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कोलकाता के तारातला में निर्माणाधीन गोदाम की छत गिरी, मलबे में दबे करीब 50 मजदूर, सेना और NDRF का रेस्क्यू जारीभारत
24 जून 2026, 5:50 pm (45 दिन पहले)· 2

कोलकाता के तारातला में निर्माणाधीन गोदाम की छत गिरी, मलबे में दबे करीब 50 मजदूर, सेना और NDRF का रेस्क्यू जारी

तारातला में बुधवार दोपहर निर्माणाधीन गोदाम की 20 हजार वर्गफुट की छत गिर गई, जिसके नीचे करीब 50 मजदूर दब गए। सेना, NDRF और दमकल की टीमें रातभर बचाव अभियान में जुटी हैं और अब तक 14 लोगों को बाहर निकाला गया है।

कोलकाता के तारातला इलाके में बुधवार दोपहर एक निर्माणाधीन गोदाम की छत भरभराकर गिरने से हड़कंप मच गया। करीब 20 हजार वर्गफुट में फैला यह विशाल ढांचा पलभर में मलबे के ढेर में बदल गया और इसके नीचे लगभग 50 मजदूरों के दबने की आशंका ने पूरे शहर को झकझोर दिया। हादसे के बाद घटनास्थल पर सिर्फ चीखें और सिसकियां गूंज रही थीं। कंक्रीट और लोहे के भारी बीम के नीचे फंसी जिंदगियों को बचाने के लिए सेना, NDRF और दमकल विभाग की टीमें पूरी ताकत से जुट गईं।

ढांचा बेहद बड़ा था, इसलिए मलबे का वजन भी उतना ही भारी है। लोहे के मोटे बीम और कंक्रीट की मोटी परतों के नीचे मजदूर दबे हैं। बचाव दल का कहना है कि मलबे के भीतर से अब भी लोगों की आवाजें आ रही हैं, जो खुद को बचाने की गुहार लगा रहे हैं। इन्हें सुनकर हर किसी का कलेजा कांप रहा है। अंदर दबे लोगों तक हवा पहुंचाने के लिए मलबे में छोटे-छोटे छेद किए गए हैं, ताकि उन्हें कुछ देर और सांस लेने का मौका मिल सके। यहां एक-एक पल बेहद भारी साबित हो रहा है।

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हादसे के वक्त 50 से 60 मजदूर कर रहे थे काम

जिस समय छत गिरी, उस वक्त वहां करीब 50 से 60 मजदूर काम में लगे हुए थे। मलबे के नीचे से आती दर्दभरी चीखें मौके पर मौजूद हर इंसान का दिल दहला रही हैं। हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय लोग, पुलिस और राहत टीमें फौरन घटनास्थल पर पहुंच गईं।

नबन्ना ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

हादसे की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार पूरी तरह सक्रिय हो गई है। नबन्ना (राज्य सचिवालय) में एक विशेष नियंत्रण कक्ष बनाया गया है। फंसे और घायल लोगों की जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 1070 जारी किया गया है। इसके अलावा लोग 8697981070, 033-22143526 और 033-22535185 पर भी संपर्क कर सकते हैं। सरकार ने साफ कहा है कि राहत कार्यों में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

सुरंग खोदकर मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश

स्थिति को देखते हुए सेना और NDRF की टुकड़ियों को तुरंत मौके पर बुलाया गया। बचाव दल ने हाइड्रोलिक ड्रिलिंग मशीनों, क्रेन और गैस कटर की मदद से मलबे के नीचे दबे लोगों तक पहुंचने के लिए सुरंग खोदने का काम शुरू कर दिया है। बीच में फंसे भारी लोहे के बीम और कंक्रीट की चट्टानों को काटने का काम लगातार जारी है। अब तक 14 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिन्हें SSKM अस्पताल के ट्रॉमा केयर सेंटर में भर्ती कराया गया है।

अस्पतालों में आपातकालीन इंतजाम

SSKM अस्पताल में घायलों के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम तैनात कर दी गई है। स्वास्थ्य सचिव नारायणस्वरूप निगम ने बताया कि अस्पताल में हर तरह की तैयारी पूरी कर ली गई है। कुछ लोगों की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। मौके पर दर्जनों एम्बुलेंस तैयार खड़ी हैं, ताकि किसी भी घायल को बिना एक पल गंवाए सीधे अस्पताल पहुंचाया जा सके। स्वास्थ्य राज्य मंत्री ने भी ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर हालात का जायजा लिया।

स्निफर डॉग और ड्रोन की मदद से तलाश

रात के अंधेरे और मलबे के भारी बोझ के बावजूद बचाव कार्य में कोई रुकावट नहीं आई। फंसे लोगों का सटीक पता लगाने के लिए अत्याधुनिक ड्रोन और खोजी कुत्तों (स्निफर डॉग) की मदद ली जा रही है। घटनास्थल पर कोलकाता के पुलिस आयुक्त अजय नंदा और वरिष्ठ अधिकारी पल-पल की रिपोर्ट ले रहे हैं। हर किसी की बस एक ही दुआ है कि मलबे के नीचे दबी जिंदगियां सलामत बाहर आ जाएं।

रातभर चलता रहेगा रेस्क्यू ऑपरेशन

अंधेरा होने के बाद भी बचाव कार्य की रफ्तार धीमी नहीं पड़ी है। प्रशासन ने घटनास्थल पर बड़े जनरेटर और फ्लड लाइट्स लगवा दी हैं, ताकि रोशनी की कोई कमी न रहे। स्निफर डॉग की मदद से यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि मलबे के नीचे और कौन-कौन दबा हो सकता है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक आखिरी मजदूर को सुरक्षित बाहर नहीं निकाल लिया जाता, तब तक यह अभियान पूरी ताकत के साथ इसी तरह चलता रहेगा और कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी।

लापरवाही पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस गोदाम के निर्माण में भारी लापरवाही बरती गई। पिछले डेढ़ साल से यहां काम चल रहा था, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं थे। बुधवार सुबह से ही ढांचा हिलने लगा था और मजदूरों ने इसकी शिकायत भी की थी, फिर भी काम जारी रखा गया। बताया जा रहा है कि यह जमीन पोर्ट ट्रस्ट की है, जिसे एक निजी चाय कंपनी को दिया गया था। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी इमारत आखिर कैसे ढह गई। मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं, ताकि दोषियों को कड़ी सजा मिल सके।

सवाल-जवाब

तारातला में हादसा कब और कैसे हुआ?
बुधवार दोपहर कोलकाता के तारातला इलाके में एक निर्माणाधीन गोदाम की करीब 20 हजार वर्गफुट की छत अचानक भरभराकर गिर गई।
मलबे के नीचे कितने मजदूर दबे होने की आशंका है?
हादसे के वक्त वहां करीब 50 से 60 मजदूर काम कर रहे थे और लगभग 50 मजदूरों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
अब तक कितने लोगों को बचाया गया है?
अब तक 14 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकालकर SSKM अस्पताल के ट्रॉमा केयर सेंटर में भर्ती कराया गया है।
बचाव कार्य में कौन-कौन सी टीमें जुटी हैं?
सेना, NDRF और दमकल विभाग की टीमें हाइड्रोलिक ड्रिलिंग मशीनों, क्रेन, गैस कटर, ड्रोन और स्निफर डॉग की मदद से रेस्क्यू कर रही हैं।
मदद या जानकारी के लिए कौन से हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं?
नबन्ना ने हेल्पलाइन नंबर 1070 जारी किया है, इसके अलावा 8697981070, 033-22143526 और 033-22535185 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
हादसे की वजह क्या मानी जा रही है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण में भारी लापरवाही बरती गई और सुबह से ढांचा हिलने की शिकायत के बावजूद काम जारी रखा गया। मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
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