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मेघालय के जोवाई में 134 छात्राओं ने पूरा किया आत्मरक्षा प्रशिक्षणमेघालय
20 सित॰ 2026, 4:37 pm (11 दिन पहले)· 0

मेघालय के जोवाई में 134 छात्राओं ने पूरा किया आत्मरक्षा प्रशिक्षण

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत जोवाई प्रेस्बिटेरियन हायर सेकेंडरी स्कूल की 134 छात्राओं को आत्मरक्षा का पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

मेघालय के जोवाई में छात्राओं को शारीरिक रूप से सशक्त और मानसिक रूप से सतर्क बनाने के मकसद से आयोजित पांच दिवसीय विशेष आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। जोवाई प्रेस्बिटेरियन चर्च के मिशन कंपाउंड स्थित जुबली हॉल में चले इस सत्र में जोवाई प्रेस्बिटेरियन हायर सेकेंडरी स्कूल की 134 छात्राओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंतिम दिन शनिवार को सभी प्रतिभागी छात्राओं को पाठ्यक्रम पूरा करने पर प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।

प्रशासन और खेल संस्था का संयुक्त प्रयास

यह प्रशिक्षण शिविर 14 सितंबर से 19 सितंबर तक आयोजित किया गया था। इस पूरे कार्यक्रम का संचालन बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (BBBP) अभियान के तहत किया गया। पश्चिम जयंतिया हिल्स जिले के समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत आने वाले डिस्ट्रिक्ट हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ विमेन (DHEW) ने शिलांग की संस्था हैप्पी रेड रूस्टर के साथ मिलकर इस कार्यशाला का आयोजन किया था। इसका मुख्य उद्देश्य बालिकाओं और महिलाओं के बीच व्यक्तिगत सुरक्षा, आत्मविश्वास और आत्मरक्षा की बुनियादी तकनीकों को बढ़ावा देना था।

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तकनीक, अनुशासन और सतर्कता पर जोर

प्रशिक्षण सत्र के दौरान छात्राओं को दैनिक जीवन में किसी भी अप्रत्याशित खतरे से निपटने के गुर सिखाए गए। जोवाई प्रेस्बिटेरियन हायर सेकेंडरी स्कूल के शिक्षक ए. लामारे ने विभाग की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि विपरीत और असुरक्षित परिस्थितियों में बालिकाओं के लिए तैयार और आत्मविश्वासी रहना बेहद जरूरी है। वहीं हैप्पी रेड रूस्टर एमएमए शिलांग के संस्थापक इसैया ने छात्राओं से आग्रह किया कि वे पांच दिनों में सीखी गई तकनीकों का नियमित अभ्यास जारी रखें। उन्होंने चुनौतीपूर्ण समय में शांत, सतर्क और अनुशासित रहने के महत्व को रेखांकित किया।

समापन समारोह और प्रशासनिक मार्गदर्शन

कार्यशाला के आखिरी सत्र में छात्राओं ने सीखी गई आत्मरक्षा तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया और अपने अनुभव साझा किए। इस समापन सत्र की अध्यक्षता पश्चिम जयंतिया हिल्स DHEW की जेंडर स्पेशलिस्ट एस. लामारे ने की। कार्यक्रम के अंत में पश्चिम जयंतिया हिल्स DHEW के डिस्ट्रिक्ट मिशन कोऑर्डिनेटर एफ.जी.एन. रिंग्गा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने छात्राओं को कौशल का नियमित अभ्यास बनाए रखने की सलाह देने के साथ ही यह भी कहा कि किसी भी खतरे या असुरक्षा की स्थिति में तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दी जानी चाहिए।

सवाल-जवाब

यह आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर किस स्थान पर आयोजित किया गया था?
यह शिविर मेघालय के जोवाई में जोवाई प्रेस्बिटेरियन चर्च के मिशन कंपाउंड स्थित जुबली हॉल में आयोजित किया गया था।
इस कार्यशाला में कितने विद्यार्थियों ने भाग लिया और प्रमाण पत्र प्राप्त किया?
जोवाई प्रेस्बिटेरियन हायर सेकेंडरी स्कूल की कुल 134 छात्राओं ने यह पांच दिवसीय प्रशिक्षण पूरा कर प्रमाण पत्र हासिल किए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम किन तारीखों के बीच आयोजित किया गया था?
यह कार्यक्रम 14 सितंबर से 19 सितंबर तक पांच दिनों की अवधि में आयोजित किया गया था।
इस पहल का आयोजन किन संस्थाओं के माध्यम से किया गया था?
इसे पश्चिम जयंतिया हिल्स के समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत DHEW द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत हैप्पी रेड रूस्टर शिलांग के सहयोग से आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं को मुख्य रूप से क्या सलाह दी गई?
छात्राओं को आत्मरक्षा तकनीकों का नियमित अभ्यास करने, चुनौतीपूर्ण स्थिति में शांत व सतर्क रहने और किसी भी खतरे की सूचना निकटतम पुलिस थाने को देने की सलाह दी गई।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Kavya Nair@kavya-nair·10 दिन पहले

जोवाई (मेघालय) जैसे खूबसूरत पर्यटन क्षेत्रों में स्थानीय युवतियों को आत्मरक्षा में सशक्त बनाना केवल व्यक्तिगत सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र में सुरक्षित और समावेशी पर्यटन के विकास के लिए भी एक मील का पत्थर है। जब स्थानीय महिलाएं आत्मनिर्भर और सुरक्षित महसूस करती हैं, तो वे आतिथ्य सत्कार उद्योग में अधिक सक्रिय रूप से भाग ले पाती हैं। यह पहल पूर्वोत्तर भारत में महिला-अनुकूल और एकल यात्रियों (सोलो ट्रैवलर्स) के लिए एक सुरक्षित माहौल तैयार करेगी, जिससे सांस्कृतिक और साहसिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·10 दिन पहले

जमीनी स्तर पर बालिकाओं को आत्मरक्षा और आत्मविश्वास से लैस करना केवल सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि यह पूर्वोत्तर में दीर्घकालिक मानव पूंजी के निर्माण और समावेशी विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। जब छात्राएं सुरक्षित महसूस करती हैं, तो उनकी गतिशीलता और स्वतंत्रता बढ़ती है, जो सीधे तौर पर उच्च शिक्षा और भविष्य में कार्यबल में उनकी भागीदारी को बढ़ावा देती है। 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' जैसी सरकारी योजनाओं के तहत स्थानीय प्रशासन और खेल संस्थानों का यह साझा मॉडल अन्य दूरदराज के क्षेत्रों के लिए भी एक बेहतरीन मार्गदर्शक बन सकता है, जिससे सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण का आधार मजबूत होगा।

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·10 दिन पहले

इस जमीनी प्रयास को राष्ट्रीय नीति के क्रियान्वयन के नजरिए से देखना जरूरी है। अक्सर 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' जैसी योजनाओं की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि जिला प्रशासन स्थानीय संगठनों के साथ मिलकर उन्हें धरातल पर कैसे लागू करता है। मेघालय के जोवाई का यह मॉडल दिखाता है कि जब सरकारी नीतियां स्थानीय अकादमियों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ हाथ मिलाती हैं, तो सुरक्षा का यह ढांचा व्यावहारिक बन जाता है। पूर्वोत्तर जैसे कठिन क्षेत्रों में ऐसे विकेंद्रीकृत और कौशल-आधारित कार्यक्रम न केवल सुरक्षा-स्तर बढ़ाते हैं, बल्कि नीतिगत निवेश को वास्तविक सामाजिक सशक्तिकरण में बदलते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·10 दिन पहले

सार्वजनिक सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के नज़रिए से यह पहल ज़मीनी स्तर पर महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की रोकथाम में बेहद कारगर साबित हो सकती है। छात्राओं को शारीरिक आत्मरक्षा तकनीकों के साथ-साथ त्वरित पुलिस रिपोर्टिंग के प्रति जागरूक करना अपराधियों के लिए एक मज़बूत मनोवैज्ञानिक अवरोधक का काम करता है। हालांकि, ऐसी कार्यशालाओं का स्थायी प्रभाव तभी दिखेगा जब इन्हें केवल सांकेतिक आयोजनों तक सीमित न रखकर नियमित प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया जाए और स्थानीय थानों के साथ त्वरित शिकायत तंत्र से सीधे जोड़ा जाए।

Arjun Mehta@arjun-mehta·10 दिन पहले

लोक नीति और शासन के दृष्टिकोण से, 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' योजना का यह क्रियान्वयन ज़मीनी स्तर पर महिला सशक्तिकरण के व्यावहारिक रूप को दर्शाता है। हालांकि, नीतिगत प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए ऐसे आयोजनों को तदर्थ कार्यशालाओं से आगे बढ़ाकर राज्य के स्कूली पाठ्यक्रम और संस्थागत जेंडर बजटिंग का अनिवार्य हिस्सा बनाना होगा। जब तक शिक्षा, समाज कल्याण और गृह विभागों के बीच निरंतर अंतर-विभागीय समन्वय स्थापित नहीं होता, तब तक ऐसी कल्याणकारी योजनाओं का दीर्घकालिक प्रशासनिक प्रभाव सीमित रह सकता है।

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