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खड़गे मंच विवाद में कांग्रेस का अल्टीमेटम, दो दिन में FIR न होने पर हल्द्वानी में पुलिस स्टेशन का घेराव करेंगे राहुल गांधीउत्तराखंड
30 अग॰ 2026, 1:46 pm (23 दिन पहले)· 2

खड़गे मंच विवाद में कांग्रेस का अल्टीमेटम, दो दिन में FIR न होने पर हल्द्वानी में पुलिस स्टेशन का घेराव करेंगे राहुल गांधी

उत्तराखंड के हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के मंच के कथित 'शुद्धिकरण' पर सियासी घमासान बढ़ गया है। कांग्रेस ने प्राथमिकी दर्ज न होने पर राहुल गांधी की अगुवाई में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।

उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद मंच के कथित 'शुद्धिकरण' को लेकर राज्य में राजनीतिक घमासान काफी तेज हो गया है। कांग्रेस नेतृत्व ने राज्य सरकार को स्पष्ट अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि अगले दो से तीन दिनों के भीतर इस मामले में पुलिस प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं करती है, तो पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व उत्तराखंड पहुंचेगा। इस विरोध प्रदर्शन की कमान खुद राहुल गांधी संभालेंगे और हल्द्वानी में पुलिस स्टेशन का घेराव किया जाएगा।

छुआछूत का आरोप और कांग्रेस की सख्त मांग

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब हल्द्वानी में आयोजित रैली के बाद मंच का कथित तौर पर शुद्धिकरण करने की खबरें सामने आईं। राहुल गांधी ने इस घटना को छुआछूत का कानूनी अपराध बताते हुए प्रधानमंत्री से दोषियों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज कराने का आदेश देने की मांग की। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह घटना भारतीय जनता पार्टी की भेदभावपूर्ण मानसिकता को उजागर करती है।

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वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर और चरणजीत सिंह चन्नी ने भी इस कदम की तीखी आलोचना की है। चरणजीत सिंह चन्नी ने मांग की है कि इस मामले में SC/ST अधिनियम के तहत मामला दर्ज होना चाहिए। वहीं, कांग्रेस ने कहा कि यदि बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा का खेद महज एक दिखावा नहीं है, तो उन्हें तुरंत अपने प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को पद से बर्खास्त करना चाहिए।

भाजपा का पलटवार और मुख्यमंत्री का बयान

कांग्रेस के इन हमलों पर पलटवार करते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य में खड़गे की जाति के बारे में कोई नहीं जानता और कांग्रेस बेवजह हिंदुओं को बांटने की राजनीति कर रही है। भाजपा नेताओं ने यह दावा भी किया कि कार्यक्रम स्थल पर आयोजित हवन में दलित समाज के सदस्य भी शामिल थे, इसलिए छुआछूत का आरोप पूरी तरह निराधार है।

हल्द्वानी में जमीनी स्तर पर बढ़ता तनाव

इस सियासी खींचतान का असर हल्द्वानी में साफ देखने को मिल रहा है। स्थानीय प्रशासन ने रामलीला मैदान में कांग्रेस द्वारा प्रस्तावित मौन व्रत की अनुमति खारिज कर दी है। इसके बावजूद, कांग्रेस कार्यकर्ता अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और थाने के घेराव की तैयारियां की जा रही हैं। अगर प्रशासन तय समय में कानूनी कार्रवाई नहीं करता है, तो राहुल गांधी के आगमन के साथ यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर और तूल पकड़ सकता है।

सवाल-जवाब

कांग्रेस ने उत्तराखंड सरकार को क्या अल्टीमेटम दिया है?
कांग्रेस ने दो से तीन दिनों के भीतर मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की है, ऐसा न होने पर हल्द्वानी में प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
हल्द्वानी में प्रस्तावित प्रदर्शन का नेतृत्व कौन करेगा?
यदि FIR दर्ज नहीं होती है, तो राहुल गांधी के नेतृत्व में हल्द्वानी पुलिस स्टेशन का घेराव किया जाएगा।
कांग्रेस इस मामले में क्या कानूनी कार्रवाई चाहती है?
कांग्रेस की मांग है कि कथित शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ SC/ST अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाए।
इस विवाद पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की क्या प्रतिक्रिया रही?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में खड़गे की जाति के बारे में कोई नहीं जानता और कांग्रेस पर हिंदुओं को बांटने का आरोप लगाया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·22 दिन पहले

एक क्राइम रिपोर्टर के तौर पर इस मामले में कानूनी और प्रशासनिक पहलू बेहद संवेदनशील दिख रहा है। जब छुआछूत और SC/ST अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की मांग पर अल्टीमेटम दिया जाता है, तो कानून-व्यवस्था की स्थिति स्वतः गंभीर हो जाती है। चूंकि स्थानीय प्रशासन ने कांग्रेस के प्रस्तावित मौन व्रत की अनुमति पहले ही खारिज कर दी है, ऐसे में राहुल गांधी के नेतृत्व में थाने का घेराव होने पर पुलिस के लिए भारी भीड़ को नियंत्रित करना और कानूनी प्रावधानों के तहत त्वरित निर्णय लेना एक बड़ी चुनौती बनेगा। यदि अगले दो दिनों में कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह प्रशासनिक टकराव राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा राजनीतिक और विधि-व्यवस्था संकट खड़ा कर सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·22 दिन पहले

करण मल्होत्रा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, इस घटना का दायरा अब केवल हल्द्वानी तक सीमित नहीं रह गया है। मौन व्रत की अनुमति खारिज होने के बाद प्रशासन और कांग्रेस के बीच जमीनी स्तर पर टकराव तय माना जा रहा है। यदि दो दिन के अल्टीमेटम के भीतर पुलिस प्राथमिकी दर्ज नहीं करती है, तो राहुल गांधी का आगमन इस स्थानीय विवाद को सीधे राष्ट्रीय राजनीतिक पटल पर ला खड़ा करेगा, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति संभालना राज्य सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा बन जाएगा।

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