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नीम और गोमूत्र से तैयार करें नीमास्त्र, फसलों को रस चूसक कीटों से बचाने का आसान देसी फॉर्मूलाराजस्थान
19 सित॰ 2026, 8:12 pm (5 दिन पहले)· 0

नीम और गोमूत्र से तैयार करें नीमास्त्र, फसलों को रस चूसक कीटों से बचाने का आसान देसी फॉर्मूला

रासायनिक कीटनाशकों के खर्च से बचने के लिए किसान नीम की पत्तियों, गोमूत्र और गोबर से प्राकृतिक नीमास्त्र तैयार कर कीटों से फसलों की सुरक्षा कर रहे हैं।

खेती में फसलों पर कीटों का हमला होते ही पैदावार और पौधों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ जाती है। माहू, सफेद मक्खी, थ्रिप्स और हरे तेले जैसे रस चूसक कीट कोमल टहनियों और पत्तों का रस चूसकर पौधों को कमजोर कर देते हैं। बाजार में मिलने वाले महंगे रासायनिक कीटनाशकों के विकल्प के तौर पर किसान अब पारंपरिक और प्राकृतिक तरीकों को अपना रहे हैं। जालोर जिले के सायला तहसील स्थित लखाणी जैविक फार्म से जुड़े किसान बलवंत सिंह अपने खेतों में फसलों की सुरक्षा के लिए घर पर ही नीमास्त्र तैयार कर रहे हैं।

नीमास्त्र बनाने के लिए आवश्यक सामग्री और अनुपात

प्राकृतिक कीटनाशक नीमास्त्र को तैयार करने की विधि काफी सरल है और इसके लिए उपयोग होने वाले घटक आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। किसान बलवंत सिंह के अनुसार, इस मिश्रण को बनाने के लिए प्राथमिक सामग्री नीम की पत्तियां या नीम की गिरी होती है। लगभग 5 से 10 किलोग्राम नीम की सामग्री एकत्र की जाती है। इसके साथ ही लगभग 2 किलोग्राम देसी गाय का ताजा गोबर और 5 से 10 लीटर गोमूत्र की आवश्यकता होती है। इन सभी जैविक सामग्रियों को एक बड़े ड्रम में करीब 200 लीटर पानी के साथ अच्छी तरह घोल दिया जाता है।

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तैयारी की प्रक्रिया और फर्मेंटेशन का समय

घोल तैयार हो जाने के तुरंत बाद इसका छिड़काव पौधों पर नहीं किया जाता। इसे प्रभावी बनाने के लिए रासायनिक प्रक्रियाओं और प्राकृतिक गुणों के सक्रिय होने का समय दिया जाता है। पूरे मिश्रण को लगभग 24 से 48 घंटे के लिए सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है। इस अवधि के दौरान दिन में कई बार घोल को डंडे की मदद से अच्छी तरह हिलाया जाता है, जिससे सभी घटक पानी में समान रूप से घुल-मिल जाएं। निर्धारित 24 से 48 घंटे पूरे होने के बाद पूरे घोल को पतले कपड़े या छलनी से अच्छी तरह छान लिया जाता है, जिसके बाद यह फसलों पर छिड़काव के लिए पूरी तरह तैयार हो जाता है।

किन कीटों पर असरदार है यह देसी घोल

नीमास्त्र का उपयोग विशेष रूप से पौधों का रस चूसने वाले नुकसानदेह कीटों के नियंत्रण में बेहद असरदार साबित होता है। इनमें माहू, सफेद मक्खी, थ्रिप्स, जैसिड यानी हरा तेला और मिलीबग शामिल हैं। इसके साथ ही, शुरुआती अवस्था में मौजूद छोटे कीटों तथा इल्ली वर्ग के कीटों पर भी यह घोल प्रभावी असर दिखाता है।

कीटों के फैलाव को रोकने की कार्यप्रणाली

नीमास्त्र का छिड़काव पौधों पर एक प्राकृतिक सुरक्षा चक्र तैयार करता है। यह घोल कीटों के भोजन ग्रहण करने की क्षमता को धीमा कर देता है और उनकी अंडे देने की गतिविधि पर सीधा असर डालता है। कीटों की सक्रियता सीमित हो जाने के कारण उनका वंश आगे नहीं बढ़ पाता, जिससे फसलें सुरक्षित रहती हैं। यही वजह है कि खेती की लागत घटाने और रासायनिक अवशेषों से बचने के लिए किसान इस देसी उपाय को अपना रहे हैं।

सवाल-जवाब

नीमास्त्र तैयार करने के लिए कौन-कौन सी सामग्री आवश्यक है?
इसके लिए 5 से 10 किलो नीम की पत्तियां या नीम की गिरी, लगभग 2 किलो देसी गाय का गोबर, 5 से 10 लीटर गोमूत्र और करीब 200 लीटर पानी की जरूरत होती है।
घोल को कितने समय तक रखने के बाद छिड़काव किया जाता है?
इस मिश्रण को तैयार करने के बाद लगभग 24 से 48 घंटे तक रखा जाता है और बीच-बीच में हिलाया जाता है, जिसके बाद इसे छानकर इस्तेमाल करते हैं।
नीमास्त्र किन कीटों के नियंत्रण में सबसे अधिक उपयोगी है?
यह मुख्य रूप से माहू, सफेद मक्खी, थ्रिप्स, हरे तेले (जैसिड) और मिलीबग जैसे रस चूसक कीटों तथा शुरुआती इल्ली वर्ग के कीटों पर असरदार है।
यह जैविक घोल कीटों को कैसे नियंत्रित करता है?
नीमास्त्र कीटों के भोजन खाने और अंडे देने की प्राकृतिक प्रक्रिया को मंद कर देता है, जिससे उनका प्रसार रुक जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·5 दिन पहले

यह खबर कृषि क्षेत्र में बढ़ती इनपुट लागत के आर्थिक दबाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक बदलाव को दर्शाती है। जब किसान महंगे रासायनिक कीटनाशकों के विकल्प के रूप में गोमूत्र और नीम आधारित 'नीमास्त्र' जैसे घरेलू फॉर्मूलों को अपनाते हैं, तो इससे खेती की लागत सीधे तौर पर घटती है। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में स्थानीय स्तर पर कृषि-तकनीक आधारित स्टार्टअप्स और जैविक उत्पादों के व्यावसायिक उत्पादन के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

यह पहल कृषि अर्थव्यवस्था में लागत घटाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। जब किसान महंगे रसायनों के बजाय स्थानीय संसाधनों जैसे नीम और गोमूत्र से नीमास्त्र बनाते हैं, तो इससे कृषि आगत लागत में भारी कमी आती है। ग्रामीण स्तर पर इस तरह के जैविक समाधानों का प्रसार टिकाऊ खेती और किसानों की आय में सुधार की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

सहकर्मी रविकाश गुप्ता के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह कहा जा सकता है कि इस तरह के देसी फॉर्मूलों का प्रसार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ सरकारी नीतियों के उस उद्देश्य को भी बल देता है जिसमें कृषि में इनपुट कॉस्ट घटाने पर जोर दिया जा रहा है। जब किसान स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नीम और गोमूत्र जैसे संसाधनों से नीमास्त्र तैयार करते हैं, तो इससे बहुमूल्य विदेशी मुद्रा की बचत होती है जो रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के आयात पर खर्च होती है। नीतिगत स्तर पर इस प्रकार के जैविक और पारंपरिक नवाचारों को बढ़ावा देना दीर्घकालिक रूप से मृदा स्वास्थ्य और ग्रामीण आजीविका के संतुलन को बनाए रखने के लिए बेहद आवश्यक है।

Rohan Verma@rohan-verma·5 दिन पहले

यह देसी फॉर्मूला खेती की लागत कम करने की दिशा में एक प्रभावी कदम है। जिस तरह से लखाणी जैविक फार्म पर नीम, गोबर और गोमूत्र का उपयोग कर नीमास्त्र तैयार किया जा रहा है, वह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और टिकाऊ खेती के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यदि ऐसे प्रयोगों को सरकारी स्तर पर बढ़ावा मिले और किसानों को इसका विधिवत प्रशिक्षण दिया जाए, तो उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में किसानों पर कर्ज का बोझ काफी हद तक कम हो सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

यह पारंपरिक प्रयोग कृषि क्षेत्र में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से उपजे वित्तीय संकट और भूमि की उर्वरता क्षीण होने की समस्या का एक व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है। जब किसान महंगे रासायनिक उत्पादों के जाल से बाहर निकलकर स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर होते हैं, तो इससे न केवल कृषि लागत में उल्लेखनीय कमी आती है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर कर्ज के जाल में फंसने वाले किसानों की संख्या में भी कमी आने की संभावना बनती है। इस तरह की स्थानीय पहलों को यदि संस्थागत और प्रशासनिक समर्थन मिले, तो यह कृषि अर्थव्यवस्था को अधिक टिकाऊ और आत्मनिर्भर बना सकती है।

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