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कोकराझार सीआईटी में 60 से अधिक छात्राएं फूड पॉइजनिंग की शिकार, मेस सुरक्षा और लापरवाही पर कैंपस में भारी विरोधअसम
29 सित॰ 2026, 8:54 am (2 दिन पहले)· 0

कोकराझार सीआईटी में 60 से अधिक छात्राएं फूड पॉइजनिंग की शिकार, मेस सुरक्षा और लापरवाही पर कैंपस में भारी विरोध

असम के कोकराझार स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में हॉस्टल का खाना खाने के बाद 60 से ज्यादा छात्राओं की तबीयत बिगड़ने पर छात्रों ने सोमवार को जोरदार प्रदर्शन किया।

असम के कोकराझार स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (सीआईटी) परिसर में सोमवार को छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया। यह आक्रोश गम्हारी सिखला गर्ल्स हॉस्टल की 60 से अधिक छात्राओं के बीमार पड़ने के बाद फूटा है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने हॉस्टल मेस के भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई के नियमों में घोर लापरवाही और मेस ठेकेदार की कार्यप्रणाली के खिलाफ तत्काल सख्त कदम उठाने की मांग की।

शनिवार रात के खाने के बाद बिगड़ी छात्राओं की तबीयत

यह पूरा मामला शनिवार रात शुरू हुआ, जब गम्हारी सिखला गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं ने मेस में बना खाना खाया। भोजन करने के कुछ ही देर बाद छात्राओं को उल्टी, दस्त, पेट में असहनीय दर्द और सिरदर्द की गंभीर शिकायतें होने लगीं। स्थिति बिगड़ने पर कई छात्राओं को तुरंत कोकराझार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि छात्राओं का इलाज संदिग्ध फूड पॉइजनिंग के प्रोटोकॉल के तहत किया जा रहा है। राहत की बात यह है कि चिकित्सीय देखरेख के बाद उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई गई है।

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लगातार शिकायतों के बावजूद अनदेखी का आरोप

आंदोलनकारी छात्रों ने संस्थान प्रशासन और मेस संचालक पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। छात्रों का कहना है कि मेस की रसोई में गंदगी और अस्वच्छ माहौल को लेकर पूर्व में कई बार शिकायतें दर्ज कराई गई थीं, लेकिन अधिकारियों ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इस उपेक्षा के विरोध में छात्रों ने मांग रखी है कि गम्हारी सिखला गर्ल्स हॉस्टल के मौजूदा कैटरिंग ठेकेदार का अनुबंध फौरन रद्द किया जाए।

सुरक्षा, एम्बुलेंस और प्रशासनिक सुधारों की मांग

भोजन की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों ने संस्थान प्रशासन के सामने कई अन्य प्रमुख मांगें भी रखी हैं। इनमें संस्थान में एक स्थायी कुलसचिव की नियुक्ति, आपात स्थिति के लिए पर्याप्त एम्बुलेंस सुविधाएं, कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और पूरे मामले में दोषी पाए जाने वाले कर्मियों पर दंडात्मक कार्रवाई करना शामिल है। सीआईटी के कार्यवाहक कुलसचिव हेमंत कुमार कलिता ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि पूरी घटना की विधिवत जांच संपन्न होने के बाद ही छात्रों की मांगों पर विचार किया जाएगा।

जिला मजिस्ट्रेट ने दिए जांच के सख्त निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए कोकराझार के जिला मजिस्ट्रेट ने सीआईटी के कुलसचिव को विस्तृत जांच कराने का निर्देश जारी किया है। प्रशासन ने शनिवार को परोसे गए खाने का पूरा ब्योरा, तय मेनू, खाद्य सामग्रियों की खरीद के स्रोत, खाना बनाने और परोसने के तौर-तरीके तथा सुरक्षा मानकों के पालन से संबंधित रिकॉर्ड तलब किए हैं। इसके अलावा पीड़ित छात्राओं की चिकित्सीय स्थिति और उपचार पर भी रिपोर्ट मांगी गई है। जांच दल यह पता लगाने में जुटा है कि फूड पॉइजनिंग किन कारणों से हुई और क्या मानकों में चूक के चलते यह नौबत आई।

सवाल-जवाब

सीआईटी कोकराझार में छात्राएं क्यों बीमार पड़ीं?
शनिवार रात गम्हारी सिखला गर्ल्स हॉस्टल की मेस में खाना खाने के बाद 60 से अधिक छात्राओं को संदिग्ध फूड पॉइजनिंग के कारण उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत हुई।
बीमार छात्राओं को उपचार के लिए कहां ले जाया गया?
छात्राओं को उपचार के लिए कोकराझार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी स्थिति स्थिर बताई है।
प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
छात्रों ने मेस ठेकेदार का अनुबंध रद्द करने, स्थायी कुलसचिव की नियुक्ति, पर्याप्त एम्बुलेंस व्यवस्था, सख्त सुरक्षा और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन ने इस घटना पर क्या कार्रवाई की है?
कोकराझार के जिला मजिस्ट्रेट ने सीआईटी के कुलसचिव को खाने की सामग्री, मेनू, तैयारी के तौर-तरीकों और सुरक्षा मानकों की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Divya Reddy@divya-reddy·1 दिन पहले

कार्यवाहक कुलसचिव का यह कहना कि जांच पूरी होने के बाद ही मांगों पर विचार होगा, बहुत अजीब लगा। इतनी सारी लड़कियों के बीमार पड़ने के बाद तुरंत एक्शन लेना चाहिए था, जांच तो चलती रहेगी।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

असम के इस संस्थान में बच्चों की सेहत के साथ जो खिलवाड़ हुआ है, वह वाकई डरावना है। हॉस्टल के खाने में ऐसी लापरवाही और बार-बार शिकायत के बाद भी कोई ठोस कदम न उठाना प्रशासन की बड़ी चूक है। उम्मीद है जिला प्रशासन की जांच में दोषी ठेकेदार और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी, ताकि छात्रों को सुरक्षित माहौल मिल सके।

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·1 दिन पहले

रविकेश जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। पर क्या आपको लगता है कि प्रशासन इस बार सच में ठेकेदार पर कोई कड़ी कार्रवाई करेगा?

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आना बहुत डरावना है। मेस के खाने की ऐसी लापरवाही पर तो ठेकेदार का लाइसेंस तुरंत रद्द होना चाहिए।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

करण जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। पर क्या प्रशासन को इस ठेकेदार पर कार्रवाई करने के लिए छात्राओं के बीमार होने का इंतज़ार करना चाहिए था?

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