नन्हे हाथों में जब रंग और कूची आती है, तो वे कागज़ पर सिर्फ रेखाएं नहीं खींचते, बल्कि दुनिया को देखने का अपना नजरिया सामने रख देते हैं। देश की राजधानी में स्कूली विद्यार्थियों ने अपनी कल्पना के जरिए यह साबित किया कि शांति किसी भारी-भरकम सिद्धांत का नाम नहीं, बल्कि आपसी प्यार, समझ और सहयोग की एक सहज भावना है। बच्चों ने अपनी कलाकृतियों में अलग-अलग संस्कृतियों के मेलजोल को दर्शाते हुए दुनिया भर में भाईचारे का पैगाम दिया।
पुष्प विहार में जुटा नन्हे कलाकारों का हुजूम
राजधानी के पुष्प विहार इलाके में बने एमिटी इंटरनेशनल स्कूल परिसर में 8 अक्टूबर को कलर्स फॉर पीस कार्यक्रम का आयोजन संपन्न हुआ। इस खास आयोजन के दौरान दिल्ली-एनसीआर के लगभग 700 विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक उपस्थिति दर्ज कराई। इसके अलावा यदि समूचे देश के स्तर पर बात करें, तो करीब 1500 छात्र-छात्राओं ने अपनी कलात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से अमन और सद्भाव का संदेश फैलाया। इस पूरी मुहिम की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि इसमें नामी निजी स्कूलों के साथ-साथ स्ट्रीट स्कूलों में तालीम ले रहे वंचित तबके के बच्चे भी कंधे से कंधा मिलाकर शामिल हुए। इस प्रयास का बुनियादी मकसद बच्चों को अपनी भावनाएं साझा करने का मंच देना और उन्हें यह समझाना था कि विश्व में सुकून कायम रखने की पहली शर्त एक-दूसरे के प्रति सम्मान रखना है।
रंगों के जरिए बच्चों ने बयां किया अपना नजरिया
आयोजन में शरीक बच्चों की सोच बेहद परिपक्व और प्रेरणादायी नजर आई। पांचवीं कक्षा की छात्रा काश्वी ने कैनवास पर मेलजोल और सद्भाव की तस्वीर खींची। उसका मानना था कि तमाम समुदायों को बिना किसी भेदभाव के बराबर दर्जा मिलना चाहिए और सभी को मिलजुलकर कदम आगे बढ़ाना चाहिए। वहीं दूसरी ओर अनुरा गुप्ता ने अपनी कृति में विश्व की विविध संस्कृतियों के सह-अस्तित्व को खूबसूरत ढंग से उकेरा। उसका कहना था कि जब लोग आपस में हाथ मिलाते हैं, तो उनकी सामूहिक शक्ति कई गुना मजबूत हो जाती है। इन नन्हें रचनाकारों के लिए शांति का अर्थ केवल टकराव से दूर रहना नहीं है, बल्कि दूसरों की पहचान को तहे दिल से स्वीकार करना है।
टकराव छोड़कर दोस्ती का हाथ बढ़ाने की अपील
तीसरी कक्षा के छात्र प्रद्युत राज गुप्ता ने सहज शब्दों में कहा कि इंसानों को आपस में रंजिशें भुलाकर सिर्फ मित्र बनकर रहना चाहिए। वहीं तीसरी कक्षा के ही तरव धांकर ने आपसी सामंजस्य पर आधारित रचना प्रस्तुत की। उसका संदेश था कि लोगों को मतभेदों पर उलझने के बजाय अपनी-अपनी विशिष्ट पहचान का सम्मान करना सीखना होगा। छठी कक्षा में अध्ययनरत अनिष्का करमाकर ने वैश्विक स्तर पर अमन-चैन का खाका खींचा। उसका जोर इस बात पर था कि मुल्क में सभी वर्गों को एकजुट रहना चाहिए ताकि समाज में किसी किस्म की अशांति न फैले।
अंतरराष्ट्रीय हस्तियों और राजनयिकों की मौजूदगी
इस रंगारंग समागम में वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर के कई प्रमुख चेहरे उपस्थित रहे। ट्यूनीशिया के पूर्व प्रधानमंत्री मेहदी जोमा के साथ ही भारत में इटली के राजदूत एंटोनियो बार्तोली ने शिरकत की। इसके अलावा दिल्ली की पूर्व महापौर आरती मेहरा, कलर्स फॉर पीस इंडिया की एंबेसडर अरुणिमा कुकरेजा तथा कलर्स फॉर पीस के संस्थापक एंटोनियो जियानेली भी मंच पर मौजूद रहे। अरुणिमा कुकरेजा ने रेखांकित किया कि यह मंच बच्चों को अपनी सांस्कृतिक धरोहर और निजी विचारों को साझा करने का अवसर देता है। उन्होंने जानकारी दी कि भारत के प्रतिभावान बच्चों द्वारा रचे गए चित्रों को इटली में प्रदर्शित किया जाएगा, जिसके बाद अगले साल इटली के बच्चों की कलाकृतियों को हिंदुस्तान लाने की रूपरेखा है।
भारत में इटली के राजदूत ने इस मौके पर कहा कि कला बच्चों को दूसरों के जज्बात को गहराई से समझने की ताकत देती है। उन्होंने संवाद और शिक्षा के जरिए समाज में शांति की बुनियाद मजबूत करने पर बल दिया।
2027 में इटली में लगेगी भारतीय कलाकृतियों की नुमाइश
इस पूरे कार्यक्रम का समापन एक भव्य कला प्रदर्शनी के साथ हुआ, जिसमें बच्चों के हुनर को सराहा गया। इसमें चुनी गई कुछ बेहतरीन पेंटिंग्स को साल 2027 में इटली में होने वाली वैश्विक प्रदर्शनी का हिस्सा बनाया जाएगा। इसके साथ ही भारतीय और इटालियन विद्यालयों को डिजिटल माध्यम से जोड़ने का भी प्रस्ताव रखा गया है, ताकि दोनों मुल्कों के बच्चे एक-दूसरे की सोच, परंपरा और विचारों को सीधे संवाद से समझ सकें।























