उत्तराखंड की पावन नगरी ऋषिकेश केवल अपनी मनमोहक वादियों, धार्मिक स्थलों और साहसिक खेलों के लिए ही नहीं पहचानी जाती, बल्कि यहां का खानपान भी पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को खूब लुभाता है। इस धार्मिक शहर में देश के लगभग प्रत्येक हिस्से का प्रसिद्ध जायका आसानी से मिल जाता है। यदि दक्षिण भारतीय व्यंजनों की बात करें, तो शहर भर में अनेक भोजनालय मौजूद हैं जो डोसा, इडली और वड़ा परोसते हैं। इसके बावजूद, एम्स रोड पर संचालित होने वाला एक खास फूड कार्ट इन दिनों अपने पारंपरिक स्वाद के चलते लोगों के बीच जबरदस्त चर्चा बटोर रहा है। इस लोकप्रिय ठिकाने का नाम रामेश्वरम रसोई है, जहां का प्रामाणिक स्वाद लोगों को बार-बार यहां खींच लाता है।
एम्स रोड पर कहां स्थित है यह फूड कार्ट
इस खानपान केंद्र के संचालक अमन के मुताबिक, उनका यह फूड कार्ट एम्स रोड पर स्थित है। जब आप सीमा डेंटल कॉलेज की दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो सीधे हाथ की तरफ रामेश्वरम रसोई के नाम से यह स्टॉल नजर आता है। शहर में दक्षिण भारतीय स्वाद तलाशने वाले लोगों के लिए यह एक मुफीद पता बन चुका है। यहां सुबह से ही लोग गरमा-गरम नाश्ते के लिए पहुंचने लगते हैं और दिन भर ग्राहकों की कतार लगी रहती है।
मेनू में शामिल हैं ये लजीज व्यंजन
रामेश्वरम रसोई के मेनू में दक्षिण भारत के कई पारंपरिक और पसंदीदा पकवान शामिल किए गए हैं। यहां आने वाले ग्राहकों को गरमा-गरम सांभर वड़ा, दो विशेष तरह की चटनियों और सांभर के साथ परोसी जाने वाली रवा वेजिटेबल इडली, चटपटा लेमन राइस, उत्तपम और रवा वेजिटेबल अप्पे का विकल्प मिलता है। चाहे सुबह का हल्का नाश्ता करना हो या फिर दोपहर और शाम के वक्त हल्की भूख मिटानी हो, यहां परोसे जाने वाले विकल्प हर समय के लिए उपयुक्त साबित होते हैं। इडली की बेहद स्पंजी बनावट, वड़े का कुरकुरापन और घर के मसालों से तैयार सांभर का तालमेल हर किसी को खूब पसंद आता है।
समय और दाम की पूरी जानकारी
यह फूड कार्ट प्रतिदिन सुबह 9:00 बजे से लेकर रात 9:00 बजे तक ग्राहकों की सेवा के लिए खुला रहता है। खानपान के शौकीनों को यहां अपनी जेब पर भी ज्यादा भार नहीं डालना पड़ता। यहां विभिन्न व्यंजनों की शुरुआती कीमत 60 रुपये रखी गई है, जबकि विशेष कॉम्बो थाली की अधिकतम कीमत 120 रुपये तक जाती है। इस किफायती दर के कारण छात्र, स्थानीय निवासी और तीर्थयात्री सभी यहां आसानी से भोजन का लुत्फ उठा सकते हैं।
ताजगी और स्वच्छता का रखा जाता है खास ध्यान
खाने की गुणवत्ता को लेकर अमन बताते हैं कि वे स्वाद और शुद्धता के साथ कोई समझौता नहीं करते। सांभर तैयार करने के लिए घर में पीसे गए मसालों का इस्तेमाल किया जाता है और दोनों तरह की चटनियां भी पारंपरिक घरेलू मसालों के साथ ही बनाई जाती हैं। इडली को पूरी तरह स्पंजी और हल्का बनाने पर खास ध्यान दिया जाता है। इसके अलावा, सब्जियों को एक रात पहले से काटकर रखने के बजाय हर सुबह ताजा काटा जाता है, जिससे सांभर, इडली और वड़े का स्वाद एकदम ताजा बना रहे। पूरी प्रक्रिया में साफ-सफाई और स्वच्छता का भी कड़ा पालन किया जाता है। स्थानीय निवासी पोरस का कहना है कि वे नियमित रूप से यहां इडली और मेदू वड़ा खाने आते हैं। उन्होंने ऋषिकेश में कई स्थानों पर दक्षिण भारतीय भोजन चखा है, लेकिन रामेश्वरम रसोई का स्वाद उनके लिए सबसे बेहतरीन है।
























