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मालाखेड़ा बायपास पर 150 मीटर में रुकी सड़क, प्रशासन से पुलिस बल की गुहारराजस्थान
19 सित॰ 2026, 10:27 am (6 दिन पहले)· 0

मालाखेड़ा बायपास पर 150 मीटर में रुकी सड़क, प्रशासन से पुलिस बल की गुहार

अलवर के मालाखेड़ा में करीब डेढ़ करोड़ रुपये का मुआवजा लेने के बावजूद रिहायशी ढांचा न हटाए जाने से स्टेट हाईवे 44 का काम अटक गया है, जिससे क्षेत्र में लगातार जाम की समस्या बन रही है।

राजस्थान के अलवर जिले में मालाखेड़ा बायपास मार्ग पर सड़क निर्माण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नटनी का बारा, मालाखेड़ा और मौजपुर को जोड़ने वाले स्टेट हाईवे 44 (SH-44) के निर्माण कार्य में एक रिहायशी ढांचे के कारण भारी अड़चन आ रही है। संबंधित सरकारी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित पक्ष को करीब डेढ़ करोड़ रुपये की मुआवजा राशि का भुगतान पहले ही किया जा चुका है, इसके बावजूद संबंधित मकान को खाली नहीं किया जा रहा है। जब भी कार्यदायी संस्था निर्माण कार्य शुरू करने के लिए मशीनरी लेकर पहुंचती है, तो परिवार के सदस्य मौके पर आकर काम रुकवा देते हैं।

प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने एसडीएम को लिखा पत्र

इस पूरे गतिरोध को सुलझाने के लिए राजस्थान स्टेट हाईवे पीआईयू जयपुर के प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवेंद्र कुमार सिंघल ने मालाखेड़ा के उपखंड अधिकारी (एसडीएम) को औपचारिक पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने निर्माण कार्य में लगातार आ रहे व्यवधान का हवाला देते हुए स्थानीय प्रशासन से मदद मांगी है। परियोजना निदेशक ने मांग की है कि राजकीय कार्य को शांतिपूर्ण और सुचारू रूप से चलाने के लिए मौके पर पर्याप्त पुलिस बल (पुलिस जाब्ता) तैनात किया जाए और काम रोकने वाले लोगों को कानूनी रूप से पाबंद किया जाए।

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150 मीटर के हिस्से में रुका काम और खसरा विवरण

परियोजना से जुड़े सहायक अभियंता ईश्वर सिंह ने बताया कि सड़क संरेखण के दायरे में आ रहे इस मकान के एवज में लक्ष्मण सिंह मीणा को लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसके बाद भी कब्जा न छोड़ने के कारण बायपास का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। विभागीय पत्राचार के अनुसार, यह अवरोध मालाखेड़ा बायपास के खसरा नंबर 5283/313, 5286/314 और 5289/315 के बीच स्थित है। यहां प्रोजेक्ट किलोमीटर 10+650 से लेकर 10+800 तक यानी कुल 150 मीटर लंबे हिस्से में सड़क का निर्माण पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है।

काम रुकवाने का आरोप और बंद फाटक से बढ़ता दबाव

विभाग ने लक्ष्मण सिंह मीणा, गजेंद्र मीणा, विजेंद्र मीणा और उनके परिवार के अन्य सदस्यों पर निर्माण स्थल पर पहुंचकर व्यवधान डालने का आरोप लगाया है। अधिकारियों का कहना है कि काम शुरू होते ही परिवार की महिलाएं और अन्य लोग सामने आ जाते हैं, जिससे काम बंद करना पड़ता है। हालांकि, इस पूरे मामले में संबंधित परिवार का पक्ष सामने नहीं आ पाया है। सड़क का यह 150 मीटर का टुकड़ा अधूरा रहने से आसपास के संपूर्ण यातायात तंत्र पर गंभीर असर पड़ रहा है।

रेलवे फाटक एलसी-128 और आरओबी अधूरा होने से जाम

मालाखेड़ा बायपास और SH-44 पर काम अटकने का सीधा नुकसान आम यात्रियों और वाहन चालकों को झेलना पड़ रहा है। इलाके में रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) का निर्माण अभी पूरा नहीं हो सका है। दूसरी ओर, रेलवे क्रॉसिंग यानी रेलवे फाटक LC-128 के बार-बार बंद होने से मुख्य रास्ते पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। दिनभर जाम के हालात बने रहने से वाहन चालकों को काफी देर तक फंसे रहना पड़ता है। लोक निर्माण विभाग (PWD) का कहना है कि यदि प्रशासन की ओर से पुलिस सुरक्षा मिल जाए और बाधा हटाई जाए, तो इस अटके हुए काम को तेजी से पूरा कर आमजन को राहत दी जा सकती है।

सवाल-जवाब

अलवर के मालाखेड़ा में स्टेट हाईवे 44 का काम क्यों अटका हुआ है?
सड़क संरेखण के दायरे में आ रहे एक मकान को करीब डेढ़ करोड़ रुपये का मुआवजा मिलने के बाद भी खाली नहीं किया गया है, जिससे निर्माण रुक गया है।
सड़क का कितना हिस्सा इस विवाद के कारण प्रभावित है?
परियोजना किलोमीटर 10+650 से 10+800 तक यानी लगभग 150 मीटर के हिस्से में निर्माण कार्य ठप पड़ा हुआ है।
यह विवाद किन खसरा नंबरों की भूमि से संबंधित है?
यह अवरोध मालाखेड़ा बायपास में खसरा नंबर 5283/313, 5286/314 और 5289/315 के बीच स्थित है।
परियोजना निदेशक ने प्रशासन से क्या मांग की है?
परियोजना निदेशक देवेंद्र कुमार सिंघल ने मालाखेड़ा एसडीएम को पत्र लिखकर पुलिस जाब्ता उपलब्ध कराने और बाधा डालने वाले लोगों को पाबंद करने की मांग की है।
इस रुकावट के चलते आम यात्रियों को क्या परेशानी हो रही है?
क्षेत्र में आरओबी अधूरा होने और रेलवे फाटक LC-128 बंद रहने से वाहनों का दबाव बढ़ रहा है, जिससे रोज लंबा ट्रैफिक जाम लग रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Michael Anderson@michael-anderson·5 दिन पहले

यह मामला बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण और मुआवजे के बाद भी कब्ज़ा न मिलने की पुरानी प्रशासनिक चुनौती को उजागर करता है। जब सरकारी धन के भुगतान के बावजूद 150 मीटर के छोटे से टुकड़े पर काम रुकता है, तो यह न केवल परियोजना की लागत बढ़ाता है बल्कि सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग में देरी का कारण भी बनता है। यदि प्रशासन पुलिस बल के प्रयोग और कानूनी कार्रवाई से इस गतिरोध को तुरंत नहीं सुलझाता, तो क्षेत्रीय यातायात और असमाप्त रेलवे ओवरब्रिज के कारण नागरिकों की परेशानियां और अधिक बढ़ जाएंगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

यह मामला केवल एक भूमि विवाद नहीं, बल्कि नीतिगत और प्रशासनिक इच्छाशक्ति का गंभीर परीक्षण है। जब मुआवजे का भारी भुगतान हो चुका हो, तब भी 150 मीटर के टुकड़े पर काम रुकना शासन प्रणाली की कमजोरी को दर्शाता है। यदि स्थानीय प्रशासन ने वैधानिक कठोरता नहीं बरती, तो यह परियोजना जनहित में विलंब का शिकार हो जाएगी और बुनियादी ढांचे की लागत अनियोजित रूप से बढ़ जाएगी।

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

सहकर्मी की इस बात को आगे बढ़ाते हुए, यह वित्तीय प्रबंधन और परियोजना अर्थशास्त्र का भी गंभीर मामला है। जब 150 मीटर के इस छोटे से हिस्से पर पूंजी अटक जाती है, तो कैपेक्स चक्र बाधित होता है और समय लागत (टाइम ओवररन) बढ़ने से पूरे प्रोजेक्ट का रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट नकारात्मक रूप से प्रभावित होता है। बुनियादी ढांचे के विकास में इस तरह की प्रशासनिक अकुशलता निवेशकों का मनोबल गिराती है और सार्वजनिक धन के अनुकूलतम उपयोग पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।

Rohan Verma@rohan-verma·5 दिन पहले

यह प्रशासनिक सुस्ती और मुआवजे के बाद भी कब्जा न छोड़ने की प्रवृत्ति का गंभीर मामला है। मात्र 150 मीटर के टुकड़े पर काम रुकने से राज्य मार्ग की उपयोगिता पर सवाल उठते हैं। यदि जिला प्रशासन ने समय रहते कड़ा रुख अपनाकर पुलिस बल की तैनाती और कानूनी कार्रवाई नहीं की, तो परियोजना की लागत बढ़ने के साथ जनहित का यह संकट और गहराएगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

यह वैधानिक और प्रशासनिक अमले की कमजोरी को उजागर करता है। जब भुगतान हो चुका है, तो सरकारी कार्य में बाधा डालने वालों पर भारतीय न्याय संहिता के तहत शासकीय कार्य में बाधा और लोक संपत्ति को प्रभावित करने की धाराओं में त्वरित मुकदमा दर्ज होना चाहिए। यदि पुलिस जाब्ता तैनात कर बलपूर्वक अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो यह विलंब वित्तीय घाटे के साथ जनता के लिए बड़ी मुसीबत बन जाएगा।

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