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मणिपुर के कांगपोकपी में उग्रवादियों का हमला, दो घर फूंके और सुरक्षाबलों से मुठभेड़मणिपुर
16 सित॰ 2026, 11:24 am (41 दिन पहले)· 2

मणिपुर के कांगपोकपी में उग्रवादियों का हमला, दो घर फूंके और सुरक्षाबलों से मुठभेड़

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में संदिग्ध उग्रवादियों ने एक पहाड़ी गांव पर हमला कर दो मकानों को आग के हवाले कर दिया। इस घटना से ठीक पहले तामेंगलोंड जिले में दो महिलाओं की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

मणिपुर के कांगपोकपी जिले के एक पहाड़ी गांव में मंगलवार देर रात संदिग्ध उग्रवादियों ने हमला बोल दिया। इस दौरान हमलावरों ने दो घरों को आग के हवाले कर दिया और सुरक्षाकर्मियों के साथ उनकी भारी गोलीबारी हुई। अधिकारियों ने बुधवार को इस घटना की पूरी जानकारी दी है।

अत्याधुनिक हथियारों से लैस थे हमलावर

एक अधिकारी के मुताबिक, अत्याधुनिक हथियारों से लैस हमलावरों ने रात करीब 10.30 बजे चावांगकिमिंग नागा गांव को अपने निशाने पर लिया। यह गंभीर घटना ठीक उस समय के कुछ घंटे बाद घटी जब पड़ोसी तामेंगलोंड जिले के लेइसंगफाइ इलाके में दो कुकी महिलाओं की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस दोहरे हमलों ने इलाके में तनाव को और बढ़ा दिया है।

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सुरक्षाबलों और उग्रवादियों के बीच लंबी मुठभेड़

आसपास के इलाके में तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की और संदिग्ध उग्रवादियों के साथ मोर्चा लिया। अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच रुक-रुक कर लगभग छह घंटे तक गोलीबारी का यह दौर जारी रहा, जो बुधवार सुबह करीब 4.30 बजे जाकर थमा। सुरक्षाबलों की मुस्तैदी के कारण हमलावर गांव के भीतर प्रवेश नहीं कर सके, हालांकि गांव की सीमा पर बने दो लकड़ी के मकान जलकर राख हो गए।

नेताओं और जनप्रतिनिधियों की कड़ी निंदा

नागा पीपुल्स फ्रंट के वरिष्ठ नेता अवांगबो न्यूमाई ने दोनों महिलाओं की हत्या और चावांगकिमिंग गांव में हुई आगजनी की घटना की कड़ी शब्दों में निंदा की है। बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान में उन्होंने कहा कि इस तरह के बर्बर और संवेदनहीन कृत्यों से किसी भी समुदाय का कोई भला नहीं होने वाला है। इसके अलावा, कांगपोकपी जिले के साइकुल निर्वाचन क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले एक कुकी विधायक ने भी इन हत्याओं की खुलकर भर्त्सना की और बताया कि मारी गई दोनों पीड़ितों में से एक ने अभी हाल ही में अपनी नर्सिंग की पढ़ाई पूरी की थी।

तामेंगलोंड में महिलाओं पर हुआ था जानलेवा हमला

विधायक ने आरोप लगाया कि इन हत्याओं के पीछे एनएससीएन-आईएम और जेडूएफ-के के काडर शामिल थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन दोनों महिलाओं की मौत को किसी भी राजनीतिक कारण, विचारधारा या शिकायत के आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता है। ये महिलाएं लेइसंगफाइ के भीतरी इलाके में बने एक सूने खेत से सूखी लकड़ियां इकट्ठा करने गई थीं, तभी उन पर यह अचानक हमला हुआ।

पीड़ितों की हुई पहचान और लापता लोगों की तलाश

अधिकारियों के अनुसार, मारे गए लोगों की पहचान 60 वर्षीय चोंगा सितलहो और 30 वर्षीय किम्बोई सिंगसन के रूप में हुई है। वहीं दूसरी ओर, स्थानीय लोगों ने यह दावा भी किया है कि इस खौफनाक घटना के बाद से गांव के कई अन्य लोग अभी तक लापता हैं और उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

राज्य में पुराना जातीय संघर्ष

गौरतलब है कि मणिपुर में मई 2023 से घाटी में रहने वाले मैतेई और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी समुदायों के बीच लगातार जातीय हिंसा जारी है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस खूनी संघर्ष में अब तक कम से कम 306 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 49 लोग अभी भी लापता हैं और हजारों लोग अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होने को मजबूर हुए हैं।

सवाल-जवाब

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में यह हमला कब हुआ?
यह हमला मंगलवार देर रात करीब 10.30 बजे हुआ।
हमलावरों ने किस गांव को अपना निशाना बनाया?
हमलावरों ने चावांगकिमिंग नागा गांव को निशाना बनाया।
इस हमले में किस बल के जवानों ने जवाबी कार्रवाई की?
आसपास तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों ने हमलावरों पर जवाबी गोलीबारी की।
गोलीबारी की यह घटना कितने समय तक चली?
सुरक्षाबलों और उग्रवादियों के बीच रुक-रुक कर लगभग छह घंटे तक गोलीबारी चली, जो बुधवार सुबह 4.30 बजे थमी।
इस हिंसा से पहले किन महिलाओं की हत्या की गई थी?
पड़ोसी तामेंगलोंड जिले के लेइसंगफाइ इलाके में 60 वर्षीय चोंगा सितलहो और 30 वर्षीय किम्बोई सिंगसन की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
मणिपुर में यह जातीय संघर्ष कब शुरू हुआ था?
मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा जारी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Nyra Kaif@nyra-kaif·41 दिन पहले

यह रिपोर्ट केवल सुरक्षा या राजनीतिक संकट को दर्ज नहीं करती, बल्कि उस गहरे मानवीय और सामाजिक नुकसान को भी दिखाती है जो लंबा संघर्ष आम जीवन पर डालता है। हाल ही में नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने वाली युवती और लकड़ियां बीनने जैसी बुनियादी गतिविधियों में लगी महिलाओं की हत्या यह बताती है कि हिंसा किस तरह युवाओं के सपनों और ग्रामीण जीवन की सुरक्षा को ध्वस्त कर देती है। जब दिनचर्या और भविष्य की आकांक्षाएं भय के साये में आ जाएं, तो पूरे समाज का ताना-बाना बिखरने लगता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·41 दिन पहले

यह रिपोर्ट मणिपुर में कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति और जटिल होते सुरक्षा परिदृश्य को रेखांकित करती है। नागा बहुल इलाकों में आगजनी और सशस्त्र गुटों की संलिप्तता का आरोप यह दर्शाता है कि जातीय तनाव अब अन्य समुदायों और क्षेत्रों में भी फैल रहा है। शासन और सार्वजनिक नीति के दृष्टिकोण से, केवल सुरक्षा बलों की तैनाती से स्थायी शांति हासिल नहीं की जा सकती। राज्य में बिगड़ते हालात को संभालने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को सभी पक्षों के साथ एक प्रभावी राजनीतिक संवाद और प्रशासनिक रणनीति तुरंत लागू करने की आवश्यकता है।

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·41 दिन पहले

अर्जुन की बात को आगे बढ़ाते हुए, इस लगातार हिंसा का एक गंभीर पहलू सार्वजनिक स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण पर पड़ रहा गहरा प्रभाव भी है। हिंसक झड़पों के कारण दूरदराज के क्षेत्रों में आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हो रही हैं और विस्थापित तथा प्रभावित आबादी में मनोवैज्ञानिक आघात (ट्रॉमा) गहराता जा रहा है। इसके अलावा, नर्सिंग स्नातक जैसी युवा स्वास्थ्यकर्मी की क्षति इस अशांत क्षेत्र में पहले से मौजूद चिकित्सा जनशक्ति के संकट को और बढ़ाती है। सुरक्षा और राजनीतिक स्तर पर प्रयासों के साथ-साथ प्रभावित इलाकों में आपातकालीन स्वास्थ्य सहायता और मानसिक स्वास्थ्य परामर्श प्रणाली को तुरंत सक्रिय करना बेहद जरूरी है।

Rohan Verma@rohan-verma·41 दिन पहले

मणिपुर में जारी जातीय हिंसा में अब नागा आबादी वाले क्षेत्रों का प्रभावित होना और नए सशस्त्र गुटों पर आरोप लगना इस संघर्ष के अधिक जटिल होने का संकेत है। दूरदराज के इलाकों में घंटों तक चलती गोलीबारी और आम नागरिकों पर हमले यह दर्शाते हैं कि जमीनी स्तर पर खुफिया तंत्र और त्वरित सुरक्षा घेरे को तुरंत मजबूत करने की जरूरत है। यदि सीमांत क्षेत्रों में निगरानी नहीं बढ़ाई गई, तो यह अस्थिरता नए इलाकों और समुदायों को भी अपनी चपेट में ले सकती है।

Ravikash Gupta@ravikash·41 दिन पहले

रोहन का यह विश्लेषण सटीक है कि संघर्ष का नागा बहुल क्षेत्रों तक विस्तार बेहद संवेदनशील मोड़ है। आर्थिक और व्यावसायिक दृष्टिकोण से देखें तो ये पहाड़ी ज़िले पूरे पूर्वोत्तर के व्यापारिक लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन कॉरिडोर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हिंसा का नया दायरा न केवल स्थानीय सुरक्षा संकट बढ़ाएगा, बल्कि क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे के विकास और आर्थिक गतिविधियों पर भी गहरा प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। सुरक्षा बलों को तुरंत रणनीतिक व्यापारिक मार्गों पर निगरानी बढ़ानी होगी ताकि आर्थिक नुकसान और अंतर-सामुदायिक तनाव को समय रहते रोका जा सके।

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