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मेघालय में एडवोकेट जनरल अमित कुमार को हटाने की मांग तेज, वकीलों ने शिलोंग की सड़कों पर निकाला विरोध मार्चमेघालय
27 अग॰ 2026, 4:59 pm (35 दिन पहले)· 1

मेघालय में एडवोकेट जनरल अमित कुमार को हटाने की मांग तेज, वकीलों ने शिलोंग की सड़कों पर निकाला विरोध मार्च

मेघालय के एडवोकेट जनरल अमित कुमार द्वारा की गई कथित टिप्पणियों और बाहरी वकीलों की नियुक्ति के विरोध में शिलोंग में वकीलों ने सचिवालय तक विरोध मार्च निकालकर उनके इस्तीफे की मांग की।

मेघालय के विधिक समुदाय और एडवोकेट जनरल अमित कुमार के बीच जारी विवाद बृहस्पतिवार को उग्र रूप ले चुका है, जब बड़ी संख्या में वकीलों ने शिलोंग की सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी वकीलों ने मेघालय हाई कोर्ट परिसर से राज्य सचिवालय तक विरोध मार्च निकाला और अदालत में सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल द्वारा की गई कथित विवादित टिप्पणियों का विरोध करते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की।

हाई कोर्ट से सचिवालय तक वकीलों का प्रदर्शन

हाई कोर्ट ऑफ मेघालय बार एसोसिएशन और शिलोंग/डिस्ट्रिक्ट कोर्ट बार एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में राजधानी के सैकड़ों अधिवक्ताओं ने हिस्सा लिया। हाथों में बैनर और तख्तियां थामे वकीलों ने स्थानीय कानूनी पेशेवरों के सम्मान को ठेस पहुंचाने के प्रयासों के खिलाफ नारेबाजी की। यह जुलूस हाई कोर्ट परिसर से निकलकर सचिवालय तक गया, जिससे राज्य के मुख्य विधि अधिकारी और स्थानीय वकीलों के बीच छिड़ा संस्थागत विवाद सार्वजनिक रूप से सामने आ गया।

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विवादित टिप्पणियों और बाहरी वकीलों पर लगे नारे

विरोध मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अमित कुमार के खिलाफ अपनी मुख्य मांगों को दर्शाने वाले बैनर लहराए। वकीलों के बैनरों पर "अमित गो बैक" और "बार एसोसिएशनों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां बंद करो" जैसे नारे लिखे हुए थे। इसके अलावा एक प्रमुख बैनर पर लिखा था, "स्थानीय कानूनी विवादों के लिए बाहरी वकीलों को नियुक्त करके मेघालय के कानूनी पेशेवरों का अवमूल्यन करना बंद करो।" इन नारों के माध्यम से वकीलों ने दो मुख्य मुद्दों को रेखांकित किया: पहला, बार के खिलाफ की गई विवादित टिप्पणियां और दूसरा, राज्य सरकार द्वारा स्थानीय मुकदमों के लिए बाहर से वकील बुलाने की नीति।

विवाद का घटनाक्रम और 5 अगस्त का प्रस्ताव

बृहस्पतिवार को सड़कों पर हुआ यह प्रदर्शन कई हफ्तों से बन रहे तनाव का नतीजा है। इस विवाद की शुरुआत मेघालय हाई कोर्ट के समक्ष एक सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल द्वारा दिए गए बयानों से हुई थी। उन बयानों के सामने आने के बाद हाई कोर्ट ऑफ मेघालय बार एसोसिएशन और शिलोंग बार एसोसिएशन ने आपात बैठकें करके प्रस्ताव पारित किए, जिनमें वकीलों और बार के खिलाफ की गई टिप्पणियों की कड़ी निंदा की गई।

इसके बाद 5 अगस्त को आयोजित एक विशेष आम बैठक में विवाद और गहरा गया। इस बैठक में दोनों बार एसोसिएशनों के सदस्यों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर अमित कुमार का नाम अपने रोल से हटा दिया। इसके साथ ही घोषणा की गई कि उनके सदस्य अब अमित कुमार को मेघालय के एडवोकेट जनरल के रूप में मान्यता नहीं देंगे। बैठक के तुरंत बाद बार एसोसिएशनों ने मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा को एक ज्ञापन सौंपकर एडवोकेट जनरल को पद से हटाने के लिए 7 दिन का समय दिया था। उस समय सीमा के समाप्त होने के बाद ही वकीलों ने सड़कों पर उतरने का फैसला किया।

विवादित बयान और खुले पत्र पर वकीलों की आपत्ति

बार निकायों का कहना है कि अमित कुमार ने एक स्वतः संज्ञान मामलों की सुनवाई के दौरान ऐसी बातें कही थीं, जिनसे पूरे कानूनी समुदाय की छवि खराब हुई। इसके बाद एडवोकेट जनरल की ओर से विधिक समुदाय के सदस्यों को संबोधित करते हुए एक खुला पत्र जारी किया गया, जिसे बार एसोसिएशनों ने और भी आपत्तिजनक माना। वकीलों का आरोप है कि इस पत्र से स्थिति सुधरने के बजाय कड़वाहट और बढ़ गई।

बाहरी वकीलों की नियुक्ति और स्वजन पक्षपात के आरोप

अदालत में दिए गए बयानों के अलावा यह विवाद राज्य सरकार के कानूनी प्रबंधन पर भी केंद्रित हो गया है। बार एसोसिएशनों ने मेघालय से बाहर के वकीलों को विभिन्न अदालतों और ट्रिब्यूनलों में राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। स्थानीय वकीलों का कहना है कि इस नीति से राज्य की अपनी कानूनी प्रतिभाओं की उपेक्षा हो रही है।

इसके साथ ही राज्य सरकार के वकीलों की नियुक्ति प्रक्रिया में पक्षपात के गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। बार निकायों का दावा है कि कुछ नियुक्तियां एडवोकेट जनरल के करीबियों और पारिवारिक सदस्यों को फायदा पहुंचाने के लिए की गईं। इन आरोपों से सरकारी कानूनी नियुक्तियों की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

नियुक्तियों और फीस पर आरटीआई याचिका दायर

इन प्रशासनिक गड़बड़ियों की जांच के लिए हाई कोर्ट ऑफ मेघालय बार एसोसिएशन ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत एक आवेदन दाखिल किया है। इस आरटीआई याचिका में राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किए गए वकीलों, उनके चयन आधार और बाहरी वकीलों को भुगतान किए गए भारी-भरकम शुल्क का पूरा ब्योरा मांगा गया है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि आरटीआई का जवाब मिलने के बाद वे पूरी जानकारी का विश्लेषण करेंगे और उसके आधार पर अपनी अगली रणनीति तय करेंगे।

विवाद की शुरुआत: महिला वकीलों की सुरक्षा का मामला

इस पूरे घटनाक्रम की जड़ें मेघालय हाई कोर्ट में महिला वकीलों और लॉ इंटर्न्स की सुरक्षा से जुड़ी एक सुनवाई में निहित हैं। यह मामला तब शुरू हुआ था जब एक महिला लॉ इंटर्न ने एक अधिवक्ता के खिलाफ उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इस शिकायत के बाद एक घटना घटी जिसमें आरोपी वकील के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई और उन्हें सार्वजनिक रूप से घुमाया गया।

अदालत की सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल अमित कुमार ने महिला वकीलों और इंटर्न्स की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था और कहा था कि एक सुरक्षित कार्य वातावरण बनाए रखना बार एसोसिएशन की जिम्मेदारी है। हालांकि स्थानीय वकीलों ने इस बात पर आपत्ति जताई कि एडवोकेट जनरल की प्रस्तुति ने पूरे स्थानीय बार समुदाय को गलत रोशनी में पेश किया।

बार काउंसिल ऑफ मेघालय की कार्रवाई

इसी बीच बार काउंसिल ऑफ मेघालय ने पुष्टि की है कि उसे महिला लॉ इंटर्न की ओर से संबंधित वकील के खिलाफ यौन उत्पीड़न की औपचारिक शिकायत प्राप्त हुई है। बार काउंसिल के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शिकायत पर कानूनी नियमों के अनुसार निष्पक्ष जांच की जा रही है और उचित वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का हस्तक्षेप खारिज

इस विवाद के तूल पकड़ने पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने हस्तक्षेप करते हुए मेघालय हाई कोर्ट बार एसोसिएशन और शिलोंग बार एसोसिएशन से अपने फैसलों पर पुनर्विचार करने की अपील की थी। SCBA का तर्क था कि एडवोकेट जनरल के बयानों को महिला वकीलों की सुरक्षा से जुड़ी अदालत की चिंताओं के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। परंतु मेघालय के बार निकायों ने इस अपील को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि SCBA को उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने किया एडवोकेट जनरल का बचाव

मामले में नया मोड़ 24 अगस्त को आया जब मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने सार्वजनिक रूप से एडवोकेट जनरल अमित कुमार का समर्थन किया। हालांकि मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि उन्होंने कोर्ट की विस्तृत कार्यवाही या बयानों को पूरी तरह से नहीं पढ़ा है, लेकिन उन्होंने अमित कुमार की सराहना करते हुए कहा कि मेघालय भाग्यशाली है कि उसे ऐसा काबिल विधि अधिकारी मिला है। उन्होंने कहा कि अमित कुमार ने सरकार को महत्वपूर्ण कानूनी मामलों में सलाह दी और कई प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने में मदद की है।

मुख्यमंत्री संगमा ने यह भी कहा कि अमित कुमार दिल्ली या भारत के सुप्रीम कोर्ट में स्वतंत्र रूप से अपनी सफल वकालत जारी रख सकते थे, लेकिन उन्होंने मेघालय राज्य की सेवा करना चुना। सरकार के इस समर्थन के बावजूद बार एसोसिएशन अपने रुख पर कायम हैं, जिससे सरकार और स्थानीय कानूनी समुदाय के बीच सीधा टकराव पैदा हो गया है।

कानूनी क्षेत्र में गतिरोध बरकरार

बृहस्पतिवार का विरोध प्रदर्शन प्रस्तावों और ज्ञापनों से आगे बढ़कर सीधे सड़कों पर संघर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। एक तरफ जहां बार एसोसिएशन एडवोकेट जनरल को हटाने की अपनी मांग पर अड़ी हुई हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार अपने शीर्ष कानून अधिकारी के पीछे खड़ी है। बार नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन राज्य के कानूनी पेशे की गरिमा और स्वायत्तता की रक्षा के लिए आवश्यक है, और यदि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

सवाल-जवाब

शिलोंग में वकील किस बात का विरोध कर रहे हैं?
वकील मेघालय के एडवोकेट जनरल अमित कुमार को उनके विवादित बयानों, अपमानजनक पत्र और बाहरी वकीलों की नियुक्ति के विरोध में पद से हटाने की मांग कर रहे हैं।
एडवोकेट जनरल और बार के बीच विवाद की शुरुआत कब हुई?
यह विवाद मेघालय हाई कोर्ट में महिला वकीलों और इंटर्न्स की सुरक्षा पर हुई सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल द्वारा दिए गए बयानों से शुरू हुआ था।
बार एसोसिएशन ने 5 अगस्त की बैठक में क्या फैसला लिया था?
5 अगस्त की विशेष आम बैठक में बार एसोसिएशनों ने अमित कुमार का नाम अपने रोल से हटा दिया और उन्हें एडवोकेट जनरल के रूप में मान्यता देना बंद कर दिया।
मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा का इस मामले पर क्या रुख है?
मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने 24 अगस्त को सार्वजनिक रूप से अमित कुमार का समर्थन करते हुए कहा था कि मेघालय खुशकिस्मत है कि उसे इतना काबिल विधि अधिकारी मिला है।
वकीलों ने आरटीआई क्यों दाखिल की है?
वकीलों ने राज्य के सरकारी वकीलों की नियुक्तियों, उनमें संभावित पक्षपात और बाहरी वकीलों को दी गई फीस का ब्योरा जानने के लिए आरटीआई दाखिल की है।
क्या सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने इसमें हस्तक्षेप किया था?
हां, SCBA ने स्थानीय बार एसोसिएशनों से अपना प्रस्ताव वापस लेने की अपील की थी, लेकिन मेघालय के बार निकायों ने इसे अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताकर खारिज कर दिया।
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