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मणिपुर में एनआरसी की मांग को लेकर दो दिवसीय शटडाउन, इंफाल घाटी में ठप रहा जनजीवनमणिपुर
18 अग॰ 2026, 9:19 pm (24 दिन पहले)· 4

मणिपुर में एनआरसी की मांग को लेकर दो दिवसीय शटडाउन, इंफाल घाटी में ठप रहा जनजीवन

मणिपुर की इंफाल घाटी में एनआरसी अपडेट करने की मांग को लेकर 48 घंटे के बंद से जनजीवन प्रभावित हुआ, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की।

मणिपुर की इंफाल घाटी में मंगलवार को एनआरसी को अपडेट करने की पुरजोर मांग के बीच 48 घंटे के सामान्य शटडाउन ने दैनिक गतिविधियों को लगभग रोक दिया, जिससे परिवहन और व्यावसायिक प्रतिष्ठान पूरी तरह प्रभावित हुए।

शटडाउन की वजह और समय

इस विरोध प्रदर्शन का आह्वान कैंपेन फॉर जस्ट एंड फेयर डेलिमिटेशन (JFD) नामक संगठन द्वारा किया गया है। उनकी मुख्य मांग है कि वर्ष 2027 की जनगणना प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले राज्य में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी एनआरसी को अद्यतन किया जाए। यह बंद सोमवार आधी रात से शुरू हुआ था और यह बुधवार आधी रात तक प्रभावी रहना तय किया गया है।

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विभिन्न जिलों में असर और सड़कों पर प्रदर्शन

शटडाउन के कारण इंफाल ईस्ट, इंफाल वेस्ट, थौबल, बिष्णुपुर, काकचिंग और जिरिबाम जिलों के कई हिस्सों में सड़कें पूरी तरह सूनी नजर आईं और दुकानें बंद रहीं। प्रदर्शनकारियों ने प्रमुख मार्गों पर टायर जलाकर और खुद खड़े होकर यातायात को बाधित किया। इस दौरान सरकारी अधिकारियों, विशिष्ट व्यक्तियों यानी वीआईपी, चिकित्सकों और सुरक्षा कर्मियों के वाहनों की आवाजाही भी रुक गई। शाम को भारी बारिश होने के बावजूद महिला प्रदर्शनकारियों और अन्य कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर डटे रहकर अपना विरोध जताया।

पुलिस कार्रवाई और झड़पें

स्थानीय पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह बंद कुल मिलाकर शांतिपूर्ण रहा, हालांकि कुछ जगहों पर तनाव और हल्की झड़पें देखने को मिलीं। एक घटना के दौरान सुरक्षा बलों के काफिले द्वारा कथित तौर पर एक मॉक बम का इस्तेमाल किए जाने से एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। इसके अलावा इंफाल ईस्ट के पोरमपट इलाके में पुलिस कार्रवाई के दौरान कम से कम चार महिला प्रदर्शनकारी घायल हो गईं, जिन्हें तुरंत इलाज के लिए जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) में भर्ती कराया गया।

स्थानीय समूहों और एनएच-37 पर असर

काकचिंग जिले में अपुन्बा नूपी लुप के सदस्यों और स्थानीय युवाओं ने हियांग्लाम-वाबागाई के इमा मार्केट और लमखाई केइथेल में जोरदार प्रदर्शन किए और वीआईपी काफिलों समेत सभी वाहनों को रोक दिया। इसके साथ ही जिरिबाम के विभिन्न नागरिक समाज संगठनों, छात्र समूहों, मीरा पाइबीस और स्थानीय नागरिकों ने नेशनल हाईवे-37 को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया। इससे जिरिबाम को इंफाल से जोड़ने वाले इस बेहद अहम मार्ग पर यातायात ठप हो गया।

दिल्ली में बैठकों का दौर और राजनीतिक हलचल

इस बीच, मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद इंफाल लौटने पर कहा कि केंद्र सरकार राज्य में एनआरसी को अद्यतन करने की मांग को लेकर कोई सकारात्मक कदम उठा सकती है। एन बीरेन सिंह सोमवार को विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ नई दिल्ली पहुंचे थे और उन्होंने गृह मंत्री के समक्ष अपनी बात रखी।

उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि हमने गृह मंत्री को एनआरसी की स्थिति, हड़ताल और चल रहे आंदोलन से जुड़ी तमाम जमीनी हकीकत से अवगत करा दिया है। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान जनसांख्यिकीय असंतुलन समेत मणिपुर से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा हुई और जनगणना से पहले एनआरसी कराए जाने की मांग पर अमित शाह का रुख सकारात्मक रहा।

सवाल-जवाब

मणिपुर में शटडाउन का आह्वान किसने किया था?
इस 48 घंटे के शटडाउन का आह्वान कैंपेन फॉर जस्ट एंड फेयर डेलिमिटेशन (JFD) द्वारा किया गया था।
बंद का मुख्य उद्देश्य क्या था?
प्रदर्शनकारी वर्ष 2027 की जनगणना से पहले मणिपुर में एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) को अपडेट करने की मांग कर रहे हैं।
शटडाउन कब से कब तक प्रभावी रहा?
यह बंद सोमवार आधी रात से शुरू हुआ और बुधवार आधी रात तक निर्धारित किया गया है।
किन प्रमुख जिलों और क्षेत्रों में इसका असर दिखा?
इंफाल ईस्ट, इंफाल वेस्ट, थौबल, बिष्णुपुर, काकचिंग और जिरिबाम जिलों में दुकानें बंद रहीं और सड़कें सूनी नजर आईं।
एन बीरेन सिंह ने नई दिल्ली में किससे मुलाकात की?
एन बीरेन सिंह ने विधायकों के प्रतिनिधिमंडल के साथ नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की।
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टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·24 दिन पहले

मणिपुर में एनआरसी अपडेट करने की मांग और जनगणना 2027 से पहले इसे लागू करने का दबाव राज्य के पहले से संवेदनशील जनसांख्यिकीय समीकरणों को और जटिल बना रहा है। इंफाल घाटी में 48 घंटे के शटडाउन और एनएच-37 की नाकाबंदी से आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर असर पड़ा है। पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक संकेत देती है कि केंद्र सरकार इस नीतिगत और प्रशासनिक मुद्दे पर जल्द ही कोई कड़ा फैसला ले सकती है, जो आगे चलकर राज्य की राजनीति की दिशा तय करेगा।

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·24 दिन पहले

यह घटनाक्रम सिर्फ़ एक स्थानीय विरोध नहीं, बल्कि उत्तर पूर्व के सामरिक राज्यों में नीतिगत और जनसांख्यिकीय संवेदनशीलता का स्पष्ट प्रमाण है। जिस तरह जिरिबाम में एनएच-37 को पूरी तरह अवरुद्ध किया गया है और इंफाल घाटी में जनजीवन ठप हुआ है, उससे साफ है कि आपूर्ति श्रृंखला और आंतरिक सुरक्षा पर इसका दीर्घकालिक दबाव बनेगा। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठकों के बाद इस जटिल प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौती से कैसे निपटती है।

Rohan Verma@rohan-verma·24 दिन पहले

इम्फाल घाटी में 48 घंटे के इस शटडाउन और एनआरसी अद्यतन की मांग से राज्य की प्रशासनिक चुनौतियाँ और गहरी हो गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात के बाद जिस तरह से केंद्र के स्तर पर सकारात्मक कदम उठाने की उम्मीद जताई गई है, उससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में नीतिगत मोर्चे पर कोई बड़ा फैसला हो सकता है। हालांकि, नेशनल हाईवे-37 जैसे अहम मार्गों पर लगातार हो रही नाकाबंदी और स्थानीय स्तर पर सुरक्षा बलों के साथ झड़पें प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनी रहेंगी, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखना और संवाद स्थापित करना सरकार की प्राथमिकता होगी।

Ravikash Gupta@ravikash·24 दिन पहले

इम्फाल घाटी में 48 घंटे के इस शटडाउन और एनआरसी अद्यतन की माँग से उपजे आर्थिक अवरोधों का सीधा असर मणिपुर के व्यापारिक पारिस्थितिकी तंत्र और आपूर्ति शृंखला पर पड़ रहा है। जिरिबाम को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-37 जैसे जीवन रेखा मार्गों की नाकाबंदी से वाणिज्यिक गतिविधियों को भारी झटका लगा है। पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात के बाद जहाँ एक ओर केंद्र स्तर पर नीतिगत हस्तक्षेप की संभावना बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था और आर्थिक स्थिरता बहाल करना प्रशासन के लिए तत्काल प्राथमिकता बन गया है ताकि व्यावसायिक एवं आपूर्ति तंत्र पटरी पर लौट सके।

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