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मेघालय में आठ यूडीपी विधायकों की मांगों के समर्थन में उतरी बीजेपी, एएल हेक ने कही बड़ी बातमेघालय
15 सित॰ 2026, 9:47 pm (15 दिन पहले)· 2

मेघालय में आठ यूडीपी विधायकों की मांगों के समर्थन में उतरी बीजेपी, एएल हेक ने कही बड़ी बात

मेघालय के वरिष्ठ भाजपा नेता और विधायक एएल हेक ने आठ यूडीपी विधायकों द्वारा उठाए गए मुद्दों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि इन मांगों को उनकी पार्टी भी लंबे समय से उठाती रही है।

शिलांग में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है, जहां भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पिन्थोरुमखराह विधानसभा क्षेत्र से विधायक एएल हेक ने मंगलवार को एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आठ यूडीपी विधायकों द्वारा जो मुद्दे उठाए गए हैं और जिनके जरिए पार्टी में संभावित विलय की बात चल रही है, वे दरअसल वे ही मांगें हैं जिन्हें उनकी अपनी पार्टी भी बीते कई वर्षों से लगातार आगे बढ़ा रही है।

एएल हेक ने स्पष्ट किया कि यूडीपी विधायकों की तरफ से उठाई गई चिंताएं सीधे तौर पर मेघालय राज्य और वहां की मूल निवासी आबादी के हितों से जुड़ी हुई हैं। इसी वजह से उन्होंने इन मांगों के प्रति अपना पूरा समर्थन जाहिर किया है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि राज्य और स्थानीय मूल निवासियों के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए वे इन तमाम मुद्दों की सराहना करते हैं और उनकी पार्टी ने भी इन्हें पहले से ही लागू कराने के प्रयास किए हैं।

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इनर लाइन परमिट और सुरक्षा अधिनियम पर रुख

मेघालय राज्य में इनर लाइन परमिट यानी आईएलपी प्रणाली को लागू करने की मांग पर चर्चा करते हुए एएल हेक ने सुझाव दिया कि यदि मौजूदा समय में आईएलपी को तुरंत लागू करना संभव नहीं हो पा रहा है, तो सरकार वैकल्पिक रूप से मेघालय रेजिडेंट्स सेफ्टी एंड सिक्योरिटी एक्ट यानी एमआरएसएसए को आगे बढ़ा सकती है। उन्होंने कहा कि यदि तत्काल प्रभाव से आईएलपी देना मुमकिन नहीं है, तो एमआरएसएसए को लागू किया जा सकता है जिसे अभी बिना किसी परेशानी के पूरा किया जा सकता है।

खासी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का समर्थन

भाजपा नेता ने खासी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग का भी पूरी मजबूती से समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव के मार्ग में उन्हें किसी भी तरह की कोई बाधा नजर नहीं आती है। उनके मुताबिक खासी भाषा के साथ कोई समस्या नहीं है, यह पूरी तरह से योग्य है और इसे मान्यता दिलाने के लिए कैबिनेट तथा सदन में प्रस्ताव पास किया जा सकता है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि केवल यूडीपी ही नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी भी इस मांग को लेकर लंबे समय से पैरवी करती आ रही है। उन्होंने कहा कि इस मांग को किसी एक दल विशेष की मांग के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि भाजपा की ओर से भी इसे लागू करवाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

कोयला खनन मामले पर अदालत का हवाला

हालांकि, मेघालय में कोयला खनन से जुड़ी मांगों के संदर्भ में एएल हेक ने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा कि यह मामला वर्तमान में न्यायालय के विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि चूंकि यह विषय अदालत में पेंडिंग है और सबज्यूडिसे है, इसलिए इस पर कुछ भी बोलना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है और वे इस समय इस पर कोई बयान नहीं दे सकते हैं।

सवाल-जवाब

एएल हेक किस पार्टी से संबंधित हैं?
एएल हेक भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पिन्थोरुमखराह से विधायक हैं।
किन विधायकों के मुद्दों का समर्थन किया गया है?
एएल हेक ने आठ यूडीपी विधायकों द्वारा उठाए गए मुद्दों का समर्थन किया है।
आईएलपी लागू न होने पर कौन सा विकल्प सुझाया गया है?
आईएलपी लागू न होने की स्थिति में मेघालय रेजिडेंट्स सेफ्टी एंड सिक्योरिटी एक्ट लागू करने का सुझाव दिया गया है।
किस भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग है?
खासी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की जा रही है।
कोयला खनन मामले पर क्या प्रतिक्रिया दी गई है?
मामला अदालत में विचाराधीन होने के कारण इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Vikram Yadav@vikram-yadav·15 दिन पहले

मेघालय में क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय दलों के बीच का यह वैचारिक तालमेल पूर्वोत्तर की राजनीति में एक नया समीकरण गढ़ सकता है। एएल हेक का यह रुख संकेत देता है कि गठबंधन की संभावनाओं को तलाशने के लिए स्थानीय पहचान और संस्कृति से जुड़े मुद्दों को साधना एक प्रभावी रणनीति बन रहा है। यदि इनर लाइन परमिट या एमआरएसएसए और खासी भाषा को संवैधानिक मान्यता जैसे विषयों पर भाजपा और यूडीपी का यह समन्वय जमीन पर उतरा, तो इससे राज्य के क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों में दूरगामी बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिसका असर आगामी चुनावी और प्रशासनिक गतिशीलता पर पड़ना तय है।

Ravikash Gupta@ravikash·15 दिन पहले

मेघालय में राजनीतिक समीकरणों का यह घटनाक्रम क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय गठबंधन के बीच नई रणनीतिक साझेदारी की ओर इशारा करता है। एएल हेक द्वारा इनर लाइन परमिट के विकल्प के तौर पर एमआरएसएसए और खासी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का समर्थन करना यह बताता है कि पहाड़ी राज्यों में स्थानीय भावनाएं चुनावी और राजनीतिक स्थिरता की धुरी बन चुकी हैं। कोयला खनन मामले पर कानूनी दायरे का हवाला देकर सावधानी बरतना यह दर्शाता है कि अदालत के विचाराधीन मामलों पर राजनीतिक दल अब फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह वैचारिक तालमेल क्षेत्रीय स्तर पर गठबंधनों के नए समीकरण तय कर सकता है, जिसका असर राज्य के आर्थिक और प्रशासनिक ढांचे पर पड़ना तय है।

Meera Joshi@meera-joshi·15 दिन पहले

पहाड़ी राज्यों की राजनीति में क्षेत्रीय अस्मिता और स्थानीय मुद्दों का इस प्रकार मुख्यधारा की राजनीति में घुलना-मिलना न केवल चुनावी समीकरणों को प्रभावित करता है, बल्कि यह वहां के सामाजिक ताने-बाने और जनमानस की मानसिक स्थिति को भी गहराई से आकार देता है। जब मूल निवासियों के अधिकारों, भाषा और सुरक्षा से जुड़े विषय राजनीति के केंद्र में आते हैं, तो यह जनता के बीच अपनेपन और जुड़ाव की भावना को मजबूत करता है। दूसरी ओर, अदालती मामलों पर संयम बरतना यह दर्शाता है कि राजनीतिक नेतृत्व अब कानूनी सीमाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के प्रति अधिक संवेदनशील हो रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था में परिपक्वता का संकेत है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·15 दिन पहले

एएल हेक का बयान और कोयला खनन मामले पर उनकी चुप्पी राज्य की कानूनी और राजनीतिक स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। आईएलपी के विकल्प के तौर पर एमआरएसएसए का सुझाव और खासी भाषा पर रुख से क्षेत्रीय राजनीति में समीकरण बदल सकते हैं। हालांकि, कोयला खनन मामला अदालत के विचाराधीन होने के कारण इस पर कानूनी मर्यादाओं का पालन करना अनिवार्य है, जो आगामी व्यवस्था और कानून-व्यवस्था के लिहाज से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण पहलू है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·15 दिन पहले

एएल हेक का यह रुख पूर्वोत्तर के इस राज्य में क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय संगठनों के बीच वैचारिक तालमेल की नई जमीन तैयार कर रहा है। यूडीपी विधायकों की प्राथमिकताओं के साथ भाजपा का इस तरह खुल कर खड़ा होना भविष्य के राजनीतिक गठजोड़ और चुनावी गणित पर गहरा असर डाल सकता है, जहाँ स्थानीय अस्मिता और क्षेत्रीय मुद्दे मुख्य धुरी बनते दिख रहे हैं।

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