हरियाणा के फरीदाबाद जिले में बेमौसम और लगातार हो रही बारिश ने अन्नदाताओं के सामने गहरा संकट खड़ा कर दिया है। खेतों में कटाई के लिए पूरी तरह तैयार खड़ी धान की फसल पानी के प्रहार से पूरी तरह बर्बाद हो रही है। इस साल गेहूं की फसल में भारी नुकसान उठाने के बाद, अब धान के भी चौपट होने से किसानों की आर्थिक कमर टूट चुकी है। लगातार हो रही इस बारिश के कारण खेतों में जलभराव हो गया है, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत और पूंजी पानी में डूब गई है।
गेहूं के बाद अब धान की फसल पर कुदरत का दोहरा प्रहार
फरीदाबाद के किसानों को इस साल मौसम की दोहरी मार झेलनी पड़ी है। इससे पहले जब गेहूं की फसल पककर तैयार होने वाली थी, तब अचानक हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसल को पूरी तरह तबाह कर दिया था। उस समय किसानों को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। अब ठीक वैसा ही संकट धान की फसल पर भी मंडरा रहा है। पकने के आखिरी चरण में पहुंच चुकी धान की फसल तेज हवा और भारी पानी के दबाव के कारण खेतों में बिछ गई है, जिससे फसलों के सड़ने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ गया है।
डीग गांव के पट्टाधारक किसानों की बढ़ी मुश्किलें
डीग गांव के किसान कुंवरपाल के खेतों में बारिश ने भारी तबाही मचाई है। कुंवरपाल ने यह जमीन पट्टे यानी किराए पर लेकर खेती की थी, जिससे उन पर कर्ज और खर्च का दोहरा दबाव है। पट्टे पर खेती करने वाले किसानों को फसल हो या न हो, जमीन मालिक को तय किराया देना ही पड़ता है। उनके खेत में खड़ी एक एकड़ धान की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है, जिससे उन्हें करीब 50 फीसदी का सीधा नुकसान हुआ है। गेहूं के सीजन में लाखों की चोट खाने के बाद, अब किराए की जमीन पर धान की बर्बादी ने उनके सामने परिवार के पालन-पोषण का संकट खड़ा कर दिया है।
लागत की मार और पानी में सड़ती धान की फसल
एक अन्य स्थानीय किसान रामबाबू ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि खेतों में पानी जमा होने से फसल सड़ने लगी है। दरअसल, लगभग 15 दिन पहले भी इलाके में मूसलाधार बारिश हुई थी, जिससे खेतों में भारी जलभराव हो गया था। उसके बाद से लगातार हो रही बारिश ने स्थिति को और ज्यादा बिगाड़ दिया है। खेतों से पानी की निकासी न होने के कारण फसल का एक बड़ा हिस्सा पानी में डूबे रहने से सड़ चुका है और अब इस स्थिति में फसल को संभालना पूरी तरह नामुमकिन हो गया है।
रामबाबू के अनुसार, उन्होंने इस बार अपने खेतों में धान की प्रसिद्ध 1509 वैरायटी लगाई थी। एक एकड़ खेत में धान की फसल तैयार करने में बीज, खाद, जुताई, कीटनाशक और सिंचाई मिलाकर लगभग 33,000 रुपये का भारी-भरकम खर्च आता है। इस भारी लागत के बावजूद उनकी करीब आधी फसल बर्बाद हो चुकी है और एक एकड़ की फसल पूरी तरह अनुपयोगी हो गई है। खेती में लगातार बढ़ रही इनपुट लागत और मौसम के बदलते अनिश्चित मिजाज ने किसानों के लिए जीवनयापन करना बेहद कठिन बना दिया है।


















