पारंपरिक खेती के तरीकों में बदलाव के साथ अब आधुनिक कृषि यंत्रों का दखल तेजी से बढ़ रहा है। भारतीय कृषि व्यवस्था में हल और बैलों के दौर के बाद ट्रैक्टर और आधुनिक मशीनों ने काम को आसान बनाया है। पहले खेतों में खाद अथवा कीटनाशकों का छिड़काव किसान अपने हाथों से या मैनुअल हैंड पंप स्प्रेयर के जरिए करते थे। इस पुरानी व्यवस्था में काफी शारीरिक मेहनत लगती थी, श्रमिकों की उपलब्धता पर निर्भर रहना पड़ता था और पूरे खेत में एक समान छिड़काव भी सुनिश्चित नहीं हो पाता था। समय की बर्बादी और शारीरिक श्रम की इन चुनौतियों को दूर करने के लिए कृषि क्षेत्र में मानव रहित हवाई प्रणाली यानी ड्रोन का उपयोग शुरू हुआ है। जहानाबाद जिला मुख्यालय में आयोजित किसान स्वरोजगार मेले में नेटब्रिग एग्रीकल्चर ड्रोन सर्विस के स्टार्ट अप फाउंडर अमृत राज ने इस तकनीक, इसके उपयोग और सरकारी सहायता के संबंध में आवश्यक ब्योरा साझा किया।
ड्रोन तकनीक से छिड़काव की गति और पानी की बचत
आधुनिक कृषि ड्रोन की मदद से खेतों में उर्वरक अथवा तरल पोषक तत्वों का छिड़काव बेहद कम समय में पूरा हो जाता है। जिस काम को करने में मजदूरों को कई घंटे लग जाते थे, वह कार्य अब चंद मिनटों में संपन्न हो रहा है। बड़े भूखंडों पर फसलों को पोषक तत्व देने में यह तकनीक विशेष रूप से उपयोगी साबित हो रही है। ड्रोन प्रणाली के जरिए महज 10 मिनट के भीतर एक एकड़ खेत में उर्वरक का छिड़काव किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में समय की बचत के साथ-साथ पानी की खपत में भी भारी कमी आती है। पारंपरिक तरीकों के मुकाबले ड्रोन केवल 10 लीटर पानी का उपयोग करके एक एकड़ फसल पर संपूर्ण स्प्रे का काम पूरा कर देता है।
सरकारी योजना के तहत आधे खर्च पर छिड़काव की सुविधा
अमृत राज के अनुसार, जो किसान स्वयं ड्रोन नहीं खरीदना चाहते, वे अपने खेतों में कम खर्च पर छिड़काव सेवा ले सकते हैं। इसके लिए पौधा संरक्षण विभाग के अंतर्गत संचालित योजना का लाभ उठाया जा सकता है। इस योजना के प्रावधानों के मुताबिक, फसल पर ड्रोन से एक एकड़ क्षेत्र में उर्वरक छिड़काव का निर्धारित शुल्क 419 रुपये प्रति एकड़ है। किसान द्वारा आवेदन करने के उपरांत इस निर्धारित दर पर 50 प्रतिशत की सरकारी सब्सिडी प्रदान की जाती है। इस प्रकार 50 प्रतिशत अनुदान मिलने के बाद किसान को प्रति एकड़ मात्र 210 रुपये का वास्तविक भुगतान करना पड़ता है। इस व्यवस्था में प्रति एकड़ छिड़काव में 5 से 7 मिनट का समय लगता है और 10 लीटर पानी की जरूरत होती है। इसके अतिरिक्त, इस प्रणाली के माध्यम से नैनो यूरिया और डीएपी (DAP) का भी कुशलतापूर्वक उपयोग संभव हो जाता है।
40 प्रतिशत अनुदान पर 6 लाख रुपये में कृषि ड्रोन की खरीद
जिन किसानों के पास बड़े कृषि फार्म हैं या जो स्वयं कस्टम हायरिंग जैसी सेवाएं देना चाहते हैं, उनके लिए कृषि ड्रोन की खरीद पर सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। बाजार में एक कृषि ड्रोन की कुल कीमत 10,00,000 रुपये है। सरकार की ओर से इस खरीद पर 40 प्रतिशत का प्रत्यक्ष अनुदान दिया जा रहा है। इसका तात्पर्य यह है कि 40 प्रतिशत यानी 4,00,000 रुपये की सब्सिडी कटने के बाद किसान मात्र 6,00,000 रुपये की शुद्ध लागत में यह कृषि ड्रोन प्राप्त कर सकते हैं। यह योजना व्यक्तिगत किसानों के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं के लिए भी आधुनिक यंत्र अपनाने का अवसर प्रदान करती है।
डीबीटी पोर्टल से आवेदन की पूरी प्रक्रिया
सरकारी स्तर पर ड्रोन से छिड़काव करवाने अथवा अनुदान का लाभ लेने के लिए किसान पंजीकरण अनिवार्य है। किसानों के पास वैध किसान पंजीकरण आईडी (ID) होनी चाहिए। इसके बाद किसान को डीबीटी (DBT) पोर्टल पर जाकर पौधा संरक्षण विभाग का विकल्प चुनना होता है। वहां योजना के अंतर्गत आवश्यक विवरण दर्ज कर ऑनलाइन आवेदन जमा करना पड़ता है। प्रक्रिया के दौरान एक निर्धारित प्रारूप में शपथ पत्र भी देना होता है। पंजीकरण और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद संबंधित अधिकृत व्यक्ति अथवा तकनीकी दल किसान के खेत पर पहुंचकर ड्रोन से उर्वरक स्प्रे का कार्य पूरा करता है।



















