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खाटूश्यामजी के कपाट 19 घंटे बाद खुले, तिलक श्रृंगार के बाद श्याम वर्ण रूप में दर्शन दे रहे बाबा श्यामराजस्थान
18 सित॰ 2026, 11:15 am (7 दिन पहले)· 0

खाटूश्यामजी के कपाट 19 घंटे बाद खुले, तिलक श्रृंगार के बाद श्याम वर्ण रूप में दर्शन दे रहे बाबा श्याम

विश्व प्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर में 19 घंटे तक चले तिलक श्रृंगार के बाद कपाट फिर से खोल दिए गए हैं। अब श्रद्धालु श्याम वर्ण स्वरूप में बाबा के दर्शन कर रहे हैं, जिन्हें सजाने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से विशेष फूल मंगाए गए हैं।

विश्व प्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर में बाबा श्याम का तिलक श्रृंगार पूरा होने के बाद कपाट श्रद्धालुओं के लिए दोबारा खोल दिए गए हैं। करीब 19 घंटे तक मंदिर के कपाट बंद रहने के बाद जैसे ही दर्शन शुरू हुए, पूरा परिसर बाबा श्याम के जयकारों से गूंज उठा। तिलक श्रृंगार के पूरा होने के बाद अब बाबा श्याम श्याम वर्ण के स्वरूप में भक्तों को अपने दर्शन दे रहे हैं। देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु इस विशेष और भव्य स्वरूप के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं मांग रहे हैं। इस बार बाबा श्याम के दरबार को सजाने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से खास तौर पर लाल, गुलाबी, सफेद और पीले रंग के फूल मंगाए गए हैं, जिनसे पूरे मंदिर परिसर को अलंकृत किया गया है।

19 घंटे तक चला तिलक श्रृंगार का अनुष्ठान

मंदिर कमेटी से मिली जानकारी के अनुसार, बाबा श्याम के तिलक श्रृंगार की प्राचीन परंपरा के तहत बुधवार रात 10 बजे शयन आरती के बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए थे। इस समयावधि के दौरान मंदिर के मुख्य पुजारियों ने पूरी आस्था और संपूर्ण विधि-विधान के साथ बाबा श्याम का तिलक श्रृंगार संपन्न किया। लगभग 19 घंटे के लंबे अंतराल के बाद गुरुवार को मंदिर के कपाट दोबारा खोले गए। कपाट खुलते ही देश के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालुओं में बाबा श्याम के इस नए और अलौकिक श्रृंगार के दर्शन करने के लिए भारी उत्साह देखने को मिला।

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महीने में दो अलग-अलग स्वरूपों में मिलते हैं दर्शन

खाटूश्यामजी मंदिर की धार्मिक परंपरा के अनुसार बाबा श्याम महीने में दो प्रमुख स्वरूपों में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। इनमें से एक शालिग्राम स्वरूप है, जिसमें बाबा अपने मूल स्वरूप में नजर आते हैं। इस विशेष स्वरूप के दर्शन भक्तों को महीने में करीब सात दिनों तक होते हैं। इसके पश्चात बाबा श्याम श्याम वर्ण के स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इस दूसरे स्वरूप में वे लगभग 22 से 23 दिनों तक भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। श्याम वर्ण स्वरूप के दौरान बाबा श्याम के मस्तक पर चंदन का विशेष लेप लगाया जाता है। हर महीने अमावस्या के अवसर पर स्नान कराने के बाद यह चंदन का लेप उतारा जाता है। इसके कुछ दिनों के बाद मंदिर की स्थापित परंपरा और विधि-विधान के अनुसार दोबारा तिलक श्रृंगार किया जाता है। इसी निर्धारित प्रक्रिया के तहत हाल ही में बाबा श्याम का यह तिलक श्रृंगार किया गया है।

75 फीट लंबे मार्ग पर 14 कतारों में हो रहे दर्शन

कपाट खुलने के तुरंत बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा श्याम के दर्शन करने के लिए खाटूधाम पहुंच चुके हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर कमेटी की ओर से 75 फीट चौड़े मार्ग पर 14 अलग-अलग कतारें बनाई गई हैं, जिनके जरिए श्रद्धालुओं को बहुत ही व्यवस्थित तरीके से मंदिर तक पहुंचाया जा रहा है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हरियाणा समेत देश के तमाम हिस्सों से भक्त खाटूश्यामजी में अपनी हाजिरी लगाने पहुंचे हैं। भारी भीड़ और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए श्री श्याम मंदिर कमेटी और स्थानीय पुलिस प्रशासन की तरफ से पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। दर्शन मार्ग से लेकर पूरे मंदिर परिसर तक पुलिसकर्मियों के साथ-साथ कमेटी के प्रशिक्षित सुरक्षा गार्ड भी मुस्तैदी से तैनात हैं, जो श्रद्धालुओं को लगातार कतारबद्ध तरीके से दर्शन करवा रहे हैं।

वीकेंड पर दोपहर में नहीं बंद होंगे कपाट

सामान्य दिनों की बात करें तो खाटूश्यामजी मंदिर में दोपहर 2 बजे से 4 बजे के बीच कपाट बंद रखे जाते हैं। लेकिन आगामी शनिवार और रविवार को श्रद्धालुओं की संख्या में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना के चलते इन दोनों दिनों में दिन के समय मंदिर के कपाट बंद नहीं किए जाएंगे। हालांकि शुक्रवार को दोपहर 2 से 4 बजे तक मंदिर के कपाट नियमानुसार बंद रहेंगे। इसके अलावा एकादशी और द्वादशी जैसे विशेष और पवित्र अवसरों पर भी आने वाले श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ को देखते हुए दर्शन व्यवस्था और समय-सारणी में आवश्यकतानुसार बदलाव किए जाते हैं ताकि हर भक्त को सुगमता से दर्शन मिल सकें।

सवाल-जवाब

खाटूश्यामजी मंदिर के कपाट कितने घंटे बंद रहे?
बाबा श्याम का तिलक श्रृंगार पूरा होने के लिए मंदिर के कपाट करीब 19 घंटे तक बंद रहे।
तिलक श्रृंगार के बाद बाबा श्याम किस रूप में दर्शन दे रहे हैं?
तिलक श्रृंगार के पूरा होने के बाद बाबा श्याम अब श्याम वर्ण के स्वरूप में भक्तों को दर्शन दे रहे हैं।
बाबा श्याम का दरबार किन फूलों से सजाया गया है?
बाबा श्याम का दरबार देश के विभिन्न राज्यों से मंगाए गए विशेष लाल, गुलाबी, सफेद और पीले फूलों से सजाया गया है।
महीने में बाबा श्याम के कितने स्वरूपों में दर्शन होते हैं?
बाबा श्याम महीने में दो प्रमुख स्वरूपों—शालिग्राम स्वरूप और श्याम वर्ण स्वरूप—में दर्शन देते हैं।
श्याम वर्ण स्वरूप में मस्तक पर क्या लगाया जाता है?
श्याम वर्ण स्वरूप के दौरान बाबा श्याम के मस्तक पर चंदन का विशेष लेप लगाया जाता है।
श्रद्धालुओं के लिए मंदिर परिसर में क्या व्यवस्था की गई है?
मंदिर कमेटी की ओर से 75 फीट मार्ग पर 14 कतारें बनाई गई हैं जहां सुरक्षा गार्ड और पुलिसकर्मी तैनात हैं।
क्या वीकेंड पर दिन में मंदिर के कपाट बंद रहेंगे?
नहीं, शनिवार और रविवार को श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने के कारण दिन में मंदिर बंद नहीं किया जाएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·6 दिन पहले

धार्मिक स्थलों पर कपाट खुलने के बाद अचानक बढ़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ का प्रबंधन हमेशा शासन और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होता है। 75 फीट चौड़े मार्ग पर 14 कतारों की व्यवस्था भीड़ नियंत्रण का एक अच्छा ढांचागत उपाय है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर अंतरराज्यीय श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए केवल मंदिर परिसर तक ही व्यवस्था सीमित नहीं रहनी चाहिए। सड़क यातायात प्रबंधन, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं और रीयल-टाइम क्राउड मॉनिटरिंग जैसे मुद्दों पर ज़िला प्रशासन और मंदिर समिति के बीच निरंतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

रोहन की बात बिल्कुल सटीक है। सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से, ऐसे बड़े आयोजनों में सबसे बड़ा जोखिम भगदड़ और आपातकालीन निकासी मार्गों का बाधित होना होता है। 14 कतारों का बुनियादी ढांचा सराहनीय है, लेकिन इसके साथ ही परिसर और उसके आसपास सीसीटीवी से चौबीसों घंटे निगरानी, क्विक रिस्पांस टीम (QRT) की मौजूदगी और एंटी-सबोटाज चेकिंग अत्यंत आवश्यक है। ज़िला पुलिस और मंदिर प्रशासन को भीड़ नियंत्रण के लिए कड़े 'स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर' (SOP) का पालन करना चाहिए, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति या भगदड़ की आशंका को समय रहते निष्प्रभावी किया जा सके।

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