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मेघालय में रविवार को बैंक खोलने के निर्देश का कॉमसो ने किया विरोध, फैसला वापस लेने की मांगमेघालय
24 सित॰ 2026, 11:16 am (7 दिन पहले)· 1

मेघालय में रविवार को बैंक खोलने के निर्देश का कॉमसो ने किया विरोध, फैसला वापस लेने की मांग

27 सितंबर को सरकारी और ग्रामीण बैंकों को खुला रखने के वित्त मंत्रालय के फैसले पर मेघालय में नागरिक संगठन कॉमसो ने आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि यह निर्णय स्थानीय धार्मिक और सामाजिक परंपराओं की अनदेखी करता है।

वित्त मंत्रालय द्वारा 27 सितंबर यानी रविवार के दिन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को खुला रखने के निर्देश के बाद मेघालय में विरोध के स्वर उभरने लगे हैं। यह आदेश 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल के मद्देनजर जारी किया गया था, ताकि वित्तीय सेवाओं में किसी तरह का व्यवधान न आए। हालांकि, राज्य के प्रमुख नागरिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ मेघालय सोशल ऑर्गेनाइजेशन्स (कॉमसो) ने इस कदम पर कड़ा ऐतराज जताते हुए अधिकारियों से फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। संगठन के महासचिव बालकारिन सीएच मारक की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि रविवार को बैंक खोलने का आदेश राज्य के लोगों की धार्मिक और सामाजिक मान्यताओं पर चोट करता है।

प्रशासनिक सुविधा और धार्मिक परंपरा का टकराव

कॉमसो ने माना कि निर्बाध बैंकिंग सेवाएं बनाए रखना सरकार की एक जायज प्रशासनिक चिंता हो सकती है, लेकिन सिर्फ प्रशासनिक सुविधा के लिए किसी राज्य की धार्मिक और सामाजिक वास्तविकताओं को दरकिनार नहीं किया जाना चाहिए। मेघालय में रविवार का दिन पारंपरिक रूप से पूजा-अर्चना, प्रार्थना, पारिवारिक मेल-मिलाप और विश्राम के लिए समर्पित रहता है। संगठन ने सवाल उठाया कि राज्य-विशिष्ट परिस्थितियों पर परामर्श किए बिना बैंक कर्मियों को इस पवित्र दिन पर काम करने के लिए मजबूर करना पूरी तरह अनुचित है। बयान में रेखांकित किया गया कि मेघालय केवल किसी राष्ट्रीय प्रशासनिक ढांचे का एक साधारण भौगोलिक हिस्सा भर नहीं है, बल्कि इस राज्य की अपनी विशिष्ट सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान है, जिसे नीतियां लागू करते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए।

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रविवार के बजाय सुझाए गए व्यावहारिक विकल्प

संगठन ने यह तर्क भी दिया कि बैंक कर्मियों को रविवार को काम पर बुलाने के बजाय अन्य व्यावहारिक विकल्पों पर काम किया जा सकता था। हड़ताल अवधि से पहले बैंकिंग घंटों को बढ़ाना, एटीएम और डिजिटल लेनदेन सेवाओं को मजबूत करना और सीमित आपातकालीन व्यवस्थाएं तैयार करना जैसे उपाय लागू किए जा सकते थे, जिससे आम जनता को असुविधा भी न होती और रविवार की महत्ता भी बनी रहती। कॉमसो ने जोर देकर कहा कि बैंक ग्राहकों की सुविधा को कर्मचारियों और बहुसंख्यक आबादी की जायज धार्मिक और सामाजिक भावनाओं की कीमत पर प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए।

हितधारकों से परामर्श और भविष्य की चेतावनी

कॉमसो ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक, संबंधित सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और मेघालय सरकार से मांग की है कि वे इस फैसले की राज्य में प्रासंगिकता की तुरंत समीक्षा करें। संगठन ने कहा कि जब कोई निर्णय लोगों के धार्मिक और सामाजिक जीवन में गहराई से जुड़ी प्रथाओं को सीधे प्रभावित करता है, तो अधिकारियों की यह बुनियादी जिम्मेदारी बनती है कि वे लोगों की बात सुनें, संवाद करें और संवेदनशील रुख अपनाएं। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि चिंताओं को दूर किए बिना इस फैसले को जबरन आगे बढ़ाया गया, तो वह समय आने पर उचित कदम उठाने के लिए बाध्य होगा।

सवाल-जवाब

कॉमसो किस बात का विरोध कर रहा है?
कॉमसो वित्त मंत्रालय के उस आदेश का विरोध कर रहा है जिसमें मेघालय में रविवार 27 सितंबर को सरकारी और ग्रामीण बैंकों को खुला रखने का निर्देश दिया गया है।
वित्त मंत्रालय ने रविवार को बैंक खोलने का निर्देश क्यों दिया था?
28 से 30 सितंबर तक होने वाली प्रस्तावित देशव्यापी बैंक हड़ताल के कारण वित्तीय सेवाओं को जारी रखने के लिए यह निर्देश दिया गया था।
मेघालय में रविवार को बैंक खोलने पर क्या आपत्ति है?
मेघालय में रविवार को पारंपरिक रूप से पूजा, प्रार्थना, पारिवारिक मेल-मिलाप और विश्राम के दिन के रूप में देखा जाता है, इसलिए इसे कार्यदिवस बनाने का विरोध हो रहा है।
कॉमसो ने रविवार के स्थान पर क्या विकल्प सुझाए हैं?
संगठन ने हड़ताल से पहले कामकाजी घंटे बढ़ाने, एटीएम और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं को सुदृढ़ करने और सीमित आपातकालीन व्यवस्थाएं करने का सुझाव दिया है।
यह बयान कॉमसो के किस पदाधिकारी द्वारा जारी किया गया है?
यह आधिकारिक बयान कॉमसो के महासचिव बालकारिन सीएच मारक द्वारा जारी किया गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·6 दिन पहले

रविवार को बैंक खोलना गलत है, यहाँ लोग उस दिन चर्च और परिवार के साथ रहते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·6 दिन पहले

बालकारिन मारक का यह कहना बिल्कुल सही है कि सिर्फ हड़ताल से निपटने के लिए रविवार की छुट्टी रद्द करना ठीक नहीं। बैंक कर्मचारियों की अपनी धार्मिक और पारिवारिक मान्यताएं भी हैं, जिनका सम्मान होना चाहिए।

Tanvi Desai@tanvi-desai·6 दिन पहले

रविकेश, बालकारिन मारक का बयान सही है, लेकिन क्या हड़ताल के दिन बैंक बंद रहने से लोगों को बहुत परेशानी नहीं होगी?

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

रविवार को बैंक खोलना वाकई गलत है, यहाँ लोग इस दिन चर्च और परिवार के साथ होते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·6 दिन पहले

बिल्कुल सही कहा करण, मेघालय में रविवार का दिन पूरी तरह परिवार और प्रार्थना के लिए होता है, ऐसे में अचानक बैंक खोलना सही नहीं है।

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