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शिवगंज में संत त्रिवेणीगिरी महाराज की संदिग्ध मृत्यु पर आक्रोश, न्याय की मांग को लेकर थाने के सामने संतों का महाधरनाराजस्थान
10 अक्तू॰ 2026, 4:53 pm (1 घंटे पहले)· 0

शिवगंज में संत त्रिवेणीगिरी महाराज की संदिग्ध मृत्यु पर आक्रोश, न्याय की मांग को लेकर थाने के सामने संतों का महाधरना

सिरोही के शिवगंज में संत त्रिवेणीगिरी महाराज की संदिग्ध मृत्यु के बाद साधु-संतों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस थाने के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।

राजस्थान के सिरोही जिले में संतों की असामयिक और संदिग्ध मृत्यु को लेकर धार्मिक समाज में असंतोष चरम पर पहुंच गया है। शिवगंज क्षेत्र में संत त्रिवेणीगिरी महाराज के अचानक चले जाने और उनकी मृत्यु के हालात स्पष्ट न होने से आक्रोशित साधु-संतों ने अब बड़े आंदोलन का रूप अख्तियार कर लिया है। स्थानीय पुलिस द्वारा अब तक की गई प्रारंभिक जांच की दिशा से असंतुष्ट होकर बड़ी संख्या में संत समाज के लोग शिवगंज थाने के ठीक सामने धरने पर बैठ गए हैं। धरना दे रहे साधुओं का स्पष्ट कहना है कि इस पूरे प्रकरण में बिना किसी ढिलाई के निष्पक्ष छानबीन होनी चाहिए, घटना से जुड़े प्रत्येक प्रत्यक्ष और डिजिटल साक्ष्य का बारीकी से परीक्षण किया जाना चाहिए और यदि इसमें किसी की संलिप्तता सामने आती है तो दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

शिवगंज थाने के सामने संतों का डेरा और वरिष्ठ अधिकारियों को बुलाने की मांग

शनिवार सुबह 11 बजे तय कार्यक्रम के अनुसार साधु-संतों ने शिवगंज पुलिस थाने का घेराव करने का आह्वान किया था। आह्वान के पश्चात बड़ी संख्या में संन्यासियों और श्रद्धालुओं ने थाने के मुख्य द्वार के सामने अपना पड़ाव डाल दिया। धरने पर बैठे संतों ने सिरोही के पुलिस अधीक्षक और जिला कलेक्टर को सीधे धरना स्थल पर आकर बातचीत करने की मांग रखी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर जब तक शीर्ष अधिकारी स्वयं मौके पर आकर इस पूरे घटनाक्रम की गहन जांच का ठोस आश्वासन नहीं देते, तब तक उनका यह शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा। संतों ने इस न्याय की लड़ाई में 36 कौम के आम नागरिकों और सनातन परंपरा में विश्वास रखने वाले सभी वर्गों से खुलकर समर्थन देने का अनुरोध किया है।

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थाने के बाहर निरंतर हर-हर महादेव और सनातन बचाओ के उद्घोष गूंज रहे हैं। सभा को संबोधित करते हुए प्रमुख साधु-संतों ने कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य केवल निष्पक्ष न्याय हासिल करना है, किसी से कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है। संतों का तर्क है कि घटनाक्रम से जुड़े तमाम वीडियो फुटेज और अन्य तकनीकी सबूतों की फॉरेंसिक और वैज्ञानिक समीक्षा कराई जानी चाहिए ताकि कोई भी संदेह शेष न रहे। संतों ने आशंका जताई कि प्रारंभिक स्तर पर मामले को सामान्य रूप से देखा जा रहा है, जबकि इसमें आपराधिक षड्यंत्र अथवा हत्या का अंदेशा भी पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। संत समाज ने पुलिस प्रशासन से अपेक्षा जताई है कि वह किसी भी बाहरी या राजनीतिक दबाव में आए बिना वस्तुनिष्ठ होकर अनुसंधान करे।

धरना स्थल पर पहुंचे पूर्व सीएम के सलाहकार संयम लोढ़ा

शिवगंज में जारी इस तनावपूर्ण माहौल के बीच पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकार संयम लोढ़ा भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। उन्होंने वहां मौजूद साधु-संतों से मुलाकात की और उनकी मांगों की जानकारी ली। धरना स्थल पर सिरोही के पुलिस अधीक्षक को बुलाए जाने की मांग लगातार तेज होती रही। प्रदर्शन के दौरान एकत्र जनसमूह में से कुछ लोगों ने सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी की कार्यशैली को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया। हालांकि संत समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने तुरंत स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध से जुड़ा हुआ नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर एक पूज्य संत की अस्वाभाविक मौत के कारणों का सच जानने और न्याय सुनिश्चित करने का सवाल है। संतों का कहना है कि उनकी निगाहें अब जिला प्रशासन और राज्य पुलिस के भावी कदमों पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या औपचारिक रुख अपनाते हैं।

झुंझुनूं के लोहार्गल धाम में संत सूरजदास महाराज की मृत्यु का ताजा संदर्भ

संत त्रिवेणीगिरी महाराज की मृत्यु का यह विवाद ऐसे समय में गहराया है जब कुछ ही दिनों पूर्व राजस्थान के झुंझुनूं जिले में भी साधु की संदिग्ध मौत पर ऐसा ही जनाक्रोश देखा गया था। झुंझुनूं के प्रसिद्ध तीर्थ लोहार्गल धाम स्थित बरखंडी बाबा मंदिर के संत सूरजदास महाराज का शव पहाड़ी इलाके में एक गहरी खाई के भीतर झाड़ियों में फंसा हुआ मिला था। उस घटना के सामने आते ही पूरे अंचल में भारी हड़कंप मच गया था। संत समाज ने तत्कालीन परिस्थितियों को देखते हुए हत्या की प्रबल आशंका जताई थी और पुलिस प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि महाराज के पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान और विधिवत तरीके से खाई से बाहर नहीं निकाला गया तो हालात नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं। उस समय संतों के उग्र तेवरों को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत भारी पुलिस बल तैनात किया था और लोहार्गल धाम में भारी भीड़ जमा हो गई थी।

आश्रमों में संतों की सुरक्षा और मुकदमों की पारदर्शी छानबीन पर उठे सवाल

शिवगंज और लोहार्गल की घटनाओं ने समूचे प्रदेश में मंदिरों, धार्मिक मठों और आश्रमों में निवास करने वाले साधु-संतों की व्यक्तिगत सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर विमर्श छेड़ दिया है। दूरदराज की पहाड़ियों, जंगलों और एकांत स्थलों पर बने धार्मिक ठिकानों पर सेवा-साधना करने वाले संतों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने की बात अब खुलकर सामने आ रही है। संत समुदाय का कहना है कि ऐसी किसी भी अस्वाभाविक मृत्यु की सूचना मिलने पर पुलिस को शुरुआत से ही अत्यंत गंभीरता और तत्परता दिखानी चाहिए, ताकि किसी भी साक्ष्य के नष्ट होने का खतरा न रहे। शिवगंज में संत त्रिवेणीगिरी महाराज के मामले में भी मुख्य मांग यही है कि साक्ष्यों की पारदर्शी जांच कर वास्तविकता को जनता के सामने लाया जाए। अब यह जिला प्रशासन की कार्यकुशलता पर निर्भर करता है कि वह साधु समाज के विश्वास को पुनः स्थापित करने के लिए कितनी तेजी से निष्पक्ष कदम उठाता है।

सवाल-जवाब

शिवगंज थाने के बाहर साधु-संत धरना क्यों दे रहे हैं?
साधु-संत संत त्रिवेणीगिरी महाराज की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं।
धरना स्थल पर संतों की प्रमुख प्रशासनिक मांग क्या है?
संतों की मुख्य मांग है कि सिरोही के पुलिस अधीक्षक और जिला कलेक्टर स्वयं धरना स्थल पर आएं और निष्पक्ष जांच की स्थिति स्पष्ट करें।
क्या धरने में कोई राजनीतिक या प्रशासनिक प्रतिनिधि पहुंचा?
हां, पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकार संयम लोढ़ा धरना स्थल पर पहुंचे और उन्होंने वहां मौजूद साधु-संतों से बातचीत की।
हाल ही में झुंझुनूं में किस संत की मृत्यु को लेकर आक्रोश हुआ था?
झुंझुनूं जिले के लोहार्गल धाम स्थित बरखंडी बाबा मंदिर के संत सूरजदास महाराज की संदिग्ध मौत को लेकर भारी जनआक्रोश देखा गया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·16 मिनट पहले

संत की मौत पर पुलिस थाने के बाहर ऐसा हंगामा होना साफ दिखाता है कि शुरुआती जांच से लोग संतुष्ट नहीं हैं। प्रशासन को तुरंत एसपी को मौके पर भेजकर निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाना चाहिए, वरना मामला और तूल पकड़ सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·16 मिनट पहले

अर्जुन जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। पिछली बार जब मैं सिरोही गया था, तो वहाँ स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति ऐसी ही नाराजगी देखी थी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·38 मिनट पहले

मुझे वो दिन अच्छे से याद है जब मैं सिरोही गया था, वहाँ के थाने के बाहर ऐसा रोष देखकर आज पुराना तनाव फिर ताज़ा हो गया।

Rohan Verma@rohan-verma·38 मिनट पहले

करण भाई, संयम लोढ़ा जी का वहाँ पहुँचना वाकई दिलचस्प था। क्या लगता है, इससे प्रशासन पर दबाव बनेगा?

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