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कोटा के कोटड़ी में गणेश पंडाल को बनाया सिनेमा हॉल, एलईडी स्क्रीन पर आध्यात्मिक फिल्म देखने उमड़ा जनसैलाबराजस्थान
21 सित॰ 2026, 5:14 pm (4 दिन पहले)· 0

कोटा के कोटड़ी में गणेश पंडाल को बनाया सिनेमा हॉल, एलईडी स्क्रीन पर आध्यात्मिक फिल्म देखने उमड़ा जनसैलाब

कोटा के कोटड़ी स्थित शिव चौक में गणेश पंडाल के भीतर बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाकर नीम करोली बाबा पर आधारित फिल्म दिखाई गई, जिसे देखने सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे।

राजस्थान के कोटा में चल रहे गणेश उत्सव के दौरान विभिन्न इलाकों में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम मची हुई है। कहीं भगवान श्री गणेश की भव्य प्रतिमाएं श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही हैं, तो कहीं भजन संध्या और महाआरती के आयोजनों से पूरा माहौल भक्तिमय बना हुआ है। इसी कड़ी में कोटा के कोटड़ी इलाके में एक अनूठी पहल देखने को मिली, जहां एक पूजा पंडाल को खुले सिनेमा घर का रूप दे दिया गया।

शिव चौक में बड़ी स्क्रीन पर आध्यात्मिक फिल्म का प्रसारण

कोटड़ी स्थित शिव चौक के राजा जय श्री गणेश मित्र मंडल के कार्यकर्ताओं ने गणेश उत्सव के अवसर पर पंडाल परिसर के पास एक विशाल एलईडी स्क्रीन स्थापित की। इस स्क्रीन पर नीम करोली बाबा के जीवन और उनके आध्यात्मिक विचारों पर आधारित लोकप्रिय फिल्म 'हनुमान अंश' का विशेष प्रदर्शन किया गया। पंडाल में एक तरफ गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित थी, तो दूसरी ओर बड़े पर्दे पर चल रही फिल्म को देखने के लिए स्थानीय लोग अपने परिवारों और बच्चों के साथ भारी संख्या में जुटे।

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सैकड़ों श्रद्धालुओं ने परिवार सहित लिया आनंद

इस आयोजन को लेकर स्थानीय निवासियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। आयोजकों के अनुसार लगभग 500 से 700 दर्शकों ने पंडाल में उपस्थित होकर पूरी फिल्म देखी। दर्शन करने पहुंचे भक्तों को एक ही स्थान पर पूजा अर्चना के साथ-साथ बड़े पर्दे पर आध्यात्मिक सिनेमा का अनुभव मिला। आयोजकों का कहना था कि नीम करोली बाबा के विचारों से जुड़ी इस फिल्म को लेकर लोगों में पहले से गहरी रुचि थी, जिसे ध्यान में रखते हुए इस सार्वजनिक स्क्रीनिंग की व्यवस्था की गई।

बॉक्स ऑफिस पर फिल्म का शानदार प्रदर्शन और नई घोषणा

आध्यात्मिक विषय पर बनी फिल्म 'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर भी उल्लेखनीय व्यावसायिक सफलता हासिल की है। प्रदर्शन के शुरुआती 44 दिनों के भीतर इस फिल्म ने दुनिया भर में कुल 329.30 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन दर्ज किया है, जबकि अकेले भारत में इसका नेट कारोबार 258.13 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।

फिल्म की इस सफलता के बीच निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने अपनी अगली परियोजना 'राम बोला' की आधिकारिक घोषणा की है। यह आगामी फिल्म महान संत और कवि गोस्वामी तुलसीदास के जीवन प्रसंगों पर केंद्रित होगी। निर्देशक ने घोषणा की है कि 'राम बोला' से होने वाली पूरी 100 प्रतिशत कमाई 'सेवा संकल्प अभियान' को समर्पित की जाएगी, जिसके चलते इस नई फिल्म के सामाजिक संकल्प की चारों ओर चर्चा हो रही है।

सवाल-जवाब

कोटा के किस पंडाल में फिल्म 'हनुमान अंश' दिखाई गई?
कोटा के कोटड़ी इलाके में स्थित शिव चौक के राजा जय श्री गणेश मित्र मंडल के पंडाल में यह फिल्म दिखाई गई।
फिल्म 'हनुमान अंश' किस महापुरुष के जीवन पर आधारित है?
यह फिल्म नीम करोली बाबा के जीवन और उनके आध्यात्मिक विचारों पर आधारित है।
पंडाल में कितने लोगों ने फिल्म की स्क्रीनिंग देखी?
आयोजकों के मुताबिक करीब 500 से 700 स्थानीय श्रद्धालुओं ने परिवार सहित पंडाल में फिल्म देखी।
फिल्म 'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर कुल कितना कारोबार किया है?
फिल्म ने 44 दिनों में दुनिया भर में 329.30 करोड़ रुपये का ग्रॉस और भारत में 258.13 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया है।
निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी की अगली फिल्म का नाम क्या है?
उनकी अगली फिल्म का नाम 'राम बोला' है, जो संत गोस्वामी तुलसीदास के जीवन पर आधारित होगी।
फिल्म 'राम बोला' की कमाई को लेकर क्या संकल्प लिया गया है?
निर्देशक ने इस फिल्म की 100 प्रतिशत कमाई 'सेवा संकल्प अभियान' में दान करने का संकल्प लिया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·3 दिन पहले

यह खबर दर्शाती है कि कैसे पारंपरिक त्योहार अब आधुनिक तकनीक और आध्यात्मिक सिनेमा के मेल से सामुदायिक जुड़ाव का नया मंच बन रहे हैं। नीम करोली बाबा पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' के 329 करोड़ रुपये से अधिक के वैश्विक कारोबार और इसके पंडालों में सार्वजनिक प्रदर्शन से यह स्पष्ट है कि दर्शक बड़े पर्दे पर ऐसी सार्थक कहानियों को देखने के लिए कितने उत्सुक हैं। निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी की अगली फिल्म 'राम बोला' की घोषणा और उसकी पूरी कमाई 'सेवा संकल्प अभियान' को देने का निर्णय यह साबित करता है कि धार्मिक और सामाजिक सरोकारों का यह नया व्यावसायिक मॉडल भारतीय मनोरंजन उद्योग में एक बड़ा और प्रभावशाली ट्रेंड बनता जा रहा है।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

यह आयोजन धार्मिक आयोजनों और आधुनिक मीडिया के मिलन का एक दिलचस्प उदाहरण है। जब 329 करोड़ रुपये से अधिक की वैश्विक कमाई करने वाली 'हनुमान अंश' जैसी फिल्में सार्वजनिक पंडालों में दिखाई जाती हैं, तो यह मनोरंजन, स्थानीय सामुदायिक जुड़ाव और कॉर्पोरेट-वित्तीय सफलता के बीच की पारंपरिक सीमाओं को धुंधला कर देता है। सांस्कृतिक आयोजनों में इस तरह के डिजिटल माध्यमों का उपयोग आने वाले समय में आध्यात्मिक सिनेमा के वितरण मॉडल और जन-पहुंच को पूरी तरह बदल सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि कैसे सॉफ्ट पावर और कमर्शियल सिनेमा का गठजोड़ अब स्थानीय सांस्कृतिक उत्सवों में पैठ बना रहा है। जब नीम करोली बाबा जैसे आध्यात्मिक विषयों पर बनी फिल्में सामाजिक आयोजनों का हिस्सा बनती हैं, तो यह न केवल धार्मिक जुड़ाव को मजबूत करता है, बल्कि कमर्शियल सिनेमा के डिस्ट्रीब्यूशन पैटर्न को भी बदल देता है। भविष्य में राजनीतिक और सामाजिक अभियानों के लिए ऐसे सार्वजनिक मंचों का प्रभाव और अधिक गहरा हो सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

सार्वजनिक आयोजनों में इस प्रकार की बड़ी स्क्रीन और फिल्मों के प्रदर्शन से भीड़ प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन जाता है। यद्यपि यह आयोजन पूरी तरह से धार्मिक और शांतिपूर्ण रहा, लेकिन भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों के दौरान स्थानीय पुलिस और प्रशासन को कानून-व्यवस्था तथा यातायात सुचारू रखने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने होंगे ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·3 दिन पहले

करण मल्होत्रा की चिंता अपनी जगह पूरी तरह से सटीक है। जब किसी पूजा पंडाल में पांच से सात सौ लोग इकट्ठा होते हैं और वहां मुख्य सड़क या चौराहे के पास एलईडी स्क्रीन लगाई जाती है, तो सार्वजनिक सुरक्षा और सुगम आवाजाही बनाए रखना स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा बन जाता है। खासकर त्योहारों के इस सीजन में, जहां भीड़ का ग्राफ अचानक बढ़ता है, सुरक्षा के एहतियाती कदम उठाना अनिवार्य हो जाता है ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचा जा सके।

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