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नागौर में हल षष्ठी पर माताओं ने बच्चों की लंबी उम्र के लिए रखा व्रत, बंशीवाला मंदिर में महिलाओं के लिए विशेष आयोजनराजस्थान
2 सित॰ 2026, 1:18 pm (23 दिन पहले)· 2

नागौर में हल षष्ठी पर माताओं ने बच्चों की लंबी उम्र के लिए रखा व्रत, बंशीवाला मंदिर में महिलाओं के लिए विशेष आयोजन

नागौर में भाद्रपद कृष्ण षष्ठी पर हल छठ का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है, जहां माताओं ने बच्चों की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखा और बंशीवाला मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन हुआ।

राजस्थान के नागौर जिले में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि के अवसर पर हल षष्ठी यानी हल छठ का पर्व पारंपरिक श्रद्धा और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस विशेष अवसर पर क्षेत्र की माताओं ने अपनी संतान की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और पूरे परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए कठोर व्रत रखा है। मां की अटूट ममता, कठिन तपस्या और अटूट धार्मिक आस्था का यह संगम शहर भर के मंदिरों और घरों में देखने को मिल रहा है। संतान प्राप्ति की कामना रखने वाली महिलाएं भी इस दिन पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना में लीन हैं।

बंशीवाला मंदिर में कथा और पुरुषों के प्रवेश पर प्रतिबंध

हल षष्ठी के पावन अवसर पर नागौर स्थित काठड़िया का चौक के प्रसिद्ध बंशीवाला मंदिर में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। मंदिर के पुजारी नारायण और दीक्षांत पाराशर के अनुसार शाम सवा 7 बजे से लेकर चंद्रोदय तक, यानी करीब तीन घंटे तक श्रद्धालुओं को हल छठ की प्रामाणिक कथा सुनाई जाएगी। इस कथा वाचन के समय मंदिर परिसर की व्यवस्था को लेकर विशेष नियम बनाए गए हैं। कथा के दौरान परिसर में केवल महिला श्रद्धालुओं को ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी और पुरुषों का प्रवेश पूरी तरह बंद रहेगा। इस दौरान महिलाएं समूह में बैठकर संतान की लंबी आयु और पारिवारिक मंगल की प्रार्थना करेंगी। बाद में रात्रि आरती के समय पुरुष और महिला दोनों श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन करने का अवसर मिलेगा।

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ध्रुव और व्याघात योग का अत्यंत शुभ संयोग

धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ इस वर्ष हल षष्ठी का दिन ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी बेहद फलदायी माना जा रहा है। पंचांग के विश्लेषण के अनुसार बुधवार के दिन सुबह से लेकर रात 9 बजकर 12 मिनट तक अत्यंत शुभ ध्रुव योग का निर्माण हो रहा है। इस समय अवधि के समाप्त होने के पश्चात व्याघात योग प्रारंभ होगा जो पूरी रात प्रभावी रहेगा। तिथि, वार और नक्षत्र का यह दुर्लभ संयोग पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष रूप से फलदायी बताया गया है। इसी वजह से व्रती महिलाएं सुबह से ही नियम और निष्ठा के साथ अनुष्ठान संपन्न कर रही हैं।

हल से उगाई फसलों का त्याग और भैंस के दूध का नियम

हल षष्ठी व्रत की परंपराएं सीधे तौर पर कृषि संस्कृति और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने से जुड़ी हुई हैं। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता बलरामजी को समर्पित है, जिन्हें शेषनाग का अवतार माना जाता है। बलरामजी का प्रधान अस्त्र हल होने के कारण इस तिथि को हल षष्ठी के नाम से जाना जाता है। इस व्रत का पालन करने वाली महिलाएं हल से जोती गई या बोई गई भूमि से प्राप्त किसी भी प्रकार के अनाज, फल या सब्जियों का सेवन नहीं करती हैं। व्रत के दौरान पूरी तरह से अन्न का त्याग किया जाता है। इसके अतिरिक्त, इस व्रत में भैंस के दूध और उससे बने दही का विशेष धार्मिक महत्व है। संध्या काल में पूजा संपन्न होने के उपरांत महिलाएं भैंस के दूध से तैयार दही को ग्रहण करके ही अपना उपवास खोलती हैं।

सवाल-जवाब

हल षष्ठी का व्रत नागौर में क्यों रखा जाता है?
माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, स्वस्थ जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं। संतान प्राप्ति की कामना रखने वाली महिलाएं भी यह पूजा करती हैं।
नागौर के बंशीवाला मंदिर में कथा का समय और नियम क्या हैं?
बंशीवाला मंदिर में शाम 7:15 बजे से चंद्रोदय तक करीब तीन घंटे केवल महिलाओं को प्रवेश दिया जाएगा और कथा सुनाई जाएगी। पुरुषों का प्रवेश केवल रात की आरती के समय होगा।
हल षष्ठी पर कौन से विशेष शुभ योग बन रहे हैं?
इस दिन सुबह से रात 9:12 बजे तक ध्रुव योग रहेगा, जिसके बाद पूरी रात व्याघात योग प्रभावी रहेगा।
हल छठ के व्रत में भोजन से जुड़े क्या नियम हैं?
व्रत के दौरान हल से जोती या बोई गई फसल के अनाज और सब्जियों का सेवन नहीं किया जाता है। व्रत का पारण भैंस के दूध से बने दही से किया जाता है।
यह व्रत किस देवता को समर्पित है?
यह व्रत भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलरामजी को समर्पित है, जिन्हें शेषनाग का अवतार माना जाता है और जिनका प्रमुख शस्त्र हल था।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·22 दिन पहले

यह समाचार पारंपरिक लोक-आस्था और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय का एक बेहतर उदाहरण प्रस्तुत करता है। बंशीवाला मंदिर में महिलाओं के लिए विशेष प्रवेश व्यवस्था और पुरुषों के प्रतिबंध जैसे नियम यह दर्शाते हैं कि आयोजकों ने भारी भीड़ के दौरान शांति और सुव्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाए हैं। नागौर पुलिस और स्थानीय प्रशासन को इस प्रकार के बड़े आयोजनों में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·22 दिन पहले

यह आयोजन सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि संस्कृति से जुड़ा एक गहरा सामाजिक ताना-बाना प्रस्तुत करता है। जब बंशीवाला मंदिर में हजारों की संख्या में महिलाएं जुटती हैं, तो यह क्षेत्र में महिला सहभागिता और सामुदायिक एकजुटता का एक बड़ा मंच बन जाता है। हालांकि, इस तरह के बड़े धार्मिक आयोजनों में स्थानीय पुलिस और मंदिर प्रबंधन के बीच भीड़ नियंत्रण की पूर्व तैयारी यह तय करती है कि अनुष्ठान बिना किसी अव्यवस्था के संपन्न हों।

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