सिंह राशिफल 22 सितंबर 2026: आठवें भाव में शनि का प्रभाव, धैर्य और व्यवस्थित दिनचर्या से बनेंगे कामन्यूयॉर्क में वैश्विक तनाव पर बोले एस. जयशंकर, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में तुरंत बदलाव जरूरीकिश्त की मूल कंपनी वनईएमआई टेक्नोलॉजीज की बाजार में मजबूत एंट्री, 12 फीसदी प्रीमियम पर हुई लिस्टिंगदलाल स्ट्रीट पर शुक्रवार को लौटी रौनक, रियल्टी और मिडकैप की अगुवाई में सेंसेक्स और निफ्टी मजबूतअमेरिकी डॉलर के सामने कनाडाई डॉलर 5 अगस्त के बाद के सबसे निचले स्तर पर फिसला, व्यापार तनाव से बढ़ा दबावकच्चे तेल में चार दिनों की गिरावट थमी, एशियाई कारोबार में कीमतें संभलींशेयर बाजार में आज 64 कंपनियों का एक्स-डेट एक्शन: टीएएएल टेक का स्टॉक स्प्लिट और 63 शेयरों पर डिविडेंड का मौकाराजस्थान के देशनोक में खेत की डिग्गी में डूबे तीन सगे भाई, एक-दूसरे को बचाने के प्रयास में गई जानलखनऊ में 3,567 शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को बांटे गए नियुक्ति पत्र, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर जोरबैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक के कर्जदारों पर बढ़ा ब्याज का बोझ, 12 जून से लागू होंगी नई दरें
नैनीताल में नंदा देवी महोत्सव के दौरान पंच आरती से उतारी जाती है मां की नजरउत्तराखंड
21 सित॰ 2026, 3:46 pm (16 घंटे पहले)· 0

नैनीताल में नंदा देवी महोत्सव के दौरान पंच आरती से उतारी जाती है मां की नजर

नैनीताल में चल रहे 124वें नंदा देवी महोत्सव में रोजाना शाम प्रकृति के पांच तत्वों के जरिए मां नंदा-सुनंदा की विशेष पंच आरती की जा रही है।

उत्तराखंड के सरोवर नगरी नैनीताल में 124वें नंदा देवी महोत्सव के आयोजन से चारों ओर उल्लास और भक्ति का माहौल बना हुआ है। कुमाऊं क्षेत्र की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजी जाने वाली मां नंदा और मां सुनंदा के प्रति स्थानीय निवासियों के साथ दूर-दराज के भक्तों में अटूट आस्था देखने को मिल रही है। पूरे उत्सव में शाम के समय आयोजित होने वाला एक खास अनुष्ठान हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। यह अनुष्ठान मां नंदा-सुनंदा की पंच आरती है, जिसके पीछे यह गहरी मान्यता जुड़ी है कि प्रकृति के पांच मूलभूत तत्वों के जरिए देवी की नजर उतारी जाती है।

संध्या काल में शुरू होता है भक्तिमय अनुष्ठान

श्री राम सेवक सभा के पदाधिकारी डॉ. ललित तिवारी ने इस परंपरा के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है। उनके अनुसार, मां नंदा-सुनंदा की यह पंच आरती प्रतिदिन शाम को ठीक 6:30 बजे प्रारंभ की जाती है। यह पावन अनुष्ठान लगभग एक घंटे तक निरंतर चलता है, जिसमें हिस्सा लेने के लिए बहुत बड़ी तादाद में श्रद्धालु जुटते हैं। जैसे ही आरती का समय निकट आता है, प्रसिद्ध मां नयना देवी मंदिर का समूचा प्रांगण भक्तों की उपस्थिति से पूरी तरह भर जाता है।

ये भी पढ़ें

इस पूरे धार्मिक अनुष्ठान की औपचारिक शुरुआत पंडित भगवत जोशी द्वारा कराई जाती है। आरती के समय वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई देता है। पारंपरिक पहाड़ी वाद्य यंत्रों और ढोल-नगाड़ों की गूंज, मंदिर के विशाल घंटों की कर्णप्रिय आवाज और भक्तों के मुख से निकलने वाले मां नंदा-सुनंदा के गगनभेदी जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठता है।

प्रकृति के पांच तत्वों और विशेष सामग्रियों से पूजा

पंच आरती के पीछे के गूढ़ रहस्य को स्पष्ट करते हुए डॉ. ललित तिवारी बताते हैं कि लोक मान्यताओं और धार्मिक विधान में यह भाव निहित है कि जिस प्रकार किसी साधारण जन को नजर लग सकती है, उसी प्रकार मां को भी नजर लग सकती है। इसी भाव के तहत पंच तत्वों का स्मरण करते हुए मां की नजर उतारने की अनूठी रीत निभाई जाती है। यह प्रक्रिया भक्तों की अगाध श्रद्धा और समर्पण की गहरी भावना को दर्शाती है।

इस आरती के विधान में प्रकृति के पांच प्रमुख तत्वों आकाश, वायु, अग्नि, जल और मिट्टी का विधिवत आह्वान और स्मरण किया जाता है। पूजा को संपन्न करने के लिए विभिन्न प्रकार की पारंपरिक सामग्रियों का उपयोग होता है। इसमें मिट्टी के दीये, पवित्र जल से भरे हुए शंख, नवीन वस्त्र तथा आम और पीपल के पत्तों का प्रयोग मुख्य रूप से किया जाता है। इन सभी सामग्रियों और विशिष्ट पूजा विधियों के सामंजस्य से मां की नजर उतारने की रस्म पूरी की जाती है।

सूर्यास्त के बाद दिनभर की नजर उतारने का विधान

धार्मिक नियमों के मुताबिक, सूर्यास्त के तुरंत बाद होने वाली इस पंच आरती का आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक माना गया है। ऐसी मान्यता है कि दिनभर के पूजन और दर्शन के बाद शाम के समय यह आरती कर दिनभर की नजर उतारी जाती है। यही कारण है कि श्रद्धालुओं के लिए संध्या का यह समय अत्यंत पावन और फलदायी माना जाता है। दर्शनार्थी मां के दर्शन कर आरती में हाथ जोड़कर शामिल होते हैं और अपने जीवन की सुख-शांति व मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।

डॉ. ललित तिवारी ने यह भी स्पष्ट किया कि मां नयना देवी मंदिर में मां नंदा-सुनंदा के दिव्य आगमन और उनकी विधिवत प्राण प्रतिष्ठा होने के समय से ही हर शाम पंच आरती करने की यह समृद्ध परंपरा निरंतर चली आ रही है। यह मात्र एक सामान्य दैनिक पूजा भर नहीं है, बल्कि सदियों से चली आ रही लोक संस्कृति और आराध्या के प्रति निष्ठा का जीवंत रूप है।

दूर-दराज से उमड़ते हैं श्रद्धालु, बंटता है गेहूं का प्रसाद

नंदा देवी महोत्सव के दिनों में इस भव्य पंच आरती का अलौकिक दृश्य देखने के लिए केवल नैनीताल शहर के ही नहीं, बल्कि आसपास के पर्वतीय अंचलों और काफी दूर-दराज के इलाकों से भी भारी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं। जैसे-जैसे शाम ढलती है, मंदिर परिसर में लोगों की कतारें लंबी होने लगती हैं। आरती के आरंभ होते ही समूचा वातावरण जयकारों से गुंजायमान हो जाता है। उपस्थित जनसमूह पूर्ण श्रद्धाभाव से नंदा-सुनंदा के विग्रह के दर्शन करता है और सामूहिक पूजा में लीन हो जाता है।

आरती के विधिवत संपन्न होने के पश्चात सभी उपस्थित श्रद्धालुओं के मध्य प्रसाद का वितरण किया जाता है। इस अवसर पर विशेष रूप से गेहूं से तैयार किया गया पारंपरिक प्रसाद भी भक्तों को बांटा जाता है, जिसे लोग अत्यंत श्रद्धा से ग्रहण करते हैं। सामूहिक आस्था, पर्वतीय संस्कृति और पंचतत्वों की अवधारणा का यह सुंदर मेल नंदा देवी महोत्सव को एक अद्वितीय पहचान प्रदान करता है, जिससे हर शाम पूरा नैनीताल पूरी तरह नंदामय नजर आता है।

सवाल-जवाब

नैनीताल में नंदा देवी महोत्सव का कौन सा संस्करण मनाया जा रहा है?
नैनीताल में इस वर्ष 124वां नंदा देवी महोत्सव आयोजित किया जा रहा है।
मां नंदा-सुनंदा की पंच आरती किस समय शुरू होती है और कितनी देर चलती है?
यह पंच आरती प्रतिदिन शाम ठीक 6:30 बजे शुरू होती है और लगभग एक घंटे तक चलती है।
पंच आरती किस मंदिर परिसर में आयोजित की जाती है?
यह आरती नैनीताल स्थित मां नयना देवी मंदिर परिसर में संपन्न कराई जाती है।
आरती की शुरुआत कौन कराता है?
पंच आरती की शुरुआत पंडित भगवत जोशी द्वारा की जाती है।
पंच आरती में किन पांच तत्वों का स्मरण किया जाता है?
इस आरती में प्रकृति के पांच प्रमुख तत्वों मिट्टी, जल, अग्नि, वायु और आकाश को स्मरण किया जाता है।
पंच आरती की पूजा सामग्री में किन चीजों का इस्तेमाल होता है?
पूजा में मिट्टी के दीये, जल से भरा शंख, वस्त्र तथा आम और पीपल के पत्तों का प्रयोग किया जाता है।
आरती के समापन के बाद श्रद्धालुओं को कौन सा प्रसाद बांटा जाता है?
आरती संपन्न होने के बाद भक्तों को विशेष रूप से गेहूं से तैयार किया गया प्रसाद वितरित किया जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Neha Verma@neha-verma·12 घंटे पहले

नंदा देवी महोत्सव में होने वाली पंच आरती केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पारंपरिक लोक संस्कृति और पर्यावरण का अनूठा संगम है। जिस तरह से इसमें आकाश, वायु, अग्नि, जल और मिट्टी जैसे पांच प्राकृतिक तत्वों के साथ आम व पीपल के पत्तों का प्रयोग होता है, वह हमारी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का एक बेहतरीन तरीका है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय लोक कला, पहाड़ी वाद्य यंत्रों और पारंपरिक परिधानों को एक बड़ा मंच मिलता है, जिससे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा मिलता है और यह पर्यटन व अर्थव्यवस्था के लिहाज से भी एक महत्वपूर्ण अवसर बनता है।

Ravikash Gupta@ravikash·15 घंटे पहले

नैनीताल का 124वां नंदा देवी महोत्सव केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यह कुमाऊं क्षेत्र के सांस्कृतिक पर्यटन और स्थानीय आर्थिकी को भी एक बड़ा संबल प्रदान करता है। ऐसे पारंपरिक अनुष्ठान और अनूठे रीति-रिवाज क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था व पर्यटन आधारित स्टार्टअप्स के लिए सीजनल कारोबार का एक मजबूत आधार तैयार करते हैं, जिससे स्थानीय कारीगरों और व्यापारियों को बड़ा वित्तीय लाभ मिलता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·15 घंटे पहले

यह सांस्कृतिक आयोजन कुमाऊं क्षेत्र की सॉफ्ट पावर का सशक्त उदाहरण है, जो क्षेत्रीय पहचान को मजबूत करता है। ऐसे महोत्सव न केवल सांस्कृतिक संरक्षण का कार्य करते हैं, बल्कि राज्य में कम्युनिटी-बेड टूरिज्म को बढ़ावा देकर पहाड़ी अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक स्थिरता और प्रोत्साहन देने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·15 घंटे पहले

नैनीताल के नंदा देवी महोत्सव में प्रकृति के पांच तत्वों से जुड़ी पंच आरती केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि क्षेत्रीय लोक आस्था और पर्यावरण के साथ गहरे तालमेल का जीवंत उदाहरण है। कुमाऊं की इस सांस्कृतिक धरोहर में जनसैलाब का उमड़ना यह साबित करता है कि ऐसे पारंपरिक आयोजन स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·15 घंटे पहले

इस पारंपरिक आयोजन के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ और सांस्कृतिक गतिविधियों से सार्वजनिक व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन एक बड़ा प्रशासनिक दायित्व बन जाता है। इस तरह के आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस प्रशासन के लिए अत्यंत आवश्यक है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp