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नाबालिग के अपहरण और यौन उत्पीड़न मामले में नेपाल मूल के शख्स को 10 साल की सजा, कोर्ट ने खारिज किया प्रेम संबंध का दावामहाराष्ट्र
29 जुल॰ 2026, 10:04 pm (89 दिन पहले)· 3

नाबालिग के अपहरण और यौन उत्पीड़न मामले में नेपाल मूल के शख्स को 10 साल की सजा, कोर्ट ने खारिज किया प्रेम संबंध का दावा

महाराष्ट्र के पालघर की एक विशेष अदालत ने 13 साल की नाबालिग का अपहरण कर नेपाल ले जाने और यौन शोषण करने के मामले में 34 वर्षीय नरेंद्र बहादुर पांडे को 10 साल के कठोर कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

महाराष्ट्र के पालघर जिले की एक अदालत ने 13 वर्षीय नाबालिग लड़की का अपहरण कर उसे नेपाल ले जाने और वहां उसका यौन उत्पीड़न करने के जुर्म में 34 साल के एक व्यक्ति को दोषी ठहराया है। अदालत ने दोषी को 10 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाने के साथ ही 5,000 रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष द्वारा दी गई प्रेम संबंध और सहमति की दलीलों को कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया।

मुंबई से नेपाल तक अपहरण का पूरा मामला

इस आपराधिक मामले की शुरुआत मुंबई के बोरीवली क्षेत्र से हुई थी। नेपाल मूल का रहने वाला अभियुक्त नरेंद्र बहादुर गोरख बहादुर पांडे बोरीवली में पीड़िता के पड़ोस में रहता था, जहां उसकी जान-पहचान इस 13 वर्षीय लड़की से हुई थी। 20 जून 2018 को अभियुक्त ने लड़की को बहला-फुसलाकर पालघर जिले के बोईसर रेलवे स्टेशन बुलाया। वहां से वह नाबालिग को अपने साथ नेपाल स्थित अपने पैतृक गांव ले गया। अभियुक्त ने पीड़िता को करीब एक महीने तक अपने गांव में रोके रखा। वह भली-भांति जानता था कि लड़की नाबालिग है, फिर भी उसने उसके साथ कई बार यौन उत्पीड़न किया। परिजनों की शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था।

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अदालत में प्यार के दावे का खारिज होना

मामले की अदालती कार्रवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि दोनों के बीच प्रेम संबंध था और जो कुछ भी हुआ वह आपसी सहमति से हुआ था। हालांकि, अदालत ने इस दलील को अमान्य घोषित कर दिया। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी की कि पीड़िता कानूनन नाबालिग थी, इसलिए उसकी सहमति की कानूनी तौर पर कोई मान्यता या वैधता नहीं है। विशेष लोक अभियोजक संजय मोरे ने अदालत के समक्ष अभियोजन का पक्ष रखा। आरोपी के खिलाफ जुर्म साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष की ओर से पीड़िता समेत कुल सात गवाहों के बयान और जिरह दर्ज कराई गई।

कानूनी धाराएं और कोर्ट का फैसला

दोनों पक्षों की दलीलें और प्रस्तुत साक्ष्यों की समीक्षा करने के बाद पालघर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एआर रहाणे ने अभियुक्त नरेंद्र बहादुर गोरख बहादुर पांडे को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 363 (अपहरण) और पॉक्सो (POCSO) कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत दोषी पाया। अदालत ने अभियुक्त को 10 साल के कठोर कारावास की सजा भुगतने का आदेश दिया और उस पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

सवाल-जवाब

पालघर अदालत ने इस मामले में किसे दोषी ठहराया है?
अदालत ने नेपाल मूल के 34 वर्षीय व्यक्ति नरेंद्र बहादुर गोरख बहादुर पांडे को दोषी ठहराया है।
दोषी को क्या सजा सुनाई गई है?
अभियुक्त को 10 साल के कठोर कारावास की सजा और 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
बचाव पक्ष ने कोर्ट में क्या दलील दी थी?
बचाव पक्ष के वकील ने दावा किया था कि दोनों के बीच प्रेम संबंध थे और सब कुछ आपसी सहमति से हुआ था।
कोर्ट ने सहमति की दलील को क्यों खारिज कर दिया?
अदालत ने कहा कि चूंकि पीड़िता 13 साल की नाबालिग थी, इसलिए उसकी सहमति की कानून में कोई कानूनी मान्यता नहीं है।
दोषी को किन कानूनी धाराओं के तहत सजा मिली है?
उसे भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 363 (अपहरण) और पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी पाया गया।
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