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लश्कर-ए-तैयबा के सीमा-पार नेटवर्क पर प्रहार, कश्मीर घाटी में एनआईए ने 7 स्थानों पर की छापेमारीजम्मू-कश्मीर
12 सित॰ 2026, 4:14 pm (10 दिन पहले)· 2

लश्कर-ए-तैयबा के सीमा-पार नेटवर्क पर प्रहार, कश्मीर घाटी में एनआईए ने 7 स्थानों पर की छापेमारी

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े सीमा-पार आतंकी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए घाटी के कुलगाम, बांदीपोरा और बारामूला जिलों में 7 रिहायशी परिसरों पर शनिवार को एक साथ तलाशी अभियान चलाया।

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों को और गति देते हुए नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने शनिवार को कश्मीर घाटी के अलग-अलग हिस्सों में 7 रिहायशी ठिकानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई सीमा-पार से संचालित होने वाली आतंकी साजिशों के खिलाफ चल रही एक प्रमुख जांच का हिस्सा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा मामला प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़ा हुआ है, जिसमें पाकिस्तान में मौजूद हैंडलर और घाटी में सक्रिय 'ओवर ग्राउंड वर्कर्स' (OGW) का एक स्थानीय नेटवर्क मिलकर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने का प्रयास कर रहा था।

घाटी के तीन प्रमुख जिलों में एक साथ दबिश

सुरक्षा बलों के साथ समन्वय बनाकर की गई इस कार्रवाई के तहत कुलगाम जिले में दो स्थानों, बांदीपोरा जिले में तीन ठिकानों और बारामूला जिले के सोपोर इलाके में दो रिहायशी परिसरों पर छापे मारे गए। एजेंसी ने यह पूरी प्रक्रिया स्थानीय पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कड़ी सुरक्षा के बीच पूरी की। तलाशी के दौरान संदिग्ध परिसरों की गहन जांच की गई और मामले से जुड़े संभावित साक्ष्यों की तलाश की गई। यह पूरी कार्रवाई एनआईए द्वारा दर्ज केस संख्या RC-02/2026/NIA/JMU के संबंध में की जा रही जांच के केंद्र में है।

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जकूरा नाका चेकिंग से मिला था मामले का सुराग

इस पूरे मामले की शुरुआती कड़ी 31 मार्च, 2026 को सामने आई थी। श्रीनगर शहर के बाहरी इलाके जकूरा के पास जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा देर रात चलाए जा रहे नाका चेकिंग अभियान के दौरान एक संदिग्ध मोटरसाइकिल सवार को रोका गया था। जब पुलिस बलों ने उसकी तलाशी ली, तो उसके पास से एक जीवित हैंड ग्रेनेड और कई जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे।

शुरुआती पूछताछ में पकड़े गए व्यक्ति की पहचान लश्कर-ए-तैयबा के एक ओजीडब्ल्यू के रूप में हुई थी। इसके बाद जकूरा पुलिस स्टेशन में एफआईआर संख्या 24/2026 दर्ज की गई थी। मामले की गंभीरता और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार से जुड़े तार को देखते हुए बाद में इस जांच को एनआईए ने अपने हाथों में ले लिया और इसे आरसी-02/2026/एनआईए/जेएमयू के रूप में नए सिरे से पंजीकृत किया।

कड़े कानूनी प्रावधानों के तहत दर्ज है केस

एजेंसी ने इस मामले में कठोर कानूनी धाराएं लागू की हैं। एफआईआर में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 की धारा 23 के अलावा शस्त्र अधिनियम, 1959 की धारा 7 और 25, तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की धारा 4 को शामिल किया गया है। अब तक की विस्तृत पड़ताल से स्पष्ट हुआ है कि सीमा पार बैठे पाकिस्तानी हैंडलर स्थानीय ओजीडब्ल्यू नेटवर्क को नियमित निर्देश भेज रहे थे।

इन स्थानीय मददगारों पर आरोप है कि वे सीमा पार से घुसपैठ करके आए आतंकवादियों को छिपने के ठिकाने, रसद सहायता, हथियारों की आवाजाही, रेकी करने में मदद और सुरक्षित संचार नेटवर्क उपलब्ध करा रहे थे। जांच के दौरान साजिश से जुड़े कुछ पाकिस्तानी नागरिकों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि स्थानीय नेटवर्क में शामिल अन्य संदिग्धों की भूमिका भी बेनकाब हो चुकी है।

आतंकी इकोसिस्टम को पूरी तरह खत्म करने की योजना

शनिवार को कश्मीर घाटी के कुलगाम, बांदीपोरा और बारामूला जिलों में एक साथ की गई इस व्यापक छापेमारी से स्पष्ट है कि जांच एजेंसी घाटी में बचे-खुचे आतंकी सहायता ढांचे को पूरी तरह से ध्वस्त करने की रणनीति पर काम कर रही है। इससे पूर्व भी आतंकी साजिश के इसी व्यापक नेटवर्क का पर्दाफाश करने के उद्देश्य से एनआईए ने जम्मू-कश्मीर के 10 अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापेमारी की थी। अधिकारियों का कहना है कि छानबीन अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और महत्वपूर्ण खुलासे होने की उम्मीद है।

सवाल-जवाब

एनआईए ने शनिवार को कश्मीर में किन जिलों में छापेमारी की?
एनआईए ने कुलगाम (2 स्थान), बांदीपोरा (3 स्थान) और बारामूला जिले के सोपोर (2 स्थान) में कुल 7 रिहायशी परिसरों पर छापेमारी की।
यह मामला किस आतंकी संगठन और घटना से जुड़ा हुआ है?
यह मामला लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े सीमा-पार नेटवर्क से संबंधित है, जिसकी शुरुआत 31 मार्च 2026 को जकूरा, श्रीनगर में एक ओजीडब्ल्यू से ग्रेनेड और कारतूस मिलने के बाद हुई थी।
एनआईए ने इस केस में किन प्रमुख कानूनों के तहत मामला दर्ज किया है?
एजेंसी ने यूएपीए की धारा 23, शस्त्र अधिनियम की धारा 7 व 25 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4 के तहत केस आरसी-02/2026/एनआईए/जेएमयू दर्ज किया है।
ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) की इस साजिश में क्या भूमिका पाई गई है?
जांच के अनुसार, ओजीडब्ल्यू सीमा पार से आए आतंकियों को लॉजिस्टिकल सपोर्ट, पनाह, रेकी, हथियार और संचार सहायता मुहैया करा रहे थे।
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