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मणिपुर में जल निकायों के संरक्षण को गति, उप मुख्यमंत्री लोसी दिखो ने समीक्षा बैठक में दिए निर्देशमणिपुर
27 अग॰ 2026, 9:38 pm (15 दिन पहले)· 3

मणिपुर में जल निकायों के संरक्षण को गति, उप मुख्यमंत्री लोसी दिखो ने समीक्षा बैठक में दिए निर्देश

मणिपुर राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की छठी बैठक में 132 जल निकायों की ग्राउंड-ट्रूथिंग और 71 आर्द्रभूमियों के हेल्थ कार्ड की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई।

मणिपुर में जल निकायों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र को बचाने के लिए राज्य स्तर पर प्रयास तेज कर दिए गए हैं। राज्य सचिवालय के उप मुख्यमंत्री सम्मेलन कक्ष में आयोजित मणिपुर राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण (MSWA) की छठी बैठक में जल स्रोतों के टिकाऊ प्रबंधन, सीमाओं के भौतिक सीमांकन और संरक्षण योजनाओं की गहन समीक्षा की गई।

पर्यावरण संरक्षण और अदालती दिशा-निर्देशों पर ज़ोर

वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग का प्रभार संभाल रहे उप मुख्यमंत्री लोसी दिखो ने इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने राज्य की नदियों, झीलों और आर्द्रभूमि क्षेत्रों के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए कड़े तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक के दौरान भारत के उच्चतम न्यायालय में लंबित याचिका W.P. (Civil) No. 304 of 2018 से जुड़े कानूनी मामलों और अदालती निर्देशों के अनुपालन की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई, ताकि राज्य में जल निकायों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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बैठक में प्रस्तुत किए गए 5 मुख्य एजेंडा बिंदु

पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के निदेशक तथा MSWA के सदस्य सचिव डॉ. टी. ब्रजकुमार सिंह ने प्राधिकरण के समक्ष 5 प्रमुख एजेंडा प्रस्ताव रखे। इनमें पांचवीं बैठक की कार्यवाही की पुष्टि, प्राधिकरण की समितियों का पुनर्गठन, और राज्य प्राथमिकता आर्द्रभूमि के रूप में चिन्हित 7 जल निकायों की अधिसूचना स्थिति शामिल थी। इसके अलावा, शेष आर्द्रभूमियों के भौतिक सीमांकन, एकीकृत प्रबंधन योजनाओं (IMP) की तैयारी, और रामसर स्थलों के रूप में नामांकन संबंधी प्रस्तावों की प्रगति पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

ग्राउंड-ट्रूथिंग, हेल्थ कार्ड और सीमांकन की वर्तमान स्थिति

राष्ट्रीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण योजना (NPCA) के दिशा-निर्देशों के तहत तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में अब तक 132 आर्द्रभूमियों की ग्राउंड-ट्रूथिंग जांच पूरी की जा चुकी है। इनमें से 71 आर्द्रभूमियों का डिजिटल सीमांकन पूरा कर लिया गया है, और इन्हीं 71 जल निकायों के लिए विस्तृत संक्षिप्त दस्तावेज़ तथा 'हेल्थ कार्ड' तैयार किए गए हैं। वर्तमान में 7 आर्द्रभूमियों का भौतिक सीमांकन कार्य संपन्न हो चुका है, जबकि विभिन्न जिलों की 3 प्रमुख आर्द्रभूमियों को औपचारिक रूप से अधिसूचित किया जा चुका है।

सवाल-जवाब

मणिपुर राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की बैठक की अध्यक्षता किसने की?
बैठक की अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री लोसी दिखो ने की, जिनके पास वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग का प्रभार भी है।
मणिपुर में अब तक कितनी आर्द्रभूमियों की ग्राउंड-ट्रूथिंग की गई है?
राज्य में अब तक 132 आर्द्रभूमियों की ग्राउंड-ट्रूथिंग जांच पूरी की जा चुकी है।
कितनी आर्द्रभूमियों के लिए हेल्थ कार्ड और डिजिटल सीमांकन पूरा हुआ है?
कुल 71 आर्द्रभूमियों का डिजिटल सीमांकन किया जा चुका है और उनके लिए संक्षिप्त दस्तावेज़ एवं हेल्थ कार्ड तैयार किए गए हैं।
उच्चतम न्यायालय में आर्द्रभूमि से संबंधित कौन सा मामला लंबित है?
उच्चतम न्यायालय के समक्ष W.P. (Civil) No. 304 of 2018 मामला लंबित है, जिससे जुड़े विषयों पर बैठक में चर्चा हुई।
मणिपुर में कितनी आर्द्रभूमियों को औपचारिक रूप से अधिसूचित किया गया है?
वर्तमान में 3 आर्द्रभूमियों को औपचारिक रूप से अधिसूचित किया गया है, जबकि 7 का भौतिक सीमांकन पूरा हो चुका है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·15 दिन पहले

मणिपुर में जल निकायों के संरक्षण और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अनुपालन पर्यावरण और शासन के मोर्चे पर एक गंभीर प्रशासनिक चुनौती है। 132 आर्द्रभूमियों की ग्राउंड-ट्रूथिंग और 71 के हेल्थ कार्ड तैयार होना कागजी कार्रवाई से आगे बढ़कर धरातल पर काम दिखने की शुरुआत है। हालांकि, असली परीक्षा इन जल स्रोतों के भौतिक सीमांकन और रामसर साइट नामांकन के लक्ष्यों को तय समयसीमा में पूरा करने की होगी, ताकि अवैध कब्जों पर प्रभावी रोक लग सके।

Ravikash Gupta@ravikash·15 दिन पहले

सहकर्मी की इस बात को आगे बढ़ाते हुए, यह समझना आवश्यक है कि इन पर्यावरण-आर्थिक पहलों का सीधा संबंध पूर्वोत्तर क्षेत्र की दीर्घकालिक स्थिरता और जलवायु प्रतिरोधक क्षमता से है। राष्ट्रीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण योजना (NPCA) के तहत 132 आर्द्रभूमियों की ग्राउंड-ट्रूथिंग और 71 के हेल्थ कार्ड जारी होना डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक अहम कदम है। लेकिन वृहद स्तर पर इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट प्लान्स (IMP) को लागू करने के लिए पर्याप्त वित्तीय आवंटन और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना होगा, तभी रामसर साइट्स के रूप में नामांकन की प्रक्रिया को गति मिल पाएगी।

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