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मेघालय हाईकोर्ट ने जेएसयू की याचिका स्वीकारी, श्री सीमेंट का काम अब भी निलंबितमेघालय
5 सित॰ 2026, 3:24 pm (26 दिन पहले)· 3

मेघालय हाईकोर्ट ने जेएसयू की याचिका स्वीकारी, श्री सीमेंट का काम अब भी निलंबित

मेघालय हाईकोर्ट ने श्री सीमेंट के खिलाफ जयंतिया स्टूडेंट्स यूनियन की याचिका पर सुनवाई शुरू कर दी है, और राज्य सरकार ने भरोसा दिया है कि जांच पूरी होने तक पूर्वी जयंतिया हिल्स में कंपनी का काम बंद रहेगा; अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी, वहीं मानवाधिकार आयोग में भी मामला साथ-साथ चल रहा है।

मेघालय हाईकोर्ट ने जयंतिया स्टूडेंट्स यूनियन (जेएसयू) की उस याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है, जिसमें पूर्वी जयंतिया हिल्स में श्री सीमेंट के कामकाज को चुनौती दी गई थी। राज्य सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि जांच पूरी होने तक कंपनी को कोई भी काम दोबारा शुरू करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

सरकार का हलफनामा, जांच तक काम बंद

जेएसयू के मुताबिक राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया है कि प्रस्तावित जांच पूरी होने तक श्री सीमेंट न तो अपना काम दोबारा शुरू कर पाएगी और न ही साइट पर किसी तरह का जमीनी काम कर सकेगी। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि इस प्रोजेक्ट से जुड़े पर्यावरण, सामाजिक और कानूनी पहलुओं के साथ-साथ आपराधिक आरोपों की जांच के लिए एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई जाएगी।

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जेएसयू की मांग, सरकारी कमेटी नहीं, अदालत की निगरानी में जांच

जेएसयू सरकार की बनाई कमेटी के बजाय हाईकोर्ट की सीधी निगरानी में स्वतंत्र जांच चाहता है। छात्र संगठन का कहना है कि अदालत की निगरानी वाली जांच से इस विवादित प्रोजेक्ट और उसके खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों को लेकर कहीं ज्यादा पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

7 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

इस मामले पर हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 7 सितंबर को होनी है, जिसमें राज्य सरकार से और जवाब दाखिल करने की उम्मीद है। इसी सुनवाई से यह भी साफ होगा कि श्री सीमेंट पर लगी रोक आगे जारी रहेगी या इसमें कोई बदलाव होगा।

मानवाधिकार आयोग में भी चल रही लड़ाई

यह विवाद मेघालय मानवाधिकार आयोग (एमएचआरसी) तक भी पहुंच चुका है। जेएसयू पुलिस और जिला प्रशासन की उन रिपोर्टों पर अपना जवाब तैयार कर रहा है, जो कथित हिंसा और प्रदर्शनों को संभालने के तरीके को लेकर आयोग को पहले ही सौंपी जा चुकी हैं। जेएसयू के अनुसार आयोग ने इस जवाब के लिए 28 सितंबर की समयसीमा तय की है।

छात्र संगठन ने इन रिपोर्टों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इनमें स्पष्टता की कमी है और हिंसा किन हालात में हुई, यह ठीक से नहीं बताया गया है। जेएसयू ने यह भी दावा किया है कि पुलिस के अपने रिकॉर्ड में संगठन से जुड़ी एक मेडिकल रेस्क्यू टीम पर कथित हथियारबंद हमले का जिक्र मिलता है।

जेएसयू बोला, कानूनी लड़ाई जारी रहेगी

संगठन ने साफ कर दिया है कि वह इस मामले को कानूनी रास्ते से आगे बढ़ाता रहेगा और उसकी मांग है कि हिंसा के लिए जो भी जिम्मेदार पाया जाए, उस पर मुकदमा चले। यह पूरा घटनाक्रम पूर्वी जयंतिया हिल्स में श्री सीमेंट की मौजूदगी के खिलाफ लगातार जारी विरोध के बीच सामने आया है, और स्थानीय लोगों के साथ जेएसयू भी एक ऐसी स्वतंत्र और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग कर रहा है जिससे समुदाय की चिंताओं का हल निकल सके।

सवाल-जवाब

मेघालय हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया है?
कोर्ट ने पूर्वी जयंतिया हिल्स में श्री सीमेंट के कामकाज को चुनौती देने वाली जेएसयू की याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली है।
क्या तब तक श्री सीमेंट काम कर सकेगी?
नहीं, राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया है कि जांच पूरी होने तक कंपनी का काम और जमीनी गतिविधियां बंद रहेंगी।
फैक्ट फाइंडिंग कमेटी किन मुद्दों की जांच करेगी?
यह कमेटी प्रोजेक्ट से जुड़े पर्यावरण, सामाजिक और कानूनी पहलुओं के साथ-साथ आपराधिक आरोपों की भी जांच करेगी।
जेएसयू सरकारी कमेटी का विरोध क्यों कर रहा है?
जेएसयू चाहता है कि जांच हाईकोर्ट की सीधी निगरानी में हो, क्योंकि इससे ज्यादा पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
अगली सुनवाई कब होगी?
अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी, जिसमें राज्य सरकार से और जवाब आने की उम्मीद है।
मानवाधिकार आयोग में क्या चल रहा है?
जेएसयू पुलिस और जिला प्रशासन की उन रिपोर्टों पर अपना जवाब तैयार कर रहा है जो प्रदर्शनों के दौरान हुई कथित हिंसा से जुड़ी हैं, और इसके लिए 28 सितंबर की समयसीमा तय है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·25 दिन पहले

यह मामला केवल एक औद्योगिक परियोजना और छात्र संगठन के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि विधि-व्यवस्था और मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक गंभीर आपराधिक प्रकरण बनता जा रहा है। जिस तरह से पुलिस रिकॉर्ड में एक मेडिकल रेस्क्यू टीम पर हथियारबंद हमले और कथित हिंसा की बात सामने आई है, उससे यह स्पष्ट है कि यदि इसकी जांच केवल प्रशासनिक स्तर पर हुई, तो सच्चाई सामने आने में संदेह रहेगा। अदालत की सीधी निगरानी में होने वाली स्वतंत्र जांच ही इस मामले में सार्वजनिक सुरक्षा और न्याय व्यवस्था की साख बचा सकती है, खासकर तब जब मानवाधिकार आयोग भी इसकी समानांतर जांच कर रहा है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·25 दिन पहले

अर्जुन मेहता का राजनीतिक और शासकीय विश्लेषण यह इंगित करता है कि पूर्वी जयंतिया हिल्स में श्री सीमेंट परियोजना पर उपजा गतिरोध अब महज़ पर्यावरणीय विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूर्वोत्तर के राज्यों में कॉर्पोरेट निवेश, स्थानीय जनभावना और कानून-व्यवस्था के बीच एक संवेदनशील राजनीतिक चुनौती बन चुका है। मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप और जेएसयू की अदालत की निगरानी वाली जांच की मांग के बीच, आगामी 7 सितंबर की सुनवाई यह तय करेगी कि राज्य सरकार विकास और नागरिक सुरक्षा के इस दोराहे पर क्या रुख अपनाती है।

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