पीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालतुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यानशी जिनपिंग के स्वागत में व्हाइट हाउस का शाही मेन्यू, फ्रेंच स्वाद के साथ परोसे गए खास व्यंजनराजस्थान के तीन बड़े शहरों में महापौर चुनने की जंग, जयपुर में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामनेकश्मीरी गेट के पास ई-रिक्शा रोककर लूटपाट, चाकू के वार से युवक की जान गई और दो जख्मीछत और बालकनी पर सब्जियां उगाते समय न करें केमिकल का छिड़काव, पूसा विशेषज्ञ ने सुझाए जैविक खाद के आसान उपायवृश्चिक राशिफल 25 सितंबर 2026: 12वें भाव में शुक्र जगाएगा सुख-सुविधाओं की चाहत, बजट और सेहत का रखें ध्यानपंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि, अंत्योदय और एकात्म मानववाद के विचार को किया यादजीनियस एक्ट के तहत स्टेबलकॉइन के सख्त नियमों पर फेडरल रिजर्व ने मांगी जनता से रायदैनिक राशिफल 25 सितंबर 2026: कुंभ में चंद्रमा और राहु की युति से ग्रहण योग, जानें सभी 12 राशियों का हाल
मानसून में घना नेशनल पार्क में गूंजी दुर्लभ पक्षी की आवाज, दिखने से ज्यादा सुनने में मिलता है सुरागराजस्थान
6 सित॰ 2026, 7:06 am (19 दिन पहले)· 1

मानसून में घना नेशनल पार्क में गूंजी दुर्लभ पक्षी की आवाज, दिखने से ज्यादा सुनने में मिलता है सुराग

भरतपुर के केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान में मानसून के साथ दुर्लभ ब्रिस्टल्ड ग्रासबर्ड फिर सक्रिय हो गया है, जिसकी मौजूदगी आंखों से कम, कानों से ज्यादा पकड़ में आ रही है.

राजस्थान के भरतपुर स्थित केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान में इन दिनों बर्ड वॉचर्स के कान ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गए हैं. यहां घास के मैदानों में दुर्लभ और बेहद शर्मीला पक्षी ब्रिस्टल्ड ग्रासबर्ड मानसून के साथ फिर सक्रिय हो गया है, लेकिन इसे कैमरे में उतारना तो दूर, आंखों से देख पाना भी किसी चुनौती से कम नहीं है.

आवाज है पहचान, शक्ल है राज

ब्रिस्टल्ड ग्रासबर्ड की खासियत यही है कि यह जितनी आसानी से सुनाई देता है, उतनी ही मुश्किल से दिखाई देता है. घनी और ऊंची घास के बीच रहने वाला यह पक्षी इंसानी आहट भांपते ही झट से छिप जाता है. यही वजह है कि केवलादेव पहुंचने वाले सैलानी और पक्षी प्रेमी अक्सर इसकी मीठी और तेज पुकार तो सुन लेते हैं, मगर पक्षी उनकी नजरों से ओझल ही रहता है.

ये भी पढ़ें

बारिश ने बिछाई पक्षियों के लिए हरी चादर

दरअसल मानसून की बारिश के बाद केवलादेव घना में हरियाली अपने पूरे शबाब पर आ जाती है. कांस और घास के मैदान घने हो जाते हैं, जिससे पक्षियों को छिपने और भोजन तलाशने के लिए मुफीद माहौल मिलता है. इसी अनुकूल वातावरण के चलते ब्रिस्टल्ड ग्रासबर्ड जैसे शर्मीले पक्षी भी बाहर निकलकर सक्रिय हो जाते हैं और अपनी मौजूदगी आवाज के जरिए दर्ज कराने लगते हैं. मौसम बदलते ही उद्यान में पक्षियों की चहल-पहल और उनकी आदतों में भी फर्क साफ नजर आने लगता है.

फोटोग्राफरों के लिए घंटों का सब्र

घना के अलग-अलग घास वाले हिस्सों में गूंज रही इस आवाज ने बर्ड वॉचर्स की उत्सुकता बढ़ा दी है. अनुभवी पक्षी प्रेमी सिर्फ आवाज सुनकर ही दूर से बता देते हैं कि ब्रिस्टल्ड ग्रासबर्ड आसपास मौजूद है. कई बर्ड फोटोग्राफर इसकी एक झलक कैद करने के लिए घास के मैदानों में घंटों टकटकी लगाए बैठे रहते हैं. लेकिन जरा सी हलचल या आहट होते ही यह पक्षी दोबारा घास में गुम हो जाता है, इसलिए इसे देखने का इकलौता तरीका है, पूरी तरह खामोश और धैर्यवान बने रहना.

सैकड़ों प्रजातियों का घर है केवलादेव

केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान को दुनियाभर में उसकी जैव विविधता के लिए जाना जाता है, जहां सैकड़ों प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं. हर मौसम के साथ यहां पक्षियों की गतिविधियों और उनकी संख्या में बदलाव देखने को मिलता है. मानसून के महीनों में घास के मैदान कई स्थानीय और दुर्लभ पक्षियों के लिए अस्थायी लेकिन बेहद जरूरी ठिकाना बन जाते हैं, और ब्रिस्टल्ड ग्रासबर्ड इसी मौसमी बदलाव का सबसे दिलचस्प उदाहरण है.

घना घूमने जाएं तो कान भी रखें खुले

अगर आप मानसून के मौसम में केवलादेव घना घूमने की योजना बना रहे हैं तो सिर्फ आंखों से पक्षी तलाशने के बजाय अपने कानों पर भी भरोसा कीजिए. हो सकता है घनी घास में छिपा यह दुर्लभ पक्षी दिखे न दिखे, लेकिन उसकी सुरीली आवाज आपको उसकी मौजूदगी का पक्का संकेत जरूर दे जाए.

सवाल-जवाब

ब्रिस्टल्ड ग्रासबर्ड कहां देखा जा सकता है?
राजस्थान के भरतपुर स्थित केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान की घास वाली जगहों में इसकी आवाज सुनी जा रही है.
यह पक्षी बार-बार क्यों नजर नहीं आता?
यह बेहद शर्मीला पक्षी है और इंसानी हलचल महसूस होते ही घनी घास में छिप जाता है.
मानसून में इसकी सक्रियता क्यों बढ़ जाती है?
बारिश के बाद घना में घास और कांस घने हो जाते हैं, जिससे इसे छिपने और भोजन के लिए अनुकूल माहौल मिलता है.
बर्ड फोटोग्राफर इसे कैद करने के लिए क्या करते हैं?
वे घास के मैदानों में घंटों खामोश बैठकर इसकी एक झलक कैद करने का इंतजार करते हैं.
केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान किसलिए मशहूर है?
यह अपनी जैव विविधता और सैकड़ों प्रजातियों के पक्षियों के लिए दुनियाभर में जाना जाता है.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·18 दिन पहले

केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान में ब्रिस्टल्ड ग्रासबर्ड का मानसून के साथ लौटना केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि यहाँ के जैव-विविधता आधारित पर्यटन (इको-टूरिज्म) के लिए एक आर्थिक उत्प्रेरक है। इस तरह के दुर्लभ वन्यजीव संरक्षण और इको-सिस्टम की स्थिरता से न केवल स्थानीय हॉस्पिटैलिटी और गाइड व्यवसाय को मजबूती मिलती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करने की भारत की क्षमता भी बढ़ती है, जिसका सीधा असर क्षेत्रीय आर्थिकी पर पड़ता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·18 दिन पहले

यह खबर स्पष्ट करती है कि केवलादेव जैसे स्थल किस तरह मौसमी बदलावों से संचालित जैव-विविधता के केंद्र हैं। ब्रिस्टल्ड ग्रासबर्ड जैसे शर्मीले और दुर्लभ पक्षियों की मौजूदगी यह साबित करती है कि यहाँ का पारिस्थितिकी तंत्र अपनी प्राकृतिक लय में सुचारू रूप से कार्य कर रहा है। पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव संरक्षण की यह निरंतरता न केवल प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि नीतिगत स्तर पर संरक्षित प्राकृतिक आवास कितने महत्वपूर्ण हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·18 दिन पहले

केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान में मानसून के दौरान ब्रिस्टल्ड ग्रासबर्ड की सक्रियता यह दर्शाती है कि यहाँ का पारिस्थितिकी तंत्र मौसम के बदलावों के प्रति कितना संवेदनशील और समृद्ध है। घनी घास और कांस के मैदानों का यह मौसमी विस्तार न केवल दुर्लभ प्रजातियों को सुरक्षित आश्रय देता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि संरक्षण रणनीतियों में स्थानीय वनस्पति और मानसून के जलचक्र का संतुलन बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि पर्यावरण में होने वाले सूक्ष्म बदलाव इस शर्मीले पक्षी की गतिविधियों को कैसे प्रभावित करते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·18 दिन पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह ध्यान देना आवश्यक है कि इस तरह के संवेदनशील और दुर्लभ पक्षियों की उपस्थिति पार्क के भीतर पर्यावरण निगरानी को और मजबूत करने का संकेत देती है। घनी घास और मानसून के जलचक्र पर निर्भर इन प्रजातियों की सुरक्षा यह सुनिश्चित करती है कि स्थानीय जैव विविधता और संरक्षण के प्रयासों को सही दिशा में आगे बढ़ाया जाए, जिससे भविष्य में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp