फिरोजाबाद जिले में खरीफ की बुआई के इस महत्वपूर्ण समय पर किसानों को खाद की किल्लत न उठानी पड़े, इसके लिए कृषि विभाग ने वितरण प्रक्रिया को बेहद सुगम और पारदर्शी बना दिया है। अक्सर देखा जाता था कि फार्मर रजिस्ट्री न होने या राजस्व रिकॉर्ड में नाम संबंधी त्रुटियों के कारण किसानों को सहकारी समितियों के चक्कर काटने पड़ते थे और कई बार खाली हाथ लौटना पड़ता था। इस प्रशासनिक अड़चन को दूर करते हुए प्रशासन ने विशेष व्यवस्था लागू की है, जिससे अब पंजीकृत भूस्वामियों के साथ-साथ उगाई पर खेती करने वाले किसानों को भी आसानी से यूरिया और अन्य आवश्यक उर्वरक प्राप्त हो सकेंगे।
फार्मर रजिस्ट्री की तकनीकी बाधाओं से मुक्ति की व्यवस्था
सहकारी समितियों पर खाद वितरण के दौरान पूर्व में फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य होने से छोटे और सीमांत किसानों को भारी असुविधा होती थी। कृषि अधिकारी सुमित चौहान ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों की खतौनी में नाम दर्ज करने में कोई लिपिकीय त्रुटि है या वर्तनी सही दर्ज नहीं है, उनकी समस्या को समिति स्तर पर ही पंजीकृत किया जाएगा। ऐसे मामलों में POS मशीन में दिए गए वैकल्पिक प्रावधानों का उपयोग करके किसान का अंगूठा लगवाकर खाद का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे किसी भी किसान को निराश न होना पड़े।
उगाई पर खेती करने वाले किसानों के लिए सत्यापन की आसान प्रक्रिया
जिले में बड़ी संख्या में ऐसे किसान हैं जो दूसरे भूस्वामियों की जमीन उगाई अथवा बटाई पर लेकर खेती का काम करते हैं। इन किसानों की सुविधा के लिए भी विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उगाई पर खेती कर रहे किसान को खाद लेते समय उस वास्तविक जमीन मालिक का आधार कार्ड प्रस्तुत करना आवश्यक होगा जिसकी जमीन पर फसल उगाई जा रही है। आधार विवरण दर्ज होने के पश्चात POS मशीन से किसान के दर्ज मोबाइल नंबर पर एक OTP भेजा जाएगा। OTP के सफल सत्यापन के बाद किसान को तुरंत खाद दे दी जाएगी, जिससे वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और खाद न मिलने की कोई शिकायत दर्ज नहीं होगी।
खरीफ फसलों के उत्पादन और समय पर खाद की आवश्यकता
फिरोजाबाद जिले के किसान खरीफ के चालू मौसम में बाजरा, धान, मूंग, उर्द जैसी दलहनी फसलों और विभिन्न तिलहनी फसलों की बड़े पैमाने पर खेती करते हैं। इन फसलों की गुणवत्तापूर्ण पैदावार हासिल करने के लिए सही समय पर यूरिया का छिड़काव बेहद जरूरी होता है। यदि समय पर खाद न मिले तो फसलों की वृद्धि रुक जाती है और किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। नई व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगा कि बुआई और शुरुआती विकास के चरण में हर किसान को उसकी जरूरत के मुताबिक उर्वरक उपलब्ध कराया जा सके।
जिले में 17,856 मैट्रिक टन यूरिया और अन्य खाद का पर्याप्त भंडार
कृषि अधिकारी सुमित चौहान ने जिले में उपलब्ध उर्वरकों की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि किसानों को खाद की किसी कमी का सामना न करना पड़े, इसके लिए 17,856 मैट्रिक टन यूरिया का भंडारण किया गया है। इसके साथ ही 6,993 मैट्रिक टन डीएपी और 3,429 मैट्रिक टन एनपीके उर्वरक भी जिले में उपलब्ध कराया गया है। जिले की सभी सहकारी समितियों में उर्वरकों की खेप लगातार भेजी जा रही है, ताकि हर नजदीकी केंद्र से किसान आसानी से अपनी जरूरत के अनुसार यूरिया, डीएपी और एनपीके खरीद सकें।



















