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कोलकाता एयरपोर्ट की मस्जिद में नमाज पर रोक जारी, कलकत्ता हाईकोर्ट ने दिया अंतरराष्ट्रीय विमानन खतरों का हवालापश्चिम बंगाल
1 अक्तू॰ 2026, 6:21 pm (27 दिन पहले)· 1

कोलकाता एयरपोर्ट की मस्जिद में नमाज पर रोक जारी, कलकत्ता हाईकोर्ट ने दिया अंतरराष्ट्रीय विमानन खतरों का हवाला

कोलकाता एयरपोर्ट स्थित बकरा मस्जिद में नमाज की इजाजत मांगने वाली याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 तय की है।

कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की संवेदनशील परिधि में मौजूद बकरा मस्जिद में नमाज अता करने की मांग को लेकर दायर अर्जी पर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तत्काल किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने से साफ मना कर दिया है। विमानपत्तन प्राधिकरण और सुरक्षा तंत्र की गंभीर आपत्तियों पर विचार करते हुए अदालत ने मौजूदा पाबंदियों को बरकरार रखा है। इस मामले की अगली कानूनी समीक्षा अब 7 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है। अदालती कार्यवाही के दौरान हवाई अड्डों तथा उड़ानों से जुड़े वैश्विक सुरक्षा खतरों पर भी विस्तृत चर्चा देखने को मिली।

याचिकाकर्ताओं का पुराना अभ्यास और सुरक्षा प्रोटोकॉल

अदालत में अर्जी दाखिल करने वाले पक्ष ने अपनी दलील रखते हुए कहा कि संबंधित धर्मस्थल पर दशकों से स्थानीय नमाजी इबादत करते रहे हैं। उनका तर्क था कि पहले एक सुव्यवस्थित सुरक्षा तंत्र के तहत यहां लोगों को प्रवेश दिया जाता था। इस प्रक्रिया में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी CISF के जवान सभी नमाजियों की कड़ी जांच करते थे। गहन तलाशी और पहचान पत्र जांचने के उपरांत सभी लोगों को एक विशेष बस द्वारा मस्जिद तक पहुंचाया जाता था। नमाज संपन्न होते ही उसी वाहन के जरिए सभी को हवाई अड्डा क्षेत्र से बाहर मुख्य मार्ग तक छोड़ दिया जाता था। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक इस निर्धारित व्यवस्था से किसी तरह का सुरक्षा संकट पैदा नहीं होता था।

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रनवे से 165 मीटर की दूरी और संवेदनशील एप्रन में घुसपैठ

हवाई अड्डा प्रबंधन की ओर से पेश वकीलों ने अदालत के समक्ष बेहद चौंकाने वाले तथ्य रखे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विवादित ढांचा एयरपोर्ट के अति-संवेदनशील ऑपरेशनल क्षेत्र में मौजूद है, जहां विमानों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। यह मस्जिद सक्रिय रनवे से मात्र 165 मीटर की दूरी पर स्थित है। विमानन अधिकारियों ने पीठ को अवगत कराया कि पूर्व में कई ऐसी घटनाएं दर्ज हुई हैं जब बाहरी लोग सुरक्षा घेरा लांघकर एप्रन एरिया तक पहुंच गए थे। रनवे और विमान पार्किंग के इतने निकट अनधिकृत या बाहरी व्यक्तियों की मौजूदगी किसी भी बड़े विमानन हादसे अथवा तोड़फोड़ को खुला निमंत्रण दे सकती है, जिसे नजरअंदाज करना आत्मघाती होगा।

बदलते दौर में आतंकवाद और सुरक्षा परिदृश्य

केंद्र और विमानन प्रशासन की तरफ से दलीलें पेश करते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल धीरज त्रिवेदी ने रेखांकित किया कि पिछले कुछ दशकों में सुरक्षा चुनौतियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि 1993 से पूर्व ऐसे गंभीर और संगठित खतरे सामने नहीं आते थे, किंतु बाद के वर्षों में सामरिक प्रतिष्ठानों पर हमले बढ़े हैं। उन्होंने 2025 में हुए लाल किला हमले का विशेष तौर पर उल्लेख करते हुए कहा कि भारत लगातार ऐसे खतरों का निशाना बनता रहा है। ऐसे तनावपूर्ण सुरक्षा माहौल में देश के किसी भी प्रमुख हवाई अड्डे के भीतरी परिचालन हिस्से में लोगों के जमावड़े की इजाजत देना भारी जोखिम भरा कदम साबित हो सकता है।

वैश्विक जोखिमों का दायरा और फ्लाईदुबई प्रसंग

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के तर्कों पर टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने कहा कि इस तरह के खतरे अब सिर्फ भारतीय सीमाओं तक सीमित नहीं रहे, बल्कि पूरी दुनिया इनसे जूझ रही है। जज ने एक दिन पहले घटित फ्लाईदुबई प्रकरण का उल्लेख किया, जहां हवा में उड़ते विमान के भीतर अप्रत्याशित संकट खड़ा हो गया था। न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने कहा,

"नहीं, सिर्फ भारत में नहीं। आजकल यह हर जगह हो रहा है। कल की फ्लाईदुबई घटना को देखिए। आप कल्पना भी नहीं कर सकते।"

पीठ की यह सख्त टिप्पणी उस गंभीर घटना के संदर्भ में आई जिसमें दुबई से इजरायल के लिए रवाना हुई फ्लाईदुबई की एक यात्री उड़ान में कॉकपिट के भीतर विवाद पैदा हो गया था। उस प्रकरण में ओमान मूल के सह-चालक पर मुख्य पायलट कैप्टन स्मित माच्छर पर हिंसक हमला करने और विमान को दुर्घटनाग्रस्त कराने के प्रयास का आरोप लगा, जिसके बाद विमान को आपात स्थिति में सऊदी अरब की ओर मोड़ना पड़ा था। अदालत ने माना कि विमानन क्षेत्र में अप्रत्याशित जोखिम कहीं भी और कभी भी उभर सकते हैं।

अंतरिम आदेश से इनकार और आगामी सुनवाई

समस्त पक्षों की प्राथमिक बहस सुनने के पश्चात न्यायमूर्ति कृष्ण राव की एकल पीठ ने नमाज की बहाली के लिए कोई भी अंतरिम निर्देश पारित नहीं किया। इसका सीधा अर्थ यह है कि एयरपोर्ट की सुरक्षा के मद्देनजर मस्जिद में बाहरी लोगों के प्रवेश पर जो रोक लगी थी, वह यथावत जारी रहेगी। अदालत ने पूरे मामले को 7 अक्टूबर 2026 के लिए सूचीबद्ध कर दिया है। आगामी तारीख पर अदालत रनवे की सुरक्षा, संवेदनशील क्षेत्र में लोगों की आवाजाही के खतरे और वैकल्पिक प्रबंधों से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विस्तृत सुनवाई करेगी।

सवाल-जवाब

कलकत्ता हाईकोर्ट में किस मस्जिद को लेकर सुनवाई हो रही थी?
कोलकाता एयरपोर्ट परिसर के ऑपरेशनल एरिया में स्थित बकरा मस्जिद में नमाज पढ़ने की अनुमति को लेकर सुनवाई हो रही थी।
जस्टिस कृष्ण राव ने मामले में क्या आदेश दिया?
जस्टिस कृष्ण राव ने नमाज की इजाजत देने के लिए कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया और अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 तय की।
मस्जिद रनवे से कितनी दूरी पर स्थित है?
विमानन अधिकारियों की रिपोर्ट के मुताबिक मस्जिद सक्रिय रनवे से करीब 165 मीटर की दूरी पर स्थित है।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार पहले नमाज की क्या व्यवस्था थी?
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि पहले CISF द्वारा जांच के बाद नमाजियों को बस से मस्जिद ले जाया जाता था और नमाज के बाद वापस छोड़ा जाता था।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने किन घटनाओं का हवाला दिया?
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल धीरज त्रिवेदी ने 1993 के बाद बदले सुरक्षा माहौल और 2025 के लाल किला हमले का हवाला दिया।
अदालत में फ्लाईदुबई की किस घटना का जिक्र किया गया?
कोर्ट में उस घटना का जिक्र हुआ जहां दुबई से इजरायल जा रही फ्लाईदुबई उड़ान में को-पायलट ने कैप्टन स्मित माच्छर पर हमला किया और विमान को सऊदी अरब डायवर्ट करना पड़ा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Tanvi Desai@tanvi-desai·27 दिन पहले

एयरपोर्ट के इतने संवेदनशील इलाके में दशकों से लोगों को आने-जाने कैसे दिया जा रहा था जब सुरक्षा नियम इतने कड़े हैं? अगली सुनवाई 2026 में है, तब तक क्या स्थिति वैसी ही बनी रहेगी?

Arjun Mehta@arjun-mehta·27 दिन पहले

कोलकाता एयरपोर्ट पर जब भी जाना होता है, वहां की सुरक्षा का कड़ा पहरा साफ दिखता है। रनवे के इतने पास किसी धार्मिक स्थल पर लोगों के आने-जाने की अनुमति देना वाकई बहुत बड़ा जोखिम है। आज के समय में जब सुरक्षा खतरे इतने बढ़ गए हैं, कोर्ट का यह फैसला बिल्कुल सही और व्यावहारिक लगता है।

Ravikash Gupta@ravikash·27 दिन पहले

अर्जुन, आपकी बात सही है, लेकिन क्या सच में CISF की बस वाली पुरानी व्यवस्था अब कभी वापस नहीं आ सकती?

Rohan Verma@rohan-verma·27 दिन पहले

रनवे से सिर्फ 165 मीटर की दूरी सच में बहुत खतरनाक लगती है। पर सालों से जब बस और सीआईएसएफ की जांच के बाद लोग जाते थे, तब तो कोई दिक्कत नहीं हुई थी। अब अचानक इतना बड़ा खतरा कैसे हो गया, समझ नहीं आता।

Karan Malhotra@karan-malhotra·27 दिन पहले

रोहन, सुरक्षा खतरे तो समय के साथ बदलते रहते हैं, पर जब पहले सीआईएसएफ की बस से लोग जाते थे तब कोई बड़ा हादसा क्यों नहीं हुआ?

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