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मथुरा और वृंदावन में 5000 कैमरों से निगहबानी, कॉरिडोर और घाटों के कायाकल्प से बदलेगी ब्रज की सूरतभारत
21 सित॰ 2026, 3:25 pm (38 दिन पहले)· 0

मथुरा और वृंदावन में 5000 कैमरों से निगहबानी, कॉरिडोर और घाटों के कायाकल्प से बदलेगी ब्रज की सूरत

मथुरा-वृंदावन में सेफ सिटी परियोजना के अंतर्गत 5000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे सक्रिय किए गए हैं, जिनका संचालन कमांड सेंटर से होगा। इसके साथ ही ब्रज क्षेत्र में 100 से अधिक कुंडों के पुनरुद्धार, नए घाटों के निर्माण और परिक्रमा मार्गों के चौड़ीकरण का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में पहचानी जाने वाली कान्हा की नगरी मथुरा और वृंदावन में आने वाले श्रद्धालुओं की हिफाजत को पुख्ता करने के लिए व्यापक सुरक्षा तंत्र स्थापित किया गया है। सेफ सिटी परियोजना के जरिए पूरे नगरीय क्षेत्र को निगरानी के कड़े दायरे में लाया गया है। समूचे इलाके में 5000 से भी ज्यादा अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया गया है, जिसकी सीधी मॉनिटरिंग इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर यानी आईसीसीसी के जरिए 24 घंटे की जा रही है। इस तकनीकी व्यवस्था का मुख्य मकसद दूर-दराज से आने वाले तीर्थयात्रियों के साथ होने वाले अपराधों, ठगी और अप्रिय घटनाओं पर पूरी तरह नकेल कसना है।

चौराहों और संवेदनशील स्थलों पर तीसरी आंख का पहरा

सड़क सुरक्षा और जनसुरक्षा के मद्देनजर स्थापित किए गए ये 5000 हाईटेक कैमरे शहर के प्रमुख तिराहों, व्यस्त चौराहों, प्रख्यात मंदिरों के प्रवेश द्वारों और सुरक्षा के लिहाज से अतिसंवेदनशील माने जाने वाले स्थानों पर लगाए गए हैं। मथुरा की वैश्विक पहचान के चलते रोजाना यहां हजारों की तादाद में देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में भीड़भाड़ वाले रास्तों और संकरी गलियों में श्रद्धालुओं की आवाजाही को महफूज बनाना प्राथमिकता रही है। डिजिटल निगरानी नेटवर्क की मौजूदगी से असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर तुरंत नजर रखी जा सकेगी और किसी भी संदिग्ध हरकत पर पुलिस बल फौरन कार्रवाई कर सकेगा।

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घाटों का पुनरुद्धार और यमुना पर सस्पेंशन ब्रिज की तैयारी

सुरक्षा इंतजामों के साथ-साथ ब्रज की ऐतिहासिक धरोहर और यमुना नदी के तटीय स्वरूप को संवारने की दिशा में भी बड़े पैमाने पर कार्य हुए हैं। विश्राम घाट से लेकर केशी घाट तक नदी किनारे श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विस्तार करते हुए विशेष सौंदर्यीकरण किया गया है। वृंदावन क्षेत्र में 7.6 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से आधुनिक अक्रूर घाट तैयार किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त देवरहा बाबा घाट के समीप यमुना नदी पर एक नए केबल स्टे सस्पेंशन ब्रिज के निर्माण की परियोजना को भी मंजूरी मिल चुकी है। प्राचीन वास्तुकला को नया आकर्षण देने के लिए केशी घाट और परिक्रमा मार्ग से लगी प्रमुख इमारतों पर फसाड लाइटिंग की व्यवस्था की गई है। पर्यावरण संरक्षण के तहत सुनरख स्थित सौभरि ऋषि वाटर बॉडी, करहला में बज्रनाभ समाधि परिसर और पूरे ब्रज मंडल के 100 से अधिक प्राचीन कुंडों का ईको-रेस्टोरेशन कर उनका प्राकृतिक स्वरूप लौटाया गया है।

कॉरिडोर परियोजना और परिक्रमा मार्गों पर यात्री सुविधाएं

तीर्थयात्रियों की यात्रा को सहज बनाने के उद्देश्य से ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के आसपास भारी भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए एक विशाल कॉरिडोर निर्माण की योजना पर काम जारी है। इसी तरह श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर की ओर जाने वाले प्रमुख संपर्क मार्गों, चौराहों और मुख्य सड़कों को हेरिटेज लाइटिंग और फसाड विकास के माध्यम से पारंपरिक स्वरूप में निखारा गया है। गोवर्धन के 21 किलोमीटर लंबे परिक्रमा पथ और बरसाना के परिक्रमा मार्ग को चौड़ा कर वहां छायादार शेड, होल्डिंग एरिया, स्वच्छ पेयजल और सार्वजनिक शौचालयों जैसी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। वहीं जिले की सीमाओं और एक्सप्रेसवे के मुहाने पर भव्य पौराणिक शैली के भव्य स्वागत द्वार खड़े किए गए हैं, जबकि गीता शोध संस्थान और रासलीला अकादमी परिसर में कन्वेंशन सेंटर तथा आधुनिक गेस्ट हाउस तैयार किए गए हैं।

सवाल-जवाब

मथुरा-वृंदावन में सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत कुल कितने कैमरे लगाए गए हैं?
मथुरा और वृंदावन के पूरे क्षेत्र में सुरक्षा निगरानी के लिए 5000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
इन सीसीटीवी कैमरों की निगरानी कहां से की जा रही है?
इन सभी कैमरों का सीधा नियंत्रण इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) से 24 घंटे किया जा रहा है।
वृंदावन में नए अक्रूर घाट के निर्माण पर कितनी लागत आ रही है?
वृंदावन में नए अक्रूर घाट के निर्माण पर 7.6 करोड़ रुपये की लागत आ रही है।
यमुना नदी पर नए केबल स्टे सस्पेंशन ब्रिज की योजना कहां के लिए मंजूर हुई है?
यमुना नदी पर नए केबल स्टे सस्पेंशन ब्रिज के निर्माण की योजना देवरहा बाबा घाट के पास के लिए स्वीकृत की गई है।
गोवर्धन परिक्रमा मार्ग की लंबाई कितनी है और वहां क्या सुविधाएं बढ़ाई गई हैं?
गोवर्धन परिक्रमा मार्ग 21 किलोमीटर लंबा है, जिसे चौड़ा करने के साथ वहां शेड, होल्डिंग एरिया, पेयजल और शौचालयों की व्यवस्था की गई है।
ब्रज क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के तहत कितने कुंडों का कायाकल्प किया गया है?
ब्रज क्षेत्र के 100 से अधिक प्राचीन कुंडों का ईको-रेस्टोरेशन कर उन्हें नया जीवन दिया गया है।
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टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·37 दिन पहले

अंक ज्योतिष और ब्रज की भौगोलिक ऊर्जा के दृष्टिकोण से, 5000 कैमरों की यह सुरक्षा व्यवस्था और 100 से अधिक कुंडों का पुनरुद्धार इस क्षेत्र के मूलांक और भाग्यीय चक्र को अत्यंत प्रबल बना रहा है। तकनीक और प्राचीन विरासत का यह संतुलन यहाँ आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की मानसिक शांति को सुदृढ़ करेगा तथा सकारात्मक आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाएगा।

Ravikash Gupta@ravikash·37 दिन पहले

मथुरा-वृंदावन में 5000 कैमरों की सेफ सिटी परियोजना और हेरिटेज कॉरिडोर का यह विकास सिर्फ सुरक्षा और पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की आर्थिकी और रियल एस्टेट बाजार के लिए एक बड़ा उत्प्रेरक है। इस बुनियादी ढांचे के विस्तार से वैश्विक निवेशकों, आतिथ्य सत्कार यानी हॉस्पिटैलिटी सेक्टर और स्थानीय व्यवसायों को नई गति मिलेगी, जिससे इस धार्मिक क्षेत्र का आर्थिक परिदृश्य पूरी तरह बदल जाएगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·37 दिन पहले

यह ढांचागत कायाकल्प और निगरानी तंत्र उत्तर प्रदेश के धार्मिक पर्यटन मॉडल का एक नया मानक स्थापित कर रहा है, जो आने वाले समय में राज्य के अन्य ऐतिहासिक नगरों के विकास की दिशा तय करेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·37 दिन पहले

मथुरा-वृंदावन में 5000 कैमरों और आईसीसीसी की शुरुआत से अपराध पर लगाम कसने में मदद मिलेगी, लेकिन असली चुनौती त्योहारों के दौरान बेकाबू भीड़ को संभालने की होगी। बुनियादी ढांचे के विकास के साथ यह भी देखना अहम होगा कि स्थानीय लोगों और दैनिक यात्रियों के लिए ट्रैफिक प्रबंधन कितना प्रभावी रहता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·37 दिन पहले

रोहन वर्मा का विश्लेषण सही है, लेकिन एक क्राइम रिपोर्टर के तौर पर मेरा मानना है कि 5000 कैमरों और आईसीसीसी की यह डिजिटल निगरानी व्यवस्था केवल प्रतिक्रियात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। त्योहारों और भारी मेलों के दौरान जेबकतरों, संदिग्ध तत्वों और संगठित ठग गिरोहों की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फेशियल रिकग्निशन और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन जैसी तकनीकों का वास्तविक समय में उपयोग बेहद जरूरी होगा। तभी कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा को पूरी तरह फूल-प्रूफ बनाया जा सकता है।

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