देश की राजधानी में चुनावी निष्पक्षता और मतदान प्रणाली को लेकर सत्ता पक्ष तथा विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव अत्यधिक तेज हो गया है। शुक्रवार के दिन विपक्षी दलों के संयुक्त मोर्चे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की पुरजोर मांग करते हुए एक बड़ा विरोध कार्यक्रम आयोजित किया। संसद परिसर से लेकर विजय चौक तक विरोधी दलों के तमाम प्रमुख नेताओं ने जोरदार तरीके से अपनी आवाज बुलंद की और सीधे तौर पर आरोप लगाया कि चुनावी व्यवस्था में भारी अनियमितताएं हो रही हैं। इस सिलसिले में विपक्षी गठबंधन का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति भवन पहुंचा, जहां उन्होंने देश की संवैधानिक मुखिया राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करके अपना औपचारिक मांग पत्र सौंपा।
संसद भवन परिसर में मीडिया कर्मियों से चर्चा करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सत्तारूढ़ दल के रवैये की कड़ी आलोचना की। उन्होंने मशहूर हिंदी सिनेमा शोले के खलनायक गब्बर सिंह के बहुचर्चित संवाद का उदाहरण देते हुए कटाक्ष किया कि जो व्यक्ति भयभीत होता है, वह आज अथवा कल जरूर समाप्त होता है। खरगे का स्पष्ट कहना था कि शासन व्यवस्था विपक्ष के बढ़ते जनआंदोलन को देखकर घबरा चुकी है और इसी घबराहट की वजह से मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके दायित्व से अलग करने के लिए कतई सहमत नहीं हो रही है।
चुनाव आयोग के भीतर आंतरिक मतभेद का बड़ा दावा
कांग्रेस अध्यक्ष ने निर्वाचन आयोग के आंतरिक कामकाज पर भी कई गंभीर सवाल खड़े किए। मल्लिकार्जुन खरगे ने दावा किया कि आयोग के दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी स्वयं मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज और फैसलों से पूरी तरह सहमत नहीं थे। उनका कहना था कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने ज्ञानेश कुमार के कई निर्णयों को लेकर बार-बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं, मगर मुख्य चुनाव आयुक्त ने उन आपत्तियों को स्वीकार करने से साफ मना कर दिया। खरगे ने शासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि दो अन्य आयुक्तों की तरफ से उठाए गए सवालों और ऐतराज के बावजूद केंद्र सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है और उन्हें हटाने से लगातार बच रही है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को सौंपा गया ज्ञापन, रखे गए साक्ष्य के बिंदु
विपक्षी गठबंधन के तमाम वरिष्ठ प्रतिनिधि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे के एकसूत्रीय एजेंडे के साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के समक्ष उपस्थित हुए। नेताओं ने राष्ट्रपति को एक विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया जिसमें समूची निर्वाचन प्रणाली पर अपनी गंभीर चिंताएं दर्ज कराई गईं। बैठक समाप्त होने के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने जानकारी दी कि उनका गठबंधन पिछले चार दिनों से लगातार मतों की कथित चोरी के विषय पर आंदोलन चला रहा है। इसी संबंध में राष्ट्रपति को वस्तुस्थिति से अवगत कराने और निष्पक्ष जांच व ठोस कदम उठाने का अनुरोध किया गया।
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रतिनिधिमंडल ने वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम के स्थान पर पारंपरिक बैलेट पेपर के जरिए मतदान कराने की औपचारिक मांग भी राष्ट्रपति के समक्ष रखी है। बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ने विपक्ष द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के संबंध में ठोस प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा। खरगे ने बताया कि उनका दल सभी आवश्यक प्रमाणों को संकलित कर रहा है और बहुत जल्द ही उन सभी दस्तावेजों को राष्ट्रपति भवन के सुपुर्द कर दिया जाएगा।
राहुल गांधी और ममता बनर्जी ने साझा किया राष्ट्रपति भवन का अनुभव
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी राष्ट्रपति के साथ हुई इस उच्चस्तरीय चर्चा के संदर्भ में अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ने विपक्षी प्रतिनिधिमंडल की बातों को सिरे से दरकिनार नहीं किया, बल्कि पूरे मामले को ध्यानपूर्वक सुना और उठाए गए बिंदुओं के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज तथा सबूत पेश करने के लिए कहा। राहुल गांधी ने वर्ष 2024 के आम चुनाव का विशेष उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस दौरान भी बड़े पैमाने पर मतों की हेराफेरी की गई थी। उन्होंने भरोसा जताया कि विपक्ष अपने तमाम साक्ष्य राष्ट्रपति को प्रस्तुत करेगा और राष्ट्रपति ने भी इस पूरे विषय पर विचार करने तथा आवश्यक कदमों की संभावना तलाशने की बात कही है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का रुख बहुत संवेदनशील और सकारात्मक दिखाई दिया, जिन्होंने ज्ञापन स्वीकार करने के उपरांत पूरे घटनाक्रम के विवरण और सबूतों की समीक्षा करने का भरोसा दिलाया। ममता बनर्जी के अनुसार, संविधान के सर्वोच्च संरक्षक के रूप में लोकतांत्रिक मर्यादाओं की रक्षा करना राष्ट्रपति की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इंडिया गठबंधन इस पूरे मुद्दे पर पूरी मजबूती और एकजुटता के साथ खड़ा है।
दिल्ली में मेट्रो स्टेशनों पर लगी रोक पर कांग्रेस का प्रहार
विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन और खासकर मेट्रो परिचालन पर लागू किए गए प्रतिबंधों को लेकर भी विपक्षी नेताओं ने केंद्र पर सीधा निशाना साधा। नेताओं का आरोप था कि जनविरोध को कुचलने के लिए सामान्य नागरिकों की आवाजाही को जबरन बाधित किया जा रहा है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कई मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे सरकार का डर और कायरता करार दिया।
उधर कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने भी प्रशासनिक पाबंदियों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शहर भर के 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया है, जिसके कारण अपने काम पर निकलने वाले आम कामकाजी लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इसे पूरी तरह से विधि-व्यवस्था का संकट और प्रशासनिक विफलता करार दिया।
विजय चौक पर दिग्गज विपक्षी मुख्यमंत्रियों और नेताओं का महाजमावड़ा
राष्ट्रपति भवन जाने से पूर्व विपक्षी गठबंधन के तमाम बड़े नेता दिल्ली के विजय चौक पर एकजुट हुए थे। वहां एकत्रित नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और निष्पक्ष चुनाव की मांग दोहराई। इस जोरदार विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी वाड्रा प्रमुखता से शामिल रहे।
इसके अलावा गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी अपने पूरे दल-बल के साथ इस मार्च का हिस्सा बने। इनमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू प्रमुख थे। साथ ही कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, अभिषेक बनर्जी, भूपेश बघेल और कुमारी सैलजा सहित कई अन्य वरिष्ठ सांसदों और राजनेताओं ने भी विजय चौक पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
















