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नादिया सर्किट हाउस से सांसद को बाहर निकालने के मामले में पश्चिम बंगाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिसपश्चिम बंगाल
1 अक्तू॰ 2026, 3:18 pm (27 दिन पहले)· 0

नादिया सर्किट हाउस से सांसद को बाहर निकालने के मामले में पश्चिम बंगाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा को नादिया के सर्किट हाउस से कथित तौर पर निकाले जाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार और अन्य पक्षों से एक हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.

तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा को नादिया स्थित सर्किट हाउस से कथित तौर पर बाहर निकाले जाने के विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। 1 अक्टूबर को हुई अदालती कार्यवाही के दौरान शीर्ष अदालत ने राज्य प्रशासन से जुड़े अधिकारियों द्वारा सांसद का कमरा खाली कराए जाने के आरोपों पर संज्ञान लिया। कृष्णानगर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली सांसद का कहना है कि राज्य सरकार के स्वामित्व वाले इस परिसर में उनके नाम पर विधिवत एक कमरा आवंटित था, इसके बावजूद जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें वहां से हटने पर मजबूर किया।

शीर्ष अदालत ने एक सप्ताह में मांगा लिखित जवाब

इस मामले की सुनवाई जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष संपन्न हुई। अदालती कार्यवाही के दौरान राज्य सरकार तथा केंद्र की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को अवगत कराया कि वे सांसद द्वारा दायर याचिका पर अपना औपचारिक जवाब दाखिल करेंगे। पीठ ने निर्देश दिया कि सभी संबंधित पक्ष एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब अदालत में प्रस्तुत करें। इसके साथ ही पीठ ने यह व्यवस्था भी दी कि प्रतिवादियों का जवाब आने के बाद याचिकाकर्ता महुआ मोइत्रा को अगले एक सप्ताह के अंदर अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने की छूट होगी, जिसके बाद इस पूरे प्रकरण को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

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14 अगस्त की रात परिसर में जमा हुई थी भारी भीड़

इस पूरे घटनाक्रम की जड़ें 14 अगस्त की रात के वाकये से जुड़ी हैं, जिसका ब्योरा सांसद ने उस समय सोशल मीडिया पर साझा किया था। उन्होंने अपनी पोस्ट में दावा किया था कि नादिया के सर्किट हाउस के बाहर बड़ी तादाद में लोग इकट्ठा हो गए थे। जब सांसद ने परिसर छोड़ने से साफ मना कर दिया, तो उस भीड़ द्वारा वहां पर ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए जाने लगे। मोइत्रा के अनुसार, कमरे का वैध आवंटन होने के बावजूद उन पर जगह खाली करने का भारी दबाव बनाया जा रहा था।

लोकसभा अध्यक्ष से भी की गई थी सीधे हस्तक्षेप की मांग

प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये को लेकर सांसद ने संसद स्तर पर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक औपचारिक पत्र भेजकर नादिया जिला प्रशासन की कार्यशैली की शिकायत की थी। पत्र में आरोप लगाया गया था कि प्रशासनिक तंत्र उन्हें सरकारी परिसर से बेदखल करने की लगातार कोशिशें कर रहा है, इसलिए आसन को इस मसले में दखल देना चाहिए। अब यह विवाद देश की शीर्ष अदालत की चौखट तक पहुंच चुका है, जहां राज्य प्रशासन को अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को क्या निर्देश दिया है?
अदालत ने तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा की याचिका पर पश्चिम बंगाल सरकार और अन्य पक्षों को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है.
महुआ मोइत्रा ने अपनी याचिका में क्या मुख्य आरोप लगाया है?
उन्होंने आरोप लगाया है कि कमरा विधिवत आवंटित होने के बावजूद नादिया जिला प्रशासन ने उन्हें सर्किट हाउस से बाहर निकाल दिया.
इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की किस पीठ ने की?
इस याचिका पर सुनवाई जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में क्या कहा?
तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि वे केंद्र और राज्य सरकार की ओर से इस याचिका पर अपना औपचारिक जवाब दाखिल करेंगे.
14 अगस्त की रात को सर्किट हाउस में क्या हुआ था?
मोइत्रा के अनुसार, परिसर के बाहर भारी भीड़ जुट गई थी और उनके कमरा खाली करने से मना करने पर 'जय श्री राम' के नारे लगाए जा रहे थे.
मोइत्रा ने इस विवाद को लेकर लोकसभा अध्यक्ष से क्या अनुरोध किया था?
उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर जिला प्रशासन द्वारा जबरन कमरा खाली कराने के प्रयास में दखल देने की मांग की थी.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·26 दिन पहले

राजनीति में मैदान के बाहर भी ऐसी खींचतान चलती रहती है, अब कोर्ट तय करेगा कि सर्किट हाउस का यह ड्रामा कितना सही था।

Ravikash Gupta@ravikash·26 दिन पहले

कमरा वैध तरीके से एलॉट था तो फिर जिला प्रशासन को अचानक ऐसे कार्रवाई करने की क्या जरूरत पड़ गई?

Arjun Mehta@arjun-mehta·26 दिन पहले

रविकेश जी, मैं खुद एक बार नादिया सर्किट हाउस गया हूँ, वहाँ के हालात ऐसे हैं कि स्थानीय प्रशासन बिना ऊपर के इशारे के ऐसा कदम नहीं उठा सकता।

Karan Malhotra@karan-malhotra·27 दिन पहले

एक वैध आवंटन होने के बावजूद जिला प्रशासन ने सांसद को रात के वक्त इस तरह क्यों हटाया, जबकि उनके पास कमरा था? क्या अदालत के जवाब के बाद राज्य सरकार इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई करेगी?

Rohan Verma@rohan-verma·27 दिन पहले

करण भाई, प्रशासन पर सीधा सवाल उठाना ठीक है, पर रात के उस हंगामे में पुलिस के सामने हालात संभालने की मजबूरी भी तो देखनी चाहिए।

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