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मुर्शिदाबाद के इकबाल हुसैन को मिली असहनीय जलन से मुक्ति, मुंबई में चले गहन इलाज के बाद लौटे घरभारत
21 सित॰ 2026, 5:14 pm (35 दिन पहले)· 0

मुर्शिदाबाद के इकबाल हुसैन को मिली असहनीय जलन से मुक्ति, मुंबई में चले गहन इलाज के बाद लौटे घर

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद निवासी इकबाल हुसैन त्वचा की गंभीर जलन और रहस्यमयी बीमारी से उबरकर घर लौट आए हैं। अनंत अंबानी की पहल पर रिलायंस अस्पताल में 35 दिनों तक चले इलाज के बाद उनकी हालत में बड़ा सुधार हुआ है।

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में स्थित बेलडांगा निवासी इकबाल हुसैन के लिए जिंदगी अब सामान्य पटरी पर लौट रही है। एक बेहद कष्टकारी और रहस्यमयी शारीरिक व्याधि के शिकार इकबाल शरीर में होने वाली असहनीय जलन से चौबीसों घंटे बेहाल रहते थे। इस भयानक तपन और जलन को कम करने के लिए उनके पास पानी के अलावा कोई अन्य रास्ता नहीं बचता था। शारीरिक तकलीफ इतनी विकट थी कि वे राहत पाने के लिए अपने गांव के तालाब के ठंडे पानी में लगातार पांच से छह दिनों तक डूबे रहने को विवश हो गए थे। भोजन से लेकर दिन बिताने तक, तालाब का पानी ही उनके बचने का एकमात्र सहारा बन चुका था।

रहस्यमयी बीमारी और गांव के तालाब में कटी जिंदगी

इकबाल हुसैन जिस गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे थे, उसने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को पूरी तरह थाम दिया था। शरीर पर उठने वाली आग जैसी जलन के कारण वे बिस्तर, कुर्सी या सामान्य जमीन पर कुछ पल भी नहीं टिक पाते थे। सूखे वातावरण में उनके लिए बैठना या लेटना तक नामुमकिन हो गया था। इस वजह से वे कई दिनों तक लगातार गांव के तालाब के भीतर ही पड़े रहते थे। उनका खाना-पीना भी उसी पानी के बीच ही कराया जाता था। परिवार की खराब आर्थिक स्थिति के चलते परिजन उनका किसी बड़े और सर्वसुविधायुक्त चिकित्सा केंद्र में सही उपचार कराने में पूरी तरह असमर्थ थे। इस बेबसी और मानवीय पीड़ा की जानकारी सामने आने पर मदद की दिशा में कदम बढ़ाए गए।

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अनंत अंबानी का दखल और विशेष चिकित्सा टीम का गठन

इस पूरे मामले की जानकारी मिलने पर रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानी ने मेडिकल एक्सपर्ट्स की एक टीम को उस किशोर की चिकित्सीय जांच करने का निर्देश दिया था। उन्होंने सुनिश्चित किया कि इकबाल को हर आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा मिले, उनका गहन उपचार हो और पूरी तरह ठीक होने के बाद उन्हें बेलडांगा स्थित उनके घर सुरक्षित पहुंचाया जाए। परिवार की माली हालत को देखते हुए अनंत अंबानी ने मामले में संज्ञान लिया और इकबाल के समस्त उपचार, रहने और देखरेख की संपूर्ण जिम्मेदारी उठाई। इसके बाद इकबाल को सुरक्षित रूप से आगे के उपचार के लिए भेजने की तैयारी शुरू की गई।

मुंबई ले जाने की प्रक्रिया और 35 दिनों की गहन चिकित्सा

योजना के मुताबिक 15 अगस्त को इकबाल हुसैन को उनके बेलडांगा स्थित आवास से मुंबई ले जाया गया, जहां उन्हें रिलायंस अस्पताल में दाखिल कराया गया। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की सीधी निगरानी में उनका सघन उपचार शुरू हुआ। वहां लगातार 35 दिनों तक उनकी जांच और थेरेपी का दौर चला। इस आधुनिक चिकित्सा प्रक्रिया के चलते उनकी सेहत में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। उनका अनियंत्रित वजन काफी कम हुआ और त्वचा में उठने वाली तेज जलन व खुजली लगभग समाप्त हो गई। चिकित्सकों के अथक प्रयास और समुचित देखभाल ने इकबाल को एक नई ऊर्जा और स्वस्थ जीवन प्रदान किया।

स्वस्थ होकर बेलडांगा वापसी और परिजनों की खुशी

उपचार की पूरी अवधि पूरी होने और स्वास्थ्य स्थिर होने के बाद रविवार रात रिलायंस जियो टीम के सदस्यों ने अपनी प्रत्यक्ष देखरेख में इकबाल को बेलडांगा स्थित उनके घर पहुंचाया। घर की दहलीज लांघते ही भावुक माहौल बन गया, जहां आंखों में आंसू और चेहरे पर मुस्कान लिए इकबाल ने सबसे पहले अपनी मां को गले लगा लिया। ठीक होने की सूचना मिलते ही उसी रात आसपास के ग्रामीण और पड़ोसी इकबाल से मिलने के लिए उनके घर एकत्र हो गए। बेलडांगा के निवासियों ने अनंत अंबानी की इस मानवीय पहल की खुले दिल से सराहना की है।

परिवार के सदस्यों ने बताया कि इकबाल का वजन पहले से काफी कम हो गया है और उनकी त्वचा की पुरानी खुजली भी अत्यधिक घट चुकी है। वे अब धीरे-धीरे पूरी तरह सामान्य हो रहे हैं। परिजनों ने रिलायंस अस्पताल में मिले उच्च स्तरीय उपचार और देखरेख पर संतोष जताते हुए कहा कि इससे इकबाल को वास्तव में एक नया जीवन हासिल हुआ है।

सवाल-जवाब

इकबाल हुसैन कौन हैं और वे कहां के रहने वाले हैं?
इकबाल हुसैन पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा के रहने वाले एक किशोर हैं, जो एक गंभीर और रहस्यमयी शारीरिक बीमारी से जूझ रहे थे।
इकबाल को तालाब के पानी में क्यों रहना पड़ता था?
पूरे शरीर में उठने वाली भयानक और असहनीय जलन को शांत करने के लिए वे लगातार पांच से छह दिनों तक गांव के तालाब के ठंडे पानी में रहने को मजबूर थे।
इकबाल के इलाज की जिम्मेदारी किसने उठाई थी?
रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानी ने मेडिकल एक्सपर्ट्स की टीम गठित करवाकर इकबाल के पूरे इलाज और देखरेख की जिम्मेदारी संभाली।
इकबाल का इलाज किस अस्पताल में और कितने दिनों तक चला?
इकबाल को मुंबई स्थित रिलायंस अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों की विशेष निगरानी में उनका लगातार 35 दिनों तक इलाज चला।
इलाज के बाद इकबाल की सेहत में क्या बदलाव आया है?
इलाज के बाद उनका वजन नियंत्रित हुआ है, त्वचा की जलन व खुजली लगभग समाप्त हो गई है और वे पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं।
इकबाल को मुंबई कब ले जाया गया था और वे घर कब लौटे?
उन्हें 15 अगस्त को मुंबई ले जाया गया था और 35 दिनों के लंबे इलाज के बाद रविवार रात रिलायंस जियो टीम की देखरेख में बेलडांगा वापस लाया गया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Divya Reddy@divya-reddy·35 दिन पहले

यह घटना स्वास्थ्य सेवा तक समान पहुंच और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के महत्व को रेखांकित करती है। ऐसे गंभीर मामलों में जहां वित्तीय अभाव के कारण युवा शिक्षा और सामान्य जीवन से दूर हो जाते हैं, समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप भविष्य को सुरक्षित करता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस तरह की व्यक्तिगत पहल को सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक स्थायी संस्थागत मॉडल में बदला जा सकेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·35 दिन पहले

यह घटना कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और परोपकारी पहलों के वित्तीय प्रबंधन पर एक गहरा प्रभाव डालती है। जब उद्योगपति व्यक्तिगत रूप से स्वास्थ्य संबंधी संकटों में हस्तक्षेप करते हैं, तो यह न केवल उच्च-स्तरीय चिकित्सा अवसंरचना की प्रभावशीलता को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे लक्षित निवेश और संसाधन आवंटन ग्रामीण भारत में गंभीर स्वास्थ्य संकटों का समाधान कर सकते हैं। भविष्य में ऐसी पहलों का कॉरपोरेट जगत और सामाजिक कल्याण पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा।

Nyra Kaif@nyra-kaif·35 दिन पहले

यह मामला सिर्फ चिकित्सा सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता (क्वालिटी ऑफ़ लाइफ) से भी जुड़ा है। जब कोई युवा असहनीय शारीरिक पीड़ा और महीनों तक तालाब में रहने जैसी लाचारी से गुजरता है, तो उसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव गहरा होता है। ऐसे मामलों में शारीरिक इलाज के साथ-साथ रीहैबिलिटेशन और इमोशनल काउंसलिंग बेहद जरूरी हो जाती है, ताकि मरीज सामान्य सामाजिक जीवन में सहजता से लौट सके।

Rohan Verma@rohan-verma·35 दिन पहले

यह घटना देश के दूरदराज इलाकों में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं के अभाव और आर्थिक तंगी के कारण समय पर इलाज न मिलने की गंभीर जमीनी हकीकत को उजागर करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की यह खाई दर्शाती है कि जब तक कॉर्पोरेट या व्यक्तिगत पहल सामने न आए, तब तक कई गरीब मरीज बुनियादी इलाज से वंचित रह जाते हैं। भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे और दूरस्थ गांवों तक विशेषज्ञ चिकित्सीय पहुंच को मजबूत करना नीति निर्माताओं के लिए एक बड़ी चुनौती रहेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·35 दिन पहले

रोहन वर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह रेखांकित करना आवश्यक है कि देश के ग्रामीण इलाकों में इस तरह के दुर्लभ मामलों की शुरुआती पहचान के लिए जमीनी स्तर पर मेडिकल स्क्रिनिंग का तंत्र लगभग नगण्य है। जब तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टेलीमेडिसिन और विशेषज्ञ परामर्श की पहुंच को अनिवार्य नहीं किया जाता, तब तक गरीब मरीजों को गंभीर अवस्था तक पहुंचने का इंतजार करना पड़ेगा। नीतिगत स्तर पर यह घटना स्वास्थ्य बजट के विकेंद्रीकरण और दूरदराज के जिलों में विशेष मेडिकल यूनिट्स स्थापित करने की सख्त आवश्यकता को स्पष्ट करती है।

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