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मुलेठी को मामूली जड़ी समझकर रोज खाना पहुंचा सकता है सेहत को नुकसानउत्तराखंड
19 सित॰ 2026, 2:08 pm (3 दिन पहले)· 1

मुलेठी को मामूली जड़ी समझकर रोज खाना पहुंचा सकता है सेहत को नुकसान

आयुर्वेद में मुलेठी को गले की खराश और पाचन के लिए असरदार माना गया है, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा सेवन ब्लड प्रेशर और हृदय पर गंभीर असर डाल सकता है।

पारंपरिक घरेलू उपचारों में मुलेठी की गिनती बेहद लोकप्रिय जड़ी-बूटियों में होती है। गले में अचानक खराश महसूस हो या लगातार सूखी खांसी परेशान कर रही हो, बुजुर्ग अक्सर मुलेठी का छोटा टुकड़ा चूसने या इसका काढ़ा बनाकर पीने की सलाह देते हैं। पेट की गड़बड़ी और पाचन संबंधी परेशानियों से राहत पाने के लिए भी इसका उपयोग काफी आम है। कई लोग इसे पूरी तरह कुदरती मानकर बिना किसी नियम के हर दिन खाना शुरू कर देते हैं, जिससे फायदे की जगह परेशानियां बढ़ने लगती हैं।

लंबे समय तक मुलेठी के सेवन से जुड़ी जटिलताएं

किसी भी प्राकृतिक जड़ी-बूटी का स्वास्थ्य लाभ तभी मिलता है जब उसका प्रयोग संयमित मात्रा में और निश्चित अवधि के लिए किया जाए। मुलेठी के अधिक या अनियंत्रित सेवन से शरीर के आंतरिक संतुलन पर नकारात्मक असर पड़ता है। विशेष रूप से वे लोग जो पहले से ही हृदय रोग, गुर्दे की खराबी या उच्च रक्तचाप जैसी पुरानी बीमारियों से जूझ रहे हैं, उन्हें इसके अत्यधिक उपयोग से गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

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ग्लाइसीराइज़िन के कारण शरीर में खनिज असंतुलन

आयुष विशेषज्ञ डॉ. राजकुमार के अनुसार, मुलेठी के भीतर ग्लाइसीराइज़िन नाम का एक खास सक्रिय यौगिक मौजूद होता है। यह तत्व जहां एक तरफ औषधीय गुणों के लिए जिम्मेदार है, वहीं दूसरी तरफ ज्यादा मात्रा में शरीर में पहुंचने पर जटिलताएं भी पैदा करता है। जब कोई व्यक्ति लगातार मुलेठी का सेवन करता है, तो ग्लाइसीराइज़िन के प्रभाव से शरीर में सोडियम और पानी रुकने लगता है, जिससे रक्तचाप अनियंत्रित होकर बढ़ सकता है।

इसके साथ ही शरीर में मौजूद जरूरी खनिज पोटैशियम का स्तर तेजी से नीचे गिरने लगता है। पोटैशियम हमारे शरीर की नसों और मांसपेशियों के सामान्य कामकाज के लिए अनिवार्य माना जाता है। इस खनिज की कमी होने पर अत्यधिक थकावट, शारीरिक कमजोरी, मांसपेशियों में खिंचाव या ऐंठन और सिरदर्द जैसे लक्षण उभर आते हैं। कई मामलों में अत्यधिक पानी जमा होने के कारण पैरों और पंजों में सूजन भी देखी जा सकती है।

प्राकृतिक होने का मतलब पूरी तरह सुरक्षित होना नहीं

जनमानस में यह धारणा बहुत गहरी है कि आयुर्वेदिक और कुदरती उपचारों का शरीर पर कोई दुष्परिणाम नहीं होता। यह सोच बेहद भ्रामक साबित हो सकती है, क्योंकि किसी भी प्राकृतिक तत्व की अत्यधिक मात्रा शरीर की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती है। खासकर उच्च रक्तचाप की नियमित दवा ले रहे मरीजों को मुलेठी का दैनिक उपयोग करने से पहले बेहद सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि यह दवाओं के प्रभाव को प्रभावित कर सकती है।

गुर्दे या हृदय संबंधी विकारों का इलाज करा रहे व्यक्तियों को बिना चिकित्सकीय परामर्श के लंबे समय तक मुलेठी कभी नहीं लेनी चाहिए। जो लोग किसी अन्य पुरानी बीमारी की दवाएं ले रहे हैं, उन्हें भी अपनी दैनिक दिनचर्या में मुलेठी शामिल करने से पहले किसी योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से मिलकर इसकी सुरक्षित मात्रा की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए।

सवाल-जवाब

मुलेठी का मुख्य रूप से किस काम के लिए इस्तेमाल किया जाता है?
घरेलू नुस्खों में मुलेठी का इस्तेमाल आमतौर पर गले की खराश, खांसी और पाचन से जुड़ी सामान्य दिक्कतों से राहत पाने के लिए किया जाता है।
मुलेठी के अधिक सेवन से क्या नुकसान हो सकता है?
लगातार ज्यादा मुलेठी खाने से शरीर में सोडियम और पानी जमा होने लगता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर और पोटैशियम की कमी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
मुलेठी में कौन सा तत्व स्वास्थ्य पर उल्टा असर डालता है?
मुलेठी में ग्लाइसीराइज़िन नाम का सक्रिय यौगिक होता है, जिसकी अधिक मात्रा शरीर में खनिज संतुलन बिगाड़कर परेशानियां खड़ी करती है।
किन मरीजों को मुलेठी खाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए?
हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों को मुलेठी का नियमित सेवन करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लेना चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Tanvi Desai@tanvi-desai·2 दिन पहले

यह खबर एक बड़े स्वास्थ्य भ्रम को तोड़ती है। डिजिटल मीडिया में अक्सर प्राकृतिक उत्पादों को पूरी तरह सुरक्षित बताकर परोसा जाता है, जिससे लोग बिना सोचे-समझे इनका अत्यधिक सेवन करने लगते हैं। ग्लाइसीराइज़िन के कारण होने वाला मिनरल असंतुलन यह साबित करता है कि हर जड़ी-बूटी को वैज्ञानिक और नियंत्रित दृष्टिकोण से ही लिया जाना चाहिए।

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 दिन पहले

यह लेख इस बात को रेखांकित करता है कि प्राकृतिक जड़ी-बूटियों के अनियंत्रित उपयोग से सार्वजनिक स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ सकता है। ग्लाइसीराइज़िन के कारण सोडियम और पानी रुकने से रक्तचाप बढ़ना और पोटैशियम का स्तर गिरना एक गंभीर शारीरिक असंतुलन पैदा करता है। यदि सरकारी नीतियों और आयुष प्रणालियों के तहत पारंपरिक औषधियों के सही इस्तेमाल और उनकी संभावित जटिलताओं पर जन-जागरूकता अभियान नहीं चलाए गए, तो हृदय और उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए यह बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·2 दिन पहले

यह मामला केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि हर्बल उत्पादों के बढ़ते वैश्विक बाज़ार और उपभोक्ता रुझानों से भी जुड़ा हुआ है। जब प्राकृतिक और वैकल्पिक चिकित्सा उत्पादों का बिना चिकित्सकीय देखरेख के भारी मात्रा में उपभोग किया जाता है, तो यह अनजाने में स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली और कॉर्पोरेट स्तर पर भी चिंताएं पैदा करता है। इस तरह के वित्तीय और स्वास्थ्य जोखिमों से बचने के लिए यह जरूरी है कि विनियामक संस्थाएं और संबंधित मंत्रालय इन उत्पादों के सुरक्षित सेवन को लेकर सख्त दिशा-निर्देश और स्पष्ट चेतावनी लेबल अनिवार्य करें, ताकि बढ़ते हर्बल बाजार में उपभोक्ता सुरक्षित रह सकें।

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 दिन पहले

यह खबर केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बाज़ार में बिना नियम बिकने वाली प्राकृतिक जड़ी-बूटियों के प्रति उपभोक्ता जागरूकता और विधिक नियंत्रण का गंभीर मुद्दा है। जब लोग इसे हानिरहित मानकर बिना डॉक्टर की सलाह के लेते हैं, तो यह जनस्वास्थ्य के लिए बड़ा जोखिम बन जाता है। इस तरह के मामलों में खाद्य और औषधि सुरक्षा मानकों के तहत जनता को चेतावनी जारी करना और भ्रामक प्रचार रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है ताकि गंभीर परिणामों से बचा जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·2 दिन पहले

यह केवल एक व्यक्तिगत स्वास्थ्य का मामला नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के बाजारों में बिना पर्ची के बिकने वाली जड़ी-बूटियों और पारंपरिक उत्पादों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है। खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी वनस्पति आधारित सामग्रियों के पैकेट पर स्पष्ट चेतावनी और सेवन की सीमा दर्ज हो, ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के उपभोक्ता अनजाने में होने वाले मिनरल असंतुलन और रक्तचाप के खतरे से बच सकें।

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