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महाराष्ट्र के वसई में अचानक ढहा पुल, ट्रक और कार फंसे, कई गांवों का रास्ता कटामहाराष्ट्र
19 जुल॰ 2026, 1:25 am (55 दिन पहले)· 1

महाराष्ट्र के वसई में अचानक ढहा पुल, ट्रक और कार फंसे, कई गांवों का रास्ता कटा

वसई पूर्व से वडघर गांव जाने वाला पुल शनिवार दोपहर अचानक ढह गया, जिसमें एक भारी वाहन और एक कार फंस गए। किसी की जान नहीं गई, लेकिन कई गांवों का मुख्य संपर्क मार्ग पूरी तरह बंद हो गया।

महाराष्ट्र के वसई पूर्व इलाके में शनिवार दोपहर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब वडघर गांव को जोड़ने वाला पुल अचानक भरभराकर गिर पड़ा। इलाके के कई गांवों के लिए यह पुल ही मुख्य आवागमन का रास्ता है और बिना किसी पूर्व संकेत के यह अचानक ढह गया। हादसे के वक्त उस पुल से गुजर रहे एक भारी वाहन और एक चार पहिया वाहन टूटे हुए हिस्से में फंस गए। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन पुल के ढहने से वडघर, कळभोण और लेंडी जैसे कई गांवों का मुख्य संपर्क मार्ग पूरी तरह ठप हो गया और लोगों को घर पहुंचने के लिए दूसरे रास्ते तलाशने पड़े।

कैसे हुआ हादसा

पुल के गिरने की यह घटना शनिवार दोपहर करीब 3 बजे हुई। जानकारी के मुताबिक, वसई पूर्व से वडघर गांव की ओर जाने वाला यह पुल अचानक भरभराकर टूट गया। उस वक्त पुल पर एक भारी वाहन और एक कार मौजूद थी, जो पुल के ढहते ही टूटे हुए हिस्से के बीच फंसकर अटक गईं। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। गनीमत रही कि इस पूरी घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, वरना पुल पर हर वक्त रहने वाली भीड़ को देखते हुए यह हादसा कहीं बड़ा भी हो सकता था। बहरहाल, पुल गिरने के कारण वडघर, कळभोण और लेंडी गांवों का वसई पूर्व से सीधा संपर्क पूरी तरह टूट गया।

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भारी वाहनों की आवाजाही से लगातार कमजोर हो रहा था पुल

यह पुल मेढे ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थित है और मेढे गांव को वडघर, कळभोण, लेंडी तथा आसपास के छोटे पाड़ों (बस्तियों) से जोड़ता है। इसी पुल के रास्ते से रोजाना स्थानीय ग्रामीणों के दोपहिया और चार पहिया वाहनों के साथ ही गौण खनिज खदानों से मिट्टी और मुरुम ढोने वाले भारी वाहन भी बड़ी संख्या में गुजरते हैं। गांव के लोगों का आरोप है कि बीते कुछ समय से क्षमता से कहीं ज्यादा गौण खनिज लादकर निकलने वाले इन भारी वाहनों की वजह से पुल की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। हर दिन गुजरने वाला यह भारी बोझ धीरे-धीरे पुल के ढांचे पर दबाव बढ़ाता गया, और आखिरकार शनिवार को यह दबाव पुल झेल नहीं पाया।

शिकायतों को अनसुना करने का आरोप

वसई पूर्व के निवासियों का कहना है कि पुल कमजोर होने की जानकारी उन्हें पहले से थी और इस बारे में प्रशासन से कई बार शिकायत भी की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की इसी अनदेखी और भारी वाहनों के लगातार दबाव के चलते आखिरकार पुल ढह गया। वडघर के स्थानीय निवासी नंदकुमार पाटील ने कहा, "इस मार्ग पर रोजाना भारी वाहनों की आवाजाही होती है, जिसके कारण यह पुल गिर गया।" उन्होंने आगे बताया कि पुल टूटने से गांव के लोगों के आने-जाने का मुख्य रास्ता अब पूरी तरह बंद हो चुका है और उन्हें अब गणेशपुरी मार्ग से करीब 20 किलोमीटर का अतिरिक्त फासला तय करके अपने घर पहुंचना पड़ रहा है।

गांवों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर

पुल गिरने के बाद वडघर, कळभोण और लेंडी गांवों के निवासियों के लिए रोजमर्रा का आना-जाना बड़ी चुनौती बन गया है। स्कूल जाने वाले बच्चों, अस्पताल जाने वाले मरीजों और रोजाना काम पर निकलने वाले लोगों को अब लंबा चक्कर काटकर गणेशपुरी मार्ग से गुजरना पड़ रहा है, जिससे उनका रोजाना का सफर करीब 20 किलोमीटर तक बढ़ गया है। इससे न सिर्फ समय ज्यादा लगेगा, बल्कि आने-जाने का खर्च भी बढ़ेगा। स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन जल्द से जल्द कोई वैकल्पिक व्यवस्था करे और पुल की मरम्मत या पुनर्निर्माण का काम तेजी से शुरू करे, ताकि गांवों का संपर्क जल्द से जल्द बहाल हो सके।

सवाल-जवाब

वसई में पुल कब गिरा?
यह पुल शनिवार दोपहर करीब 3 बजे अचानक ढह गया।
हादसे में किसी की जान गई?
नहीं, इस हादसे में किसी की जान नहीं गई, हालांकि एक भारी वाहन और एक कार पुल के टूटे हिस्से में फंस गए।
पुल गिरने से कौन-कौन से गांव प्रभावित हुए?
वडघर, कळभोण और लेंडी गांवों का वसई पूर्व से सीधा संपर्क टूट गया।
पुल गिरने की वजह क्या बताई जा रही है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षमता से ज्यादा गौण खनिज लादकर गुजरने वाले भारी वाहनों के लगातार दबाव से पुल कमजोर होकर गिर गया।
अब गांव वालों को घर पहुंचने के लिए क्या करना पड़ रहा है?
उन्हें गणेशपुरी मार्ग से करीब 20 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करके अपने घर पहुंचना पड़ रहा है।
क्या प्रशासन को पहले से पुल की हालत की जानकारी थी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पुल कमजोर होने की शिकायत प्रशासन से कई बार की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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