया था कि जब तक बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्य मौजूद न हों, तब तक कोई भी बड़ा नीतिगत फैसला नहीं लिया जा सकता. वक्फ बोर्ड ने इस पाबंदी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और कहा था कि इससे उसका रोजमर्रा का कामकाज प्रभावित हो रहा है.

ये भी पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने मंगलवार को केरल वक्फ बोर्ड की याचिका पर सुनवाई की. पीठ ने केरल हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि हाईकोर्ट इस मामले की दोबारा और जल्द सुनवाई करे. सुप्रीम कोर्ट ने विवाद के गुण-दोष पर खुद कोई फैसला नहीं दिया, बल्कि पूरा मामला अंतिम निर्णय के लिए केरल हाईकोर्ट को वापस भेज दिया.

यह मामला अहम क्यों है

राज्य वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने की शर्त, वक्फ संशोधन कानून की सबसे विवादित धाराओं में से एक रही है. संसद में इस कानून का जमकर विरोध हुआ था, राज्यसभा में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भी इस पर सवाल उठाए थे, और इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट समेत कई अदालतों में याचिकाएं दायर हो चुकी हैं. केरल का यह मामला भी उसी बड़ी कानूनी लड़ाई का हिस्सा है कि राज्य सरकार और गैर-मुस्लिम सदस्य वक्फ बोर्ड के फैसलों पर कितना नियंत्रण रख सकते हैं, इसलिए इसे बोर्ड की प्रशासनिक स्वायत्तता के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.

आगे क्या होगा

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब यह मामला फिर केरल हाईकोर्ट के पास पहुंच गया है, जिसे इसे प्राथमिकता के आधार पर निपटाने को कहा गया है. जब तक हाईकोर्ट नया फैसला नहीं सुनाता, तब तक केरल वक्फ बोर्ड बड़े नीतिगत मामलों में कितनी स्वतंत्रता से फैसले ले सकेगा, यह सवाल फिलहाल खुला हुआ है.

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट का कौन सा आदेश रद्द किया?
सुप्रीम कोर्ट ने वह आदेश रद्द किया, जिसमें केरल वक्फ बोर्ड को राज्य सरकार के संयुक्त सचिव या अतिरिक्त सचिव की निगरानी में काम करने को कहा गया था.
यह फैसला किस बेंच ने दिया?
यह फैसला प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने मंगलवार को दिया.
केरल हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड पर क्या पाबंदी लगाई थी?
हाईकोर्ट ने बोर्ड को दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की अनुपस्थिति में कोई भी बड़ा नीतिगत फैसला लेने से रोक दिया था.
क्या सुप्रीम कोर्ट ने मामले का अंतिम फैसला सुना दिया है?
नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने खुद मामले पर फैसला नहीं दिया, बल्कि इसे जल्द सुनवाई कर अंतिम निर्णय के लिए केरल हाईकोर्ट को वापस भेज दिया है.
अब आगे क्या होगा?
अब केरल हाईकोर्ट को इस विवाद की जल्द सुनवाई कर अंतिम फैसला सुनाना है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं.
गैर-मुस्लिम सदस्यों की अनिवार्यता का मुद्दा कहां से आया?
यह शर्त वक्फ संशोधन कानून से जुड़ी है, जिसे लेकर संसद में विरोध हुआ था और इसे अदालतों में भी चुनौती दी गई है.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR