बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसमी हलचल ने इस बार शुरुआती सर्दी के मिजाज को पूरी तरह बदल दिया है। सामान्य तौर पर नवंबर की शुरुआत में जब हल्की ठंड पैर पसारने लगती है, उस समय पश्चिम बंगाल के ज्यादातर शहरों में पारा ऊपर चढ़ा हुआ है और लोग पसीने छुड़ाने वाली नमी से परेशान हैं। आंध्र प्रदेश के तटवर्ती इलाके में पहुंचे चक्रवाती तूफान मुरासु के दूरगामी प्रभाव ने बंगाल के वायुमंडल में भारी मात्रा में नमी धकेल दी है, जिसकी वजह से पारे की सामान्य गिरावट रुक गई है।
तटीय राज्यों में भीषण बारिश का संकट
इस मौसमी तंत्र का केंद्र भले ही आंध्र प्रदेश के समुद्री इलाके पर केंद्रित रहा हो, लेकिन इसने प्रायद्वीपीय भारत के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया है। पड़ोसी तटीय राज्यों ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में मूसलाधार वर्षा को लेकर हाई अलर्ट बना हुआ है, जहां कई संवेदनशील इलाकों के लिए रेड अलर्ट भी प्रभावी किया गया है। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल पर इसका कोई सीधा प्रहार नहीं होने जा रहा है, लेकिन इसके बाहरी बादलों का घेरा पूरे राज्य के मौसम चक्र को प्रभावित कर रहा है। मंगलवार के दौरान राज्य भर में बादलों की आवाजाही जारी रहने और छिटपुट बौछारें पड़ने की स्थितियां बनी हुई हैं।
उत्तर और दक्षिण बंगाल के जिलों का हाल
राज्य के भौगोलिक क्षेत्रों पर नजर डालें तो उत्तर बंगाल के पहाड़ी और तराई वाले जिलों में मिला-जुला असर दिख रहा है। दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार और कूचबिहार में कहीं-कहीं बूंदाबांदी या हल्की फुहारें गिर सकती हैं। इसके विपरीत, उत्तर बंगाल के अन्य तीन जिलों में मौसम पूरी तरह सूखा बने रहने की उम्मीद है।
दक्षिण बंगाल के मैदानी इलाकों में स्थानीय स्तर पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की स्थिति देखी जा रही है। विशेषकर कोलकाता, हावड़ा, हुगली, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, पूर्वी मेदिनीपुर, पश्चिमी मेदिनीपुर, झाड़ग्राम, पुरुलिया और बांकुड़ा में बिजली कड़कने और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। दक्षिण के शेष इलाकों में हालात ज्यादातर शुष्क ही रहेंगे। बुधवार पांच नवंबर से शनिवार के बीच समूचे राज्य में बारिश की गतिविधियों में तेजी से कमी दर्ज की जाएगी और वातावरण सूखने लगेगा।
कोलकाता में पारे और आर्द्रता के आंकड़े
महानगर में पिछले चौबीस घंटों के दौरान मौसम का मिजाज खासा असहज करने वाला दर्ज किया गया। शहर का अधिकतम तापमान 31.04 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य स्तर 31 डिग्री सेल्सियस से थोड़ा अधिक रहा। वहीं रात का न्यूनतम तापमान 25.02 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा, जो सामान्य के मुकाबले 2.03 डिग्री ज्यादा था। हवा में नमी का पैमाना 67 से 95 प्रतिशत के बीच बना रहा। इतनी अधिक आर्द्रता और बादलों के अवरोध की वजह से रात के समय भी उमस का भारी दबाव महसूस किया जा रहा है।
काली पूजा तक ठंड की वास्तविक शुरुआत की आस
मौसम के जानकारों के अनुसार जैसे ही चक्रवात के बादल छंटेंगे, वायुमंडल की नमी समाप्त होने लगेगी। बुधवार पांच नवंबर से आसमान साफ होते ही रात के पारे में लगातार गिरावट देखने को मिलेगी। यह क्रमिक बदलाव आठ नवंबर को होने वाली काली पूजा के उत्सव से ठीक पहले वातावरण में गुलाबी ठंडक का अहसास कराने लगेगा। ठंड की यह चाल पूरी तरह से इस बात पर टिकेगी कि अगले कुछ दिनों में बादलों का आवरण कितनी तेजी से खत्म होता है और ठंडी हवाओं का रास्ता साफ होता है।


















