सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें केरल वक्फ बोर्ड को राज्य सरकार के संयुक्त सचिव या अतिरिक्त सचिव की निगरानी में काम करने को कहा गया था. इस फैसले से बोर्ड को बड़ी राहत मिली है.
हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया था
यह पूरा विवाद केरल हाईकोर्ट के उस आदेश से शुरू हुआ, जिसमें कहा गया था कि जब तक बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्य मौजूद न हों, तब तक कोई भी बड़ा नीतिगत फैसला नहीं लिया जा सकता. वक्फ बोर्ड ने इस पाबंदी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और कहा था कि इससे उसका रोजमर्रा का कामकाज प्रभावित हो रहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने मंगलवार को केरल वक्फ बोर्ड की याचिका पर सुनवाई की. पीठ ने केरल हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि हाईकोर्ट इस मामले की दोबारा और जल्द सुनवाई करे. सुप्रीम कोर्ट ने विवाद के गुण-दोष पर खुद कोई फैसला नहीं दिया, बल्कि पूरा मामला अंतिम निर्णय के लिए केरल हाईकोर्ट को वापस भेज दिया.
यह मामला अहम क्यों है
राज्य वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने की शर्त, वक्फ संशोधन कानून की सबसे विवादित धाराओं में से एक रही है. संसद में इस कानून का जमकर विरोध हुआ था, राज्यसभा में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भी इस पर सवाल उठाए थे, और इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट समेत कई अदालतों में याचिकाएं दायर हो चुकी हैं. केरल का यह मामला भी उसी बड़ी कानूनी लड़ाई का हिस्सा है कि राज्य सरकार और गैर-मुस्लिम सदस्य वक्फ बोर्ड के फैसलों पर कितना नियंत्रण रख सकते हैं, इसलिए इसे बोर्ड की प्रशासनिक स्वायत्तता के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.
आगे क्या होगा
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब यह मामला फिर केरल हाईकोर्ट के पास पहुंच गया है, जिसे इसे प्राथमिकता के आधार पर निपटाने को कहा गया है. जब तक हाईकोर्ट नया फैसला नहीं सुनाता, तब तक केरल वक्फ बोर्ड बड़े नीतिगत मामलों में कितनी स्वतंत्रता से फैसले ले सकेगा, यह सवाल फिलहाल खुला हुआ है.

















