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मणिपुर के कामजोंग में घात लगाकर हमला, कुकी महिला की मौत और दो नागरिक लापतामणिपुर
15 अक्तू॰ 2026, 11:22 pm (12 दिन पहले)· 3

मणिपुर के कामजोंग में घात लगाकर हमला, कुकी महिला की मौत और दो नागरिक लापता

मणिपुर के कामजोंग जिले में जरूरी सामान खरीदने जा रहे नागरिकों पर घात लगाकर किए गए हमले में एक कुकी महिला की जान चली गई, जबकि दो अन्य लापता हैं।

मणिपुर के कामजोंग जिले में गुरुवार को घात लगाकर किए गए एक सशस्त्र हमले में कुकी समुदाय की एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके साथ यात्रा कर रहे दो अन्य नागरिक लापता हो गए हैं। यह गंभीर घटना उस समय सामने आई है जब राज्य के विभिन्न हिस्सों में कुकी और नगा समूहों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।

दुपहिया वाहनों पर सवार नागरिकों को बनाया गया निशाना

कुकी इनपि मणिपुर ने एक प्रेस बयान जारी कर इस घटना की जानकारी दी है। संगठन के अनुसार, चार नागरिक दो दुपहिया वाहनों पर सवार होकर जरूरी घरेलू सामान खरीदने के लिए कामजोंग के फाइकोह जा रहे थे। शाम 4 बजे से 5 बजे के बीच फाइकोह और ऐशू के बीच स्थित सड़क पर उग्रवादियों ने इन राहगीरों पर अचानक घात लगाकर हमला कर दिया।

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हमले में जान गंवाने वाली महिला की पहचान जांगखोंगम हाओकिप की पत्नी हतनेइकिम हाओकिप के रूप में हुई है, जिनकी गोली लगने से घटनास्थल पर ही मौत हो गई। उनके पति जांगखोंगम हाओकिप भी गोलियों की चपेट में आकर घायल हो गए, लेकिन वे किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से निकलने में सफल रहे।

दंपती का अब तक कोई सुराग नहीं

इस हमले के बाद दो अन्य यात्रियों का अब तक कुछ पता नहीं चल सका है। लापता नागरिकों की पहचान चासाद गांव के निवासी डी. पाओखोथांग हाओकिप और उनकी पत्नी बोईशी हाओकिप के रूप में की गई है। कुकी इनपि मणिपुर के अनुसार, इस हमले के पीछे की पूरी परिस्थितियों और लापता दंपती की मौजूदा स्थिति को लेकर स्थिति तुरंत स्पष्ट नहीं हो सकी है।

कुकी इनपि मणिपुर ने आम नागरिकों पर हुए इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। संगठन ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार से मांग की है कि वे आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कड़े कदम उठाएं और इस वारदात के लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के कटघरे में खड़ा करें।

इलाके में पहले से बना हुआ है भारी तनाव

यह हमला मणिपुर के चुनिंदा इलाकों में कुकी और नगा समुदायों के बीच चल रही तनातनी के बीच हुआ है। इसी हफ्ते राज्य के अलग-अलग इलाकों में हुई हिंसा में कम से कम नौ लोगों की जान चली गई थी, जिससे संवेदनशील स्थिति और अधिक बिगड़ गई थी।

यह हालिया तनाव 9 और 10 अक्टूबर को 24 घंटों के भीतर कामजोंग, कांगपोकपी और उखरुल जिलों में भड़की नई हिंसा के दौरान देखने को मिला था। उस दौरान नागरिकों और ग्राम रक्षकों पर हमले, गोलीबारी और आगजनी की घटनाएं दर्ज की गई थीं, जिसने दोनों समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव को गहरा कर दिया था।

सवाल-जवाब

कामजोंग में हमला कब और कहां हुआ?
यह हमला गुरुवार को शाम 4 बजे से 5 बजे के बीच कामजोंग जिले में फाइकोह और ऐशू के बीच सड़क पर हुआ।
हमले में किस व्यक्ति की जान गई?
इस हमले में हतनेइकिम हाओकिप नाम की महिला की मौके पर ही मौत हो गई।
हमले में कौन घायल हुआ और कौन लापता है?
मृतक महिला के पति जांगखोंगम हाओकिप गोली लगने से घायल हुए, जबकि चासाद गांव के डी. पाओखोथांग हाओकिप और उनकी पत्नी बोईशी हाओकिप लापता हैं।
नागरिक किस उद्देश्य से यात्रा कर रहे थे?
वे दो दुपहिया वाहनों पर सवार होकर जरूरी घरेलू सामान खरीदने के लिए फाइकोह जा रहे थे।
कुकी इनपि मणिपुर ने क्या मांग रखी है?
संगठन ने केंद्र और राज्य सरकार से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और हमलावरों को तत्काल न्याय के कटघरे में लाने की अपील की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sophie Laurent@sophie-laurent·11 दिन पहले

जब मैं कुछ साल पहले पूर्वोत्तर की यात्रा पर थी, तो स्थानीय लोगों के साथ ऐसे ही सफर में अचानक सुरक्षा जांच और तनाव का जो माहौल देखा था, वह आज भी सिहरन पैदा कर देता है। अपनों को इस तरह खोना बहुत डरावना है।

Ravikash Gupta@ravikash·11 दिन पहले

मणिपुर में हालात सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। जब आम लोग बाजार जाने के लिए भी सुरक्षित नहीं हैं, तो सरकार और सुरक्षा बल आखिर क्या कर रहे हैं? क्या शांति बहाली के लिए अब तक उठाए गए सारे कदम सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं?

Ananya Iyer@ananya-iyer·11 दिन पहले

रविकेश, आपकी बात सही है, लेकिन क्या सरकार को इस हिंसा रोकने के लिए कोई नया रास्ता नहीं सूझ रहा?

Rohan Verma@rohan-verma·11 दिन पहले

दंपती के भागने और बाकी दो के लापता होने वाली बात थोड़ी उलझन में डाल रही है, असल में वहां हालात क्या रहे होंगे समझना मुश्किल है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·11 दिन पहले

रोहन भाई, जब मैं खुद उस इलाके में गया था, तब भी सड़कों पर ऐसा ही डर दिखता था।

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