मेघालय के राजनीतिक पटल पर बड़ा सत्ता समीकरण देखने को मिला है, जहां यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के 12 में से 8 विधायकों ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। इस सामूहिक पाला बदल के बाद विधानसभा में यूडीपी के खेमे में अब केवल 4 विधायक ही शेष रह गए हैं। विधायकों के इस समूह का नेतृत्व खलीहियात विधानसभा क्षेत्र के विधायक क्यिरमेन श्याला कर रहे थे। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने पूर्वोत्तर के इस पहाड़ी राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन और क्षेत्रीय दलों के गणित को पूरी तरह बदल दिया है।
केंद्रीय नेतृत्व और अमित शाह से मुलाकात के बाद फैसला
पार्टी बदलने की औपचारिक प्रक्रिया से पहले इन विधायकों ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की थी। इस बैठक में राज्य के विकास और राजनीतिक स्थिरता को लेकर चर्चा हुई, जिसके बाद विधायकों ने औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल होने का कदम उठाया। दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से सहमति मिलने के तुरंत बाद बुधवार को इन आठों विधायकों को आधिकारिक तौर पर पार्टी की सदस्यता दिलाई गई।
सितंबर महीने से ही शुरू हो गई थी सियासी हलचल
यूडीपी के भीतर इस टूट की पृष्ठभूमि पहले से तैयार हो रही थी। इन विधायकों के शामिल होने से पूर्व, 12 सितंबर को यूडीपी के पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता डॉ. जेमिनो मावथोह ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। मावथोह के पार्टी में जाने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि संगठन के अन्य प्रभावशाली चेहरे भी जल्द ही नया राजनीतिक रास्ता चुन सकते हैं। खलीहियात विधायक क्यिरमेन श्याला के नेतृत्व में आठ विधायकों के एक साथ आने से अब यूडीपी विधायी दल का दो तिहाई से अधिक हिस्सा अलग हो चुका है।


















