शीर्ष अदालत ने विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा निकाले गए पैदल मार्च के दौरान एक महिला पत्रकार के साथ कथित धक्का-मुक्की और अदालत की अवमानना से जुड़ी याचिकाओं पर कड़ा संज्ञान लिया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है। अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े कानूनी पहलुओं और दायर याचिकाओं पर विचार करते हुए संबंधित पक्षों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।
मार्च के दौरान हंगामा और नारेबाजी का पूरा घटनाक्रम
विपक्षी गठबंधन इंडिया (INDIA) से जुड़े नेताओं ने 12 अक्टूबर को 'वोट चोरी' के गंभीर आरोपों को लेकर एक विरोध मार्च निकाला था। इस मार्च में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और अखिलेश यादव सहित कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियां शामिल हुई थीं और वे पैदल मार्च करते हुए सीधे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे थे। इसी दौरान कवरेज कर रही एक महिला पत्रकार के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की की अप्रिय घटना सामने आई, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।
अवमानना याचिकाओं पर 23 नवंबर को अगली सुनवाई
मार्च के दौरान परिसर के समीप कथित हंगामे, नारेबाजी और पत्रकार से दुर्व्यवहार को लेकर अदालत में अवमानना की कार्रवाई की मांग वाली अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई थीं। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान मर्यादाओं का उल्लंघन हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को औपचारिक नोटिस जारी करने के बाद स्पष्ट किया है कि इस पूरे मामले पर अगली विस्तृत सुनवाई 23 नवंबर को की जाएगी, जिसमें सभी पक्षों के जवाबों की समीक्षा होगी।

















